नेपाल में उड़ान देरी पर यात्रियों को मुआवजा दिलाने वाली प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था क्या है?

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सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत नया कानून पारित होने पर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तरह आंतरिक उड़ानों में भी यात्रियों को विमान सेवा से मुआवजा मिल सकेगा।
वायु यात्री बीमा राशि बढ़ाने और उड़ान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति देने से संबंधित प्रावधानों वाला विधेयक राष्ट्रीय सभा में पंजीकृत किया गया है।
विधेयक के अनुसार, आंतरिक विमान हादसे में यात्री की मृत्यु होने पर विमान सेवा कंपनी को एकमुश्त एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग डेढ़ करोड़ नेपाली रूपये) मुआवजा यात्रियों के परिवार को देना होगा। वर्तमान में मुआवजा केवल 20 हजार डॉलर निर्धारित है।
प्रस्तावित क़ानून में विमान दुर्घटना से प्रभावित यात्रियों के अलावा विमान के बाहर खड़े तृतीय पक्षों को भी बीमा में शामिल करना अनिवार्य होगा। हालांकि जहाज के अंदर गुपचुप यात्रा करने वाले यात्रियों को यह बीमा नियम लागू नहीं होगा, यह स्पष्ट किया गया है।
किस स्थिति में दी जाएगी क्षतिपूर्ति?
संसद में पेश किए गए कानून के अनुसार नेपाल में पहली बार विमान सेवा की वजह से उड़ान में देरी या यात्रियों को चोट लगने या सामान को नुकसान होने के मामले में विमान सेवा को क्षतिपूर्ति देनी होगी।
संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रवक्ता जयनारायण आचार्य ने बताया कि यह कानून विमान संचालकों और सरकारी संस्थाओं को यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जवाबदेह बनाएगा।
“यदि किसी कारण से उड़ान में देरी हो तो यात्रियों को पूर्व में सूचित करना आवश्यक होगा। ऐसा न करने पर देरी और प्रबंध के आधार पर मुआवजा देना होगा,” आचार्य ने कहा।
विधेयक में विमान सेवा द्वारा उड़ान रद्द, स्थगित या विलंबित होने पर कम से कम तीन घंटे पहले यात्रियों को सूचित करना और उड़ान न हो पाने पर मुआवजा देना अनिवार्य करने का प्रावधान है।
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हालांकि विमान सेवा संचालक संघ के उपाध्यक्ष सुवास सापकोटा का कहना है कि नेपाल में अधिकांश उड़ानें मौसम और एयर ट्रैफिक के कारण प्रभावित होती हैं, न कि केवल विमान सेवा के कारण।
विधेयक में विमान सेवा के जिम्मे यात्रियों के सामान (बैग या कार्गो) खो जाने, नष्ट होने या क्षतिग्रस्त होने पर मुआवजा देने का भी प्रावधान शामिल है।
यह विधेयक नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के महानिदेशक को अपराध के स्तर के अनुसार 10 हजार से 1 लाख रूपये तक जुर्माना लगाने का अधिकार भी देता है।
अगर मुआवजा न दिया जाए या बीमा न कराया जाए तो विमान सेवा कंपनी पर 10 लाख से 25 लाख रूपये तक का जुर्माना लग सकता है, यह भी विधेयक में शामिल है।
बीमा दायरा बढ़ने पर हवाई किराया बढ़ने की संभावना?
