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फिर से शिक्षक आंदोलन की धमकी क्यों? सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?

शिक्षा विधेयक पारित करने की मांग के साथ 2 अप्रैल 2025 को काठमांडू की सड़कों पर प्रदर्शन करते शिक्षक

तस्वीर स्रोत, NurPhoto via Getty Images

प्राचीन ग्रीक कथा में राजा सिसिफस पहाड़ के ऊपर एक बड़ा पत्थर धकेलने की कोशिश करते थे, लेकिन हर बार वह पत्थर ऊपर पहुँचते ही नीचे गिर जाता था और उन्हें फिर से मेहनत करनी पड़ती थी।

आज शिक्षक आंदोलन की बहस के साथ-साथ विद्यालय शिक्षा विधेयक भी इसी तरह दोहराव वाली स्थिति झेल रहा है।

पिछली बार कई बार विधेयक पास कराने के लिए हुए आंदोलन और समझौतों को लेकर शिक्षक असंतुष्ट हैं कि अब फिर सब कुछ शून्य की ओर जा रहा है।

शिक्षा विधेयक की कहानी

पिछले शिक्षक आंदोलन का एक दृश्य

तीन साल पहले 2080 भाद्र 27 को संसद में दायर विद्यालय शिक्षा विधेयक पारित कराने के लिए शिक्षक लगातार आंदोलन करते रहे। संविधान 2072 साल में लागू हुआ था, लेकिन इसके अनुसार शिक्षा विधेयक लाने में आठ साल लग गए।

देशभर