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थलाराले पशु कल्याण संबंधी ऐन जारी किया

काठमांडू। नेपाल में पशु कल्याण को व्यवस्थित करने वाला कोई विशेष राष्ट्रीय कानून अभी तक नहीं बना है। पशु स्वास्थ्य, पशु सेवा और पशुजन्य उत्पादों से संबंधित विभिन्न कानून मौजूद होने के बावजूद पशुपक्षियों पर होने वाले क्रूर व्यवहार को रोकने के लिए कोई अलग कानूनी प्रावधान नहीं है। इसी कमी को दूर करने के प्रयास के तहत बझांग की थलारा गाउँपालिका ने ‘पशुपक्षी व्यवस्थापन तथा कल्याण ऐन, २०८३’ जारी किया है। इस २२ पृष्ठ लंबी इस कानून में पशुपक्षियों के संरक्षण, पंजीकरण, स्वास्थ्य, आश्रय, परिवहन, श्रम उपयोग, संक्रामक रोग नियंत्रण, पशुओं पर होने वाले क्रूर व्यवहार की रोकथाम से लेकर बेवारिसे और घायल पशुओं के प्रबंधन तक के विषय शामिल हैं।

पशु कल्याण को केवल नैतिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय सरकार की जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का प्रयास इस ऐन में किया गया है। पांच स्वतंत्रताओं को कानूनी मान्यता देते हुए इस कानून ने पशुपक्षियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘फाइव फ्रिडम्स’ अर्थात पांच आधारभूत स्वतंत्रताओं को कानूनी रूप से शामिल किया है। इसके तहत पशुओं को भूख और प्यास से मुक्त होना, भय और पीड़ा से मुक्त रहना, शारीरिक असुविधा से मुक्त होना, रोग और चोट से सुरक्षित रहना तथा अपनी प्राकृतिक प्रवृत्तियों का पालन करने का अधिकार प्राप्त होगा।

प्रत्येक पशु का अभिलेख रखने की व्यवस्था के तहत इस ऐन ने पालतू पशुओं का निःशुल्क पंजीकरण करने का प्रावधान किया है। पंजीकृत पशुओं की प्रजाति, आयु, लिंग सहित अन्य विवरण स्थानीय वाई कार्यालय द्वारा संजोया जाएगा। बेवारिसे पशु तथा सार्वजनिक स्थानों में रह रहे बंदरों की भी गणना एवं अभिलेखीकरण का प्रावधान किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर सटीक आंकड़ों के आधार पर योजनाएं बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

पशुओं पर होने वाले क्रूर व्यवहार को प्रतिबंधित करते हुए इस ऐन ने पशुओं को पीटना, धारदार या विद्युत उपकरणों से यातना देना जैसे कृत्यों को निर्दयी व्यवहार माना है। इसके साथ ही किसी भी जीव को जीवित अवस्था में उबालकर या पकाकर खाने पर भी स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है।