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भन्सार कार्यालय न होने के कारण ठोरी के पर्यटन क्षेत्र में संकट

१९ असार, ठोरी (पर्सा)। मधेश के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ठोरी में भारतीय नंबर प्लेट वाले चारपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगने के बाद यहाँ के पर्यटन क्षेत्र में गंभीर संकट पैदा हो गया है।

शुक्रवार से अचानक भारतीय चारपहिया वाहनों पर रोक लगाए जाने से ठोरी क्षेत्र के पर्यटन, व्यवसाय और स्थानीय जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

सीमा सुरक्षा बल (बीओपी) ठोरी ने जिल्ला कमांड की हिदायत पर भन्सार प्रक्रिया पूर्ण किए बिना नेपाल में प्रवेश की कोशिश करने वाले भारतीय वाहनों को वापस भेजना शुरू कर दिया है, जिसके कारण नेपाल भ्रमण के लिए आए भारतीय पर्यटक निराश होकर भारत लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

कई वर्षों से ठोरी नाका भारतीय पर्यटकों के लिए एक सहज प्रवेश द्वार माना जाता रहा है। प्रतिदिन हजारों भारतीय पर्यटक इसी नाके से प्रवेश कर ठोरी की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थल, वन्यजीव, ग्रामीण पर्यटन एवं विभिन्न पर्यटक स्थलों का आनंद लेते हुए स्थानीय होटलों, रेस्टोरेंट, दुकानों और परिवहन व्यवसायों को बढ़ावा देते थे।

लेकिन शुक्रवार सुबह से सामने आए इस नए हालात ने न केवल पर्यटन व्यवसायियों बल्कि स्थानीय आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बना दिया है।

ठोरी में नेपाल सरकार का अमृत छोटी भन्सार कार्यालय की इमारत आज भी मौजूद है, लेकिन इसकी सेवाएं बंद हैं। कार्यालय भौतिक रूप से मौजूद है, लेकिन सेवा संचालन न होने के कारण राज्य की उपस्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले वर्ष से भन्सार कार्यालय बंद होने के कारण भारतीय वाहनों के वैध प्रवेश की व्यवस्था ठप्प हो गई है, जिससे सीमा क्षेत्र में असमंजस का माहौल बन गया है। इसका सीधा प्रभाव पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।

भन्सार कार्यालय ठोरी में संचालित रहता तो भारतीय पर्यटक आसानी से राजस्व देकर नेपाल में प्रवेश कर पाते, ऐसा उनका कहना है। ‘सरकार को राजस्व भी मिलता और पर्यटकों को लौटना नहीं पड़ता,’ ठोरी के स्थानीय निवासियों ने कहा, ‘लेकिन अब राज्य की उपेक्षा के कारण न तो सरकार को राजस्व मिला है, न स्थानीय लोगों ने पर्यटक देखे हैं और न ही पर्यटकों को नेपाल भ्रमण का अवसर मिला है।’

भन्सार कार्यालय बंद होने के बाद स्थानीय सरकार, राजनीतिक दल, उद्योगी-व्यवसायी, पर्यटन कर्मी और नागरिक समाज ने कई बार संबंधित विभागों का ध्यान आकृष्ट कराया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न मंचों से भन्सार पुनः संचालन की मांग उठाई, लेकिन निर्णय लागू न होने के कारण स्थानीय लोगों में निराशा बढ़ रही है।

भारतीय पर्यटक आगमन में कमी के कारण होटल व्यवसाय, रेस्टोरेंट, खुदरा व्यापार, स्थानीय परिवहन, कृषि उत्पाद की बिक्री और दैनिक मजदूरी से जुड़े व्यवसाय प्रभावित होने लगे हैं, ऐसा व्यवसायियों ने बताया है।