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यति एयरलाइंस के सीईओ समेत रह चुके सापकोटा ने कहा कि विमान संचालकों को सरकार के द्वारा तैयार किए गए इस कानून के प्रस्तावों का समर्थन है।
उनके अनुसार बीमा राशि और अतिरिक्त जिम्मेदारी से विमान की हर सीट का बीमा खर्च लगभग 500 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है।
“70 सीट वाले एक विमान का वार्षिक बीमा खर्च 35 हजार डॉलर तक बढ़ सकता है,” उन्होंने कहा। यह नए नियम से एक विमान की वार्षिक लागत लगभग 52 लाख नेपाली रुपए तक बढ़ सकती है।
इस खर्च को हर यात्री पर बांटने पर विमान सेवा का प्रति यात्री खर्च लगभग 40 से 50 रुपए तक बढ़ सकता है।
“थोड़ा बढ़ेगा और यह सीधे खर्च से अधिक अप्रत्यक्ष खर्च बढ़ाएगा,” वे कहते हैं।
विमान संचालकों ने कहा है कि विमान सेवा संचालन में बढ़े खर्च के अनुसार हवाई किराया कितना बढ़ेगा यह स्पष्ट नहीं है।
नेपाल में वर्तमान में अधिकांश एयरलाइन टिकट खरीदने पर केवल टिकट का कर ही स्पष्ट होता है। लेकिन इस कानून के लागू होने के बाद विमान सेवा को किराया, हवाईअड्डा सेवा शुल्क और अन्य सरकारी कर साफ-साफ प्रकाशित करने पड़ेंगे।
किस स्थिति में क्षतिपूर्ति नहीं मिलेगी?
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विधेयक में देरी के मामले में मुआवजा न देने के तीन मुख्य कारण बताए गए हैं।
पहला: खराब मौसम, प्राकृतिक आपदा। दूसरा: हवाईअड्डा या एयर ट्रैफिक सेवा का कारण। तीसरा: सुरक्षा कारणों से उड़ान अनुमति देने वाले या सुरक्षा निकाय द्वारा उड़ान रोकना। ऐसे मामलों में विमान सेवा को देरी का मुआवजा नहीं देना होगा।
जांच किसने करनी है कि उड़ान में देरी किस वजह से हुई, मंत्रालय के प्रवक्ता आचार्य ने कहा: “नियमक निकाय यानी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और उसके महानिदेशक के पास शिकायत सुनने और जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। यदि समाधान न निकला तो मंत्रालय आगे बढ़ेगा।”
यदि यात्री की लापरवाही से चोट लगती है या अंग खराब हो जाता है तो भी विमान सेवा मुआवजा देने की बाध्य नहीं होगी।
साथ ही, पुरानी गंभीर बीमारी के कारण यात्री का अंग खराब होना या मृत्यु होने पर भी मुआवजा नहीं मिलेगा।
पहले की मुआवजा प्रथा कैसी थी?
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विमान सेवा संचालक संघ के उपाध्यक्ष सुवास सापकोटा के अनुसार पहले जब यात्रियों के सामान को नुकसान होता था तो विमान सेवा सहमति से मुआवजा देती थी, लेकिन कानूनी आधार नहीं था।
देरी के कारण मुआवजा देने का कानून पहली बार इसी विधेयक में प्रस्तावित किया गया है। सामान देने का अधिकतम समय तीन दिन का तय किया गया है, यदि सामान नहीं दिया गया तो देरी माना जाएगा, यह नियम भी विधेयक में है।
निर्धारित अवधि समाप्ति के बाद 15 दिन तक भी सामान नहीं मिलने पर उसे खोया हुआ मानकर प्रेषक या प्राप्तकर्ता को मुआवजा देना होगा।
कब लागू होगा?
राष्ट्रीय सभा में दर्ता किया गया विधेयक फिलहाल एक प्रस्तावित कानून है।
सरकार के इस विधेयक को संघीय संसद के दोनों सदनों – राष्ट्रीय सभा और प्रतिनिधि सभा से पारित होना होगा।
संसद से पारित होने के बाद सभामुख द्वारा इसकी पुष्टि कर राष्ट्रपति को अंतिम अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
लेकिन कानून आमतौर पर संसद से पारित होने के बाद ही राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणित होने पर प्रभावी होता है।
विधेयक ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति के प्रमाणित करने के 31वें दिन से यह कानून लागू होगा।
त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आंकड़ों के अनुसार नेपाल में मासिक लगभग डेढ़ लाख लोग आंतरिक हवाई यात्रा करते हैं।
यह कानून हवाई यात्रियों के अधिकारों और उनके सामान की सुरक्षा को और मजबूत करेगा, ऐसा विश्वास किया जा रहा है।
मंत्रालय के प्रवक्ता आचार्य कहते हैं, “यह यात्रियों के अधिकारों को सुनिश्चित करेगा और हमारी हवाई सेवा की गुणवत्ता और सुरक्षा को बढ़ाएगा।”
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