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डीडीसी को आर्थिक संकट से पुनः जीवनदान मिला?

१९ असार, काठमाडौं। कुछ समय पूर्व ‘‘सेतो हात्ती’’ जैसी समस्या से जूझ रही और गंभीर आर्थिक संकट में फंसी दुग्ध विकास संस्थान (डीडीसी) को प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह नेतृत्व वाली सरकार ने अपने पहले १०० दिनों के भीतर पुनः जीवित करने में सफलता हासिल की है। प्रधानमन्त्री शाह की प्रत्यक्ष रुचि, कृषि, वन तथा वातावरण मन्त्री गीता चौधरी की पहल एवं निर्देशन और बाजार प्रबंधन में देखी गई सक्रियता के कारण संस्थान ने इस अवधि में सुधार की गति पकड़ने में कामयाबी पाई है। संस्थान में बार-बार नेतृत्व परिवर्तन होने के कारण काम ठप रह जाता था। लंबे समय रिक्त रहे महाप्रबंधक पद पर मन्त्रीस्तरीय निर्णय के तहत मन्त्रालय के सहसचिव डॉ. शरण पाण्डे को नियुक्त किया गया। पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने तीन महीनों के भीतर किसानों के बकाया भुगतान को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। पहले डीडीसी की स्थिति काफी दयनीय थी। संस्थान किसानों से दूध संग्रह करता था, लेकिन भुगतान ८ से ९ महीने बाद होता था। अब इस अवधि को तीन महीनों तक कम किया गया है। कर्मचारियों द्वारा नियमों के विरुद्ध मासिक हजारों रुपए के बराबर दूध और घी निःशुल्क इस्तेमाल करने, अनावश्यक ढुलाई खर्च बढ़ाने और गुणवत्ता पर ध्यान न देने जैसी प्रवृत्ति व्यापक थी, जिसने उपभोक्ताओं का विश्वास कमजोर किया था। लेकिन पिछले १०० दिनों में इन सभी विकृतियों को हटाकर संस्थान ने अपनी व्यावसायिक छवि सुधारने में सफलता पाई है।

जेठ की पहली सप्ताह में कृषि मन्त्री चौधरी ने डीडीसी के समग्र प्रबंधन सुधार के लिए ९ बिंदुओं वाला निर्देश जारी किया, जिसके बाद सुधार कार्य शुरू हुआ। मन्त्री चौधरी ने पिछले ५ वर्षों का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने, बकाया राशि वसूली करने, इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी अनिवार्य करने और कर्मचारियों की गैरकानूनी सुविधाएं तुरंत समाप्त करने का आदेश दिया था। इन निर्देशों के अनुसार संस्थान ने प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुशासन को सख्त किया। किसानों के भुगतान और मूल्य वृद्धि की स्थिति प्रधानमन्त्री शाह के निकट सूत्रों के अनुसार संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि किसानों के भुगतान में दिख रही है। पहले ८ महीने की भुगतान अवधि को तीन महीने में कम कर दिया गया है। ‘पिछले दो महीनों में, २० वैशाख से १९ असार तक की अवधि में संस्थान ने ४१ करोड़ ५० लाख रुपए किसानों को भुगतान कर दिया है,’ स्रोत ने बताया, ‘भदौ के पहले सप्ताह तक भुगतान अवधि को २५ दिनों में लाने का प्रयास हो रहा है।’ पहले डीडीसी पर किसानों का लगभग ६० करोड़ रुपए का बकाया था। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए दूध की खरीद मूल्य प्रति लीटर ६५ रुपए से बढ़ाकर ६६ रुपए कर दिया गया है, जिससे किसानों के बीच संस्थान के प्रति खोया हुआ भरोसा पुनः जगाने की उम्मीद है। बाजार में प्रधानमन्त्री शाह के प्रभाव और मन्त्रिपरिषद की एकता ने डीडीसी के उत्पादन प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने स्थानीय उत्पादन और डीडीसी की गुणवत्ता के प्रति दिया गया संदेश उपभोक्ताओं को सरकारी उत्पादों की ओर आकर्षित किया है।