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सुवास अधिकारी का नाट्य ग्रन्थ ‘नो सिग्नल’ का लोकार्पण समारोह सम्पन्न

समाचार सारांश

OK AI द्वारा सिर्जना, सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • डेढ़ दशक से रंगमंच में सक्रिय सुवास अधिकारी ने अपनी नई नाट्य कृति नो सिग्नल का रविवार को धरान में लोकार्पण किया।
  • यह कृति डिजिटल युग में खोती मानवीय संवेदनशीलता और आधुनिक समाज की एकाकीकरण को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करती है।
  • निर्देशक घिमिरे युवराज ने बताया कि नाट्य कृति ने तकनीक के विकास के बावजूद मानवीय संबंधों के विकल्प न होने का संदेश दिया है।

१५ असार, सुनसरी। डेढ़ दशक से सृष्टि नाट्य समूह के माध्यम से रंगमंच में सक्रिय रहने वाले सुवास अधिकारी ने अपनी नई नाट्य कृति ‘नो सिग्नल’ का लोकार्पण किया है। धरान रीडर्स ग्रुप के आयोजन में यह नाटक रविवार को प्रस्तुत किया गया।

नाटक लेखन, निर्देशन और अभिनय में संलग्न होकर स्वीडन के स्टॉकहोम में रहने वाले अधिकारी ने ‘नो सिग्नल’ के माध्यम से डिजिटल तकनीक के युग में कहीं खोती मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक ने जीवन को तो सरल बनाया है, लेकिन अकेलापन दूर करने और जीवन को जीवंत बनाने में मानवीय संबंधों का कोई विकल्प नहीं है। यह सन्देश उन्होंने अपनी नाट्य कृति से दिया है।

लोकार्पण समारोह में, शिल्पी थिएटर, काठमांडू के निर्देशक और नाट्य सर्जक घिमिरे युवराज ने ‘नो सिग्नल’ को एक प्रतीकात्मक शैली में मानवीय संबंधों, संयोग और जीवन की नश्वरता को दर्शाने वाला बताया।

अतः टिप्पणीकार एवं उपप्राध्यापक राजेश विद्रोही ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की प्रगति के बावजूद मानवीय संबंध अपरिहार्य हैं और नाट्य कृति ने आधुनिकता के कारण उत्पन्न अकेलेपन व बेचैनी की समाप्ति की असंभवता को चित्रित किया है।

स्वीडन में पत्नी सोमा थापा के साथ २०६५ साल से रह रहे अधिकारी स्टॉकहोम में नेपाली समुदाय के साथ मिलकर नेपाल मंडप नामक संस्था भी संचालित कर रहे हैं। कुछ सप्ताह के लिए नेपाल आकर उन्होंने पुस्तक के लोकार्पण के साथ-साथ शिल्पी थिएटर में नाट्य मंचन की भी तैयारी की है।