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होर्मुज में फिर से युद्ध तनाव, अमेरिका-ईरान युद्धविराम संकट में फंसे

समाचार सारांश

  • अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार रात को हुई हमलों और जवाबी कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम को और कमजोर कर दिया है।
  • अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल, ड्रोन भंडारण केंद्र और रडार सिस्टम पर हमला किया जबकि ईरान ने भी अमेरिकी सुरक्षा ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है।
  • गुरुवार को मालवाहक जहाज पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद तनाव बढ़ा है, जिससे संयुक्त राष्ट्र की बचाव योजना प्रभावित हुई है।

१४ जून, काठमांडू। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार रात को युद्ध की तनाव फिर से बढ़ी है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम को कमजोर कर दिया है। यह संघर्ष शुरू होने के १२०वें दिन और भी तीव्र हो गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकम) ने शुक्रवार को ईरान के मिसाइल, ड्रोन भंडारण केंद्र और समुद्री किनारे स्थित रडार प्रणाली पर हमला किया है। यह हमला एक दिन पहले मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले का बदला माना जा रहा है। वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया है।

यह विवाद कुछ महीने पहले फरवरी में शुरू हुआ था। १७ जून को दोनों पक्षों ने १४ बिंदु समझौते पर सहमति देकर युद्धविराम की घोषणा की थी। इस समझौते के अनुसार, ईरान ने ६० दिन तक व्यापारिक जहाजों से शुल्क नहीं लेने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने का वादा किया था।

गुरुवार को मालवाहक जहाज “एवर लवली” पर ईरानी ड्रोन हमला हुआ था। यह जहाज सिंगापुर का झंडा लेकर एवरग्रीन कंपनी के स्वामित्व में है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी युकेएमटीओ के अनुसार, यह जहाज ओमान के दाहित बंदरगाह से लगभग ७.५ नॉटिकल माइल दक्षिण-पूर्व में हमले का शिकार हुआ था।

युकेएमटीओ ने कहा कि जहाज उस मार्ग से गुजर रहा था जो उन्होंने सुझाया था, तभी ड्रोन हमले में जहाज का पुल (ब्रिज) क्षतिग्रस्त हो गया। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है।

इस हमले में कोई मानवीय या पर्यावरणीय बड़ी क्षति नहीं हुई है। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने ११ हजार से अधिक जहाज चालक को बचाने की योजना को होर्मुज स्ट्रेट में युद्ध की स्थिति के कारण रोक दिया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले को युद्धविराम का उल्लंघन और ‘मूर्खतापूर्ण’ कदम बताया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट मार्ग पर चार एकतरफा ड्रोन हमले किए।’

ट्रम्प ने बताया, ‘इन ड्रोन में से एक ने एक बड़े कार्गो जहाज के ऊपरी डेक पर सीधे हमले किए, जिससे नुकसान हुआ, लेकिन जहाज अपने गंतव्य की ओर बढ़ने में सक्षम रहा। बाकी के तीन ड्रोन को हमने गिरा दिया।’

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होगी, उन्होंने कहा, ‘आप जान जाएंगे।’

जब पूछा गया कि क्या युद्धविराम अभी भी कायम है, तो उन्होंने अस्पष्ट जवाब दिया और कहा कि ईरान ने थोड़ा अलग व्यवहार किया है।

इसके पहले, वॉशिंगटन डीसी में एक कंज़र्वेटिव क्रिश्चियन सभा में उन्होंने कहा था कि ईरान के पास अभी भी कुछ हमला करने की क्षमता बची है। उन्होंने कहा, ‘ईरान युद्ध जीत नहीं रहा, लेकिन हमला करने की क्षमता रखता है।’ उन्होंने इसे चौंकाने वाला और अलोकप्रिय हमला भी बताया था।

शुक्रवार को निशाने पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र तथा तटीय रडार प्रणाली थी जिस पर अमेरिका ने हमला किया। सेंटकम ने इसे ‘शक्तिशाली जवाब’ बताया है।

सेंटकम के बयान में कहा गया है, ‘ईरानी सेना का व्यापारिक जहाजों पर हमला युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन है।’ साथ ही, ‘ईरान की इस हरकत ने स्ट्रेट के सुरक्षित आवागमन को कमजोर कर दिया है।’

यह प्रतिबद्धता भी जताई गई है कि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए निरंतर समन्वय और सहयोग किया जाएगा। सेना कमांड ने हमला संबंधित वीडियो भी जारी किया। एक अमेरिकी अधिकारी ने सीएनएन को बताया, ‘यह हमला सीमित कदम है, बड़ी लड़ाई की शुरुआत नहीं।’

ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार सुबह एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका से संबंधित स्थानों पर जवाबी हमला किया गया है। मंत्रालय ने इस घटना की जिम्मेदारी अमेरिकी प्रशासन पर लगाई है और कहा कि अमेरिका ने समझौता उल्लंघन किया है।

ईरान की आईआरजीसी ने क्षेत्रीय अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले का दावा करते हुए चेतावनी दी, ‘यदि हमला दोहराया गया तो हम और व्यापक जवाब देंगे।’

पेंटागन ने अब तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। उपराष्ट्रपति जेडी वान्स ने शुक्रवार शाम कहा, ‘हिंसा का जवाब फिर हिंसा है।’ उन्होंने बताया कि ईरान ने युद्धविराम समझौता किया है और अमेरिका उसका पालन कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘अगर ईरान को समझौते के कार्यान्वयन में कोई सवाल हो तो तुरंत फोन कर सकते हैं।’

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजिजी ने सोशल मीडिया पर अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘अमेरिका बातचीत जारी रहते हुए फिर से ईरान पर हमला कर रहा है।’ उन्होंने कहा कि युद्धविराम उल्लंघन अमेरिका को पछताना पड़ेगा और दोषारोपण का खेल अब नहीं चलेगा।

इस विवाद की मुख्य वजह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से ईरान द्वारा शुल्क वसूलना या न वसूलना है। कई अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञ इस शुल्क प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हैं।

बुधवार को ट्रम्प ने कहा था कि ईरान ने अमेरिका को बताया है कि वह कोई शुल्क नहीं लेगा, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो बातचीत तुरंत टूट जाएगी।

मंगलवार को ओमान के मस्कट में ईरान और ओमान ने स्ट्रेट के भविष्य के प्रबंधन पर चर्चा की। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने दोनों देशों ने शुल्क-मुक्त सुरक्षित आवागमन बनाए रखने का भरोसा दिया।

लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने कहा है, ‘होर्मुज स्ट्रेट का प्रबंधन कभी युद्ध पूर्व स्थिति में वापस नहीं जाएगा।’

गुरुवार को आईआरजीसी ने जहाजों को केवल उन रास्तों से आवागमन सुरक्षित रखने की चेतावनी दी जो ईरान को सूचित किए गए हों, जिससे अमेरिकी प्रशासन की ‘स्ट्रेट पूरी तरह खुला है’ वाली दलील को चुनौती मिली।

तेहरान से रिपोर्ट कर रहे अल जजीरा के रसूल सरदार आताश के अनुसार, आईआरजीसी ने समझौते की धारा ५ को आधार बनाया है जिसमें ‘होर्मुज स्ट्रेट के आवागमन के लिए ईरान से समन्वय आवश्यक’ उल्लेखित है।

ईरान का दावा है कि जहाज चाहे ईरान या ओमान की समुद्री सीमा से गुजरें, दोनों ही स्थितियों में ईरान से समन्वय आवश्यक है। इस विषय पर विवाद जारी है और होर्मुज स्ट्रेट ईरान की सबसे बड़ी दवाब की रणनीति बन गया है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि वार्ता में अपनी स्थिति कमजोर होने पर वह और भी ज्यादा जवाबी हमले करेगा।

रोम विश्वविद्यालय के विश्लेषक आंद्रिया देस्सी के अनुसार, ताजा तनाव ने समझौते को कमजोर और भंग करने की स्थिति में ला दिया है। वे मानते हैं कि दोनों पक्ष बड़ी लड़ाई में नहीं जाना चाहते।

उनके अनुसार, अगले ३० से ६० दिनों में बातचीत के दौरान ऐसे तनाव दोबारा हो सकते हैं। दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो भविष्य में टकराव को और बढ़ा सकता है।

तेहरान विश्वविद्यालय के शोधकर्ता मोहम्मद इस्लामी का कहना है कि दोनों पक्ष नए हमलों के बाद खुद को विजेता दिखाना चाहते हैं, लेकिन कूटनीतिक समाधान खोजने के दबाव में सीमित ही हमले कर रहे हैं।

ईरान ने अपने हमले को रक्षात्मक बताया है और खाड़ी के आस-पास के देशों को अमेरिका के खिलाफ हमले के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है।

वे कहते हैं कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट नहीं मानता और अन्य देशों को नए नियम स्वीकार कराना चाहता है। नए नियमों के तहत मालसामान के सुरक्षित आवागमन के लिए शुल्क देना आवश्यक होगा, जिस पर ईरान固执 है। (एजेंसियों के सहयोग से)