अर्घाखाँची में चार प्रजातियों के दुर्लभ गिद्धों का सफल प्रजनन, 33 बच्चे उड़ने में कामयाब
अर्घाखाँची जिले में इस वर्ष चार प्रजातियों के 33 गिद्धों के बच्चों ने सफलतापूर्वक पनपकर उड़ना शुरू किया है। गिद्ध विशेषज्ञ कृष्ण भुसाल के अनुसार, डंगर गिद्ध का सफल प्रजनन न केवल नेपाल में बल्कि वैश्विक संरक्षण अभियान के लिये भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डिवीजन वन कार्यालय के सूचना अधिकारी केशव खड़कलें ने बताया कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए गिद्धों के संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
अर्घाखाँची जिला विश्व में दुर्लभ और संकटापन्न गिद्धों के संरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है। इस वर्ष के प्रजनन सत्र में यहां चार प्रजातियों के गिद्धों ने सफलता के साथ अपने बीजारोपण किये। अब तक 33 बच्चे सुरक्षित रूप से घोंसलों से उड़ने में सक्षम हुए हैं, यह जानकारी गिद्ध विशेषज्ञ कृष्ण भुसाल ने दी। जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों और चट्टानी पहाड़ी क्षेत्रों में बने घोंसलों में इस साल जोड़े उत्साहपूर्वक गिद्धों के बच्चे उगकर उड़ गए हैं।
विशेष रूप से, छत्रदेव गाउँपालिका के वन क्षेत्र में संकटापन्न डंगर गिद्ध ने सल्ला के पेड़ों पर 23 घोंसले बनाए, जिनमें से 15 घोंसलों से बच्चों ने सफल उड़ान भरी। ‘‘डंगर गिद्ध का इस तरह का सफल प्रजनन न केवल नेपाल में बल्कि विश्वव्यापी संरक्षण प्रयास के लिए भी महत्वपूर्ण है,’’ भुसाल ने कहा। इसके अलावा, मालारानी गाउँपालिका के घेराभिर में हिमाली गिद्ध ने 22 जबकि हाडफोर गिद्ध ने 3 घोंसले बनाए थे।
गिद्ध एक वर्ष में केवल एक अंडा देते हैं, इसलिए एक बच्चे का पालन-पोषण लंबा समय लेता है। सामान्यतः असोज–कार्तिक से प्रारंभ होकर प्रजनन चक्र वैशाख–जेठ तक चलता है, इसलिए इस दौरान प्रजनन दर में सुधार होना स्वाभाविक और बड़ी सफलता है,’ भुसाल ने बताया। ‘ऐसे समय में केवल एक वर्ष में 33 बच्चों का उड़ान भरना संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत सकारात्मक संकेत है।’ विश्व में दुर्लभ और संकटापन्न सेतो गिद्ध ने सन्धिखर्क, भूमिकास्थान, मालारानी और शितगंगा नगरपालिका के विभिन्न स्थानों पर घोंसले बनाए हैं और वर्तमान में बच्चों को पाल रहा है।
प्राकृतिक वातावरण के संतुलन में गिद्धों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। मृत जीवों के मांस को खाने वाले गिद्धों को प्रकृति का ‘सफाईकर्मी’ भी कहा जाता है। गिद्धों की संख्या में कमी से पर्यावरणीय प्रदूषण, रोग फैलने का खतरा और जैविक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसके संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है, यह जानकारी डिवीजन वन कार्यालय अर्घाखाँची के सूचना अधिकारी केशव खड़कलें ने दी। इस वर्ष चार प्रजातियों के गिद्धों के सफल प्रजनन और 33 बच्चों की उड़ान ने जिले की जैविक विविधता संरक्षण में नेपाल के संरक्षण अभियान के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
