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नेपाल-भारत उद्योग वाणिज्य संघ ने मौद्रिक नीति का स्वागत किया

२४ असार, काठमांडू। नेपाल-भारत उद्योग वाणिज्य संघ ने नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा जारी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की मौद्रिक नीति का स्वागत किया है।

संघ का मानना है कि यह नीति मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए उच्च आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने में मदद करेगी। मौद्रिक नीति को सतर्कतापूर्वक लचीला बताया गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच, नेपाल की अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार की दिशा में बढ़ रही है। इस बीच, जारी मौद्रिक नीति और नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा प्रकाशित मैक्रोइकोनॉमिक रिपोर्ट ने नेपाल के बाह्य क्षेत्र, बैंकिंग प्रणाली की तरलता, विदेशी विनिमय भंडार और निवेश वातावरण में महत्वपूर्ण सुधार की पुष्टि की है, ऐसा संघ का मानना है।

इसने आने वाले आर्थिक वर्ष में आर्थिक गतिविधि के विस्तार के लिए अनुकूल आधार तैयार होने का निष्कर्ष संघ ने निकाला है।

संघ ने मुद्रास्फीति को लगभग ५.५ प्रतिशत की सीमा में बनाए रखते हुए नेपाल सरकार द्वारा निर्धारित ७ प्रतिशत आर्थिक विकास दर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक मौद्रिक सहजीकरण प्रदान करने के लक्ष्य के साथ नीति एवं दरों को यथावत रखने, बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने, ब्याज दर कॉरिडोर को जारी रखने तथा नेपाली रुपये और भारतीय रुपये के बीच स्थिर विनिमय व्यवस्था बनाए रखने के निर्णय को निजी क्षेत्र के मनोबल में वृद्धि और निवेश-अनुकूल माहौल के निर्माण में सहायक मानते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता सुदृढ़ करने, बैंकिंग नियमन को और सरल बनाने, डिजिटल वित्तीय सेवाओं को बढ़ावा देने, व्यक्तिगत क्रेडिट स्कोरिंग प्रणाली का विकास करने, निष्क्रिय ऋण प्रबंधन में सुधार करने तथा विदेशी विनिमय प्रबंधन को अधिक सहज बनाने जैसी मौद्रिक नीति पहलों को भी संघ ने सकारात्मक रूप से लिया है।

हालांकि, संघ के अनुसार मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों ने कुछ संरचनात्मक चुनौतियों को समाधान करने का अवसर भी प्रदान किया है।

बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता, ऐतिहासिक रूप से कम ब्याज दर और ऋण प्रवाह की पर्याप्त क्षमता होने के बावजूद निजी क्षेत्र में ऋण विस्तार अपेक्षित स्तर पर नहीं है। यह स्थिति यह संकेत देती है कि अब चुनौती वित्तीय संसाधनों की कमी या ब्याज दरों में नहीं, बल्कि निवेशकों के आत्मविश्वास, नीति स्थिरता, परियोजना कार्यान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता और समग्र निवेश वातावरण में है, ऐसा संघ का मानना है।

इसी संदर्भ में आर्थिक वृद्धि के लक्ष्यों को पाने के लिए केवल मौद्रिक नीति पर्याप्त नहीं होगी, इसे प्रभावी वित्तीय नीति, तीव्र पूंजीगत व्यय, नीति स्थिरता और निजी क्षेत्र-अनुकूल संरचनात्मक सुधारों के साथ समन्वयित कर लागू करना आवश्यक है, ऐसा संघ का विचार है।