नए शोध के अनुसार, जिम में लोकप्रिय क्रिएटिन सप्लिमेंट डिप्रेशन के इलाज में सहायक हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के वैज्ञानिकों ने बताया है कि क्रिएटिन मस्तिष्क की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को सुधार कर मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने व्यापक क्लिनिकल परीक्षण की आवश्यकता और क्रिएटिन की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने की चेतावनी भी दी है।
सामान्यतः जिम जाने और मांसपेशियाँ बनाने वालों में बेहद लोकप्रिय ‘क्रिएटिन’ सप्लिमेंट डिप्रेशन (मनोवैज्ञानिक अवसाद) के उपचार में भी मददगार साबित हो सकता है, यह नया शोध सामने आया है। मस्तिष्क की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली को प्रोत्साहित करते हुए क्रिएटिन मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है। हालांकि अब तक मिले प्रमाण आशाजनक हैं, फिर भी इसे औषधि के रूप में सिफारिश करने के लिए और गहन शोध की आवश्यकता बताई जा रही है।
‘ब्रेन मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित एक प्रणालीगत समीक्षा में, यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के शोधकर्ताओं ने दुनिया के विभिन्न देशों से पाँच क्लिनिकल ट्रायल का विस्तृत विश्लेषण किया। इन ट्रायल में कुल 238 प्रतिभागी शामिल थे, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं। अध्ययन के नतीजे मिश्रित रहे। दो ट्रायल में क्रिएटिन के प्रयोग से डिप्रेशन के लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार दिखा, जबकि बाकी तीन में कोई खास लाभ नजर नहीं आया।
विशेष रूप से, ‘‘मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर’’ से पीड़ित महिलाओं पर किए गए एक परीक्षण में, नियमित डिप्रेशन दवा ‘‘एसिटालोप्राम’’ के साथ रोजाना 5 ग्राम क्रिएटिन देने के बाद आठ सप्ताह में डिप्रेशन के लक्षणों में स्पष्ट कमी आई और कई मरीजों में स्वास्थ्य सुधार देखा गया। वहीं, अन्य दवाओं से लाभ न मिलने वाले मरीजों, किशोरों और बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त लोगों पर किए गए बाकी तीन परीक्षणों में क्रिएटिन का कोई विशेष प्रभाव नहीं पाया गया।
क्रिएटिन डिप्रेशन से लड़ने में सहायक इसलिए होता है क्योंकि यह मस्तिष्क की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है। क्रिएटिन मांसपेशियों की तरह मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पन्न करने वाली ‘एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट’ (एटीपी) निर्माण प्रक्रिया को तेज करता है। इसके अलावा, मूड नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क रसायन ‘डोपामाइन’ और ‘सेरोटोनिन’ पर भी क्रिएटिन के प्रभाव होने का अनुमान वैज्ञानिकों को है। विशेषज्ञों ने डिप्रेशन के उपचार में क्रिएटिन की वास्तविक क्षमता समझने के लिए अधिक व्यापक, दीर्घकालिक और बड़े पैमाने पर क्लिनिकल परीक्षण कराने पर जोर दिया है।
