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नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने मौद्रिक नीति को सकारात्मक अभिव्यक्ति दी

२४ आषाढ़, काठमांडू। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा मंगलवार को जारी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की मौद्रिक नीति को सकारात्मक और संतुलित बताते हुए कहा है कि यह निजी क्षेत्र के मनोबल को बढ़ावा देगा। देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ रही है, ऐसे समय मौद्रिक नीति ने मूल्य स्थिरता, वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और उच्च आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है, यह महासंघ की मान्यता है। सरकार द्वारा निर्धारित ७ प्रतिशत आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करने में निजी क्षेत्र की निर्णायक भूमिका को मौद्रिक नीति ने स्वीकार किया है, जिस पर महासंघ ने स्वागत जताया है।

निजी क्षेत्र में निवेश विस्तार, उत्पादन वृद्धि, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने के लिए मौद्रिक नीति ने लचीली और उपयुक्त कार्यदिशा अपनाई है, यह बात महासंघ के अध्यक्ष अंजन श्रेष्ठ ने कही। ‘‘महासंघ ने लंबे समय से जिन विभिन्न मुद्दों को उठाया है उन्हें मौद्रिक नीति में शामिल करने का प्रयास किया गया है,’’ अध्यक्ष श्रेष्ठ ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर उत्पन्न होने वाले असिमित दायित्वों को हटाने की व्यवस्था, अस्वस्थ उद्योगों में पड़े निष्क्रिय ऋणों का प्रबंधन और दबाव में पड़े ऋणों के पुनरुद्धार के उपाय सकारात्मक हैं।’’

अतिरिक्त रूप से, संस्थागत क्षमता के आधार पर शेयर धरोहर ऋण की सीमा निर्धारित करना तथा सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाले बड़े इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऋण-धरोहर अनुपात को और सरल बनाने की व्यवस्था को भी सकारात्मक माना गया है। हालांकि, महासंघ ने छोटे, मध्यम, बड़े उद्योग व्यवसायों और विभिन्न क्षेत्रीय ऋणों के पुनर्गठन और पुनर्गठन को आने वाले निर्देशों में स्पष्ट रूप से शामिल किए जाने पर जोर दिया है। नीति दर, स्थायी निक्षेप दर, बैंक दर, नकद मौज़ूदगी अनुपात, वैधानिक तरलता अनुपात और स्थायी तरलता सुविधा को यथावत रखने के निर्णय से नीति स्थिरता बनी रहेगी, यह महासंघ का मानना है।

इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और व्यावसायिक माहौल और अधिक पूर्वानुमान योग्य बनेगा, महासंघ का विश्वास है। इसी तरह बैंक और वित्तीय संस्थानों के डिजिटलकरण, वित्तीय लागत में कमी, सेवा गुणवत्ता में सुधार और नियामक व्यवस्था को सरल, स्पष्ट व प्रभावकारी बनाने की नीति को भी महासंघ ने सराहा है। बैंक और वित्तीय संस्थानों के निर्देशों को सरलीकृत करना और विदेशी विनिमय संबंधी व्यवस्था को सहज बनाना व्यापार, निवेश तथा विदेशी कारोबार में सुविधा प्रदान करेगा, यह धारणा व्यक्त की गई है।

फिर भी, मौद्रिक नीति की सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, यह अध्यक्ष श्रेष्ठ ने स्पष्ट किया। ‘‘११ प्रतिशत ऋण प्रवाह के लक्ष्य को पूरा करने और बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध पर्याप्त तरलता का सदुपयोग करने के लिए उद्योग, कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, निर्यात केंद्रित उद्योग और छोटे तथा मध्यम उद्यमों तक सहज और सुलभ ऋण प्रवाह होना आवश्यक होगा,’’ उन्होंने कहा, ‘‘असली उत्पादनशील क्षेत्रों में ऋण का विस्तार न होने तक आर्थिक पुनरुद्धार में गतिशीलता नहीं लाई जा सकती।’’

महासंघ ने मौद्रिक नीति के साथ ही सरकार द्वारा जारी आर्थिक सुधार कार्यक्रम, निवेश-मित्र कानूनी सुधार, पूंजीगत खर्च का प्रभावी क्रियान्वयन और परियोजनाओं की गति को समानांतर रूप से बढ़ाने पर भी बल दिया है। मौद्रिक और वित्तीय नीतियों के बीच प्रभावी समन्वय से ही अपेक्षित आर्थिक रूपांतरण संभव होगा, यह महासंघ का मानना है। निजी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि, निवेश विस्तार और सतत आर्थिक विकास के लिए राष्ट्र बैंक और सरकार के साथ निरंतर सहयोग एवं रचनात्मक साझेदारी करने के लिए महासंघ प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संवाद और नीति स्थिरता से अर्थव्यवस्था में गति आएगी, यह धारणा भी व्यक्त की गई है।

इसी बीच, महासंघ ने ऋण श्रेणीकरण और ऋण नुकसान प्रबंधन को लचीला बनाने की निजी क्षेत्र की मांग को गंभीरता से लेने, वॉच लिस्ट और ब्लैक लिस्टिंग संबंधी व्यवस्थाओं को वर्तमान परिस्थिति में दो वर्षों के लिए लचीला और सहज बनाने तथा वित्तीय क्षेत्र सुधार २.० को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। निजी क्षेत्र ने बैंकिंग क्षेत्र का पुनःपूंजीकरण, निष्क्रिय संपत्ति प्रबंधन, जोखिम साझाकरण तंत्र के विस्तार और उत्पादक क्षेत्रों को लक्षित वित्तीय उपकरणों के विकास को समाहित करने वाले दूसरे चरण के वित्तीय सुधार कार्यक्रम के क्रियान्वयन को अत्यंत आवश्यक बताया है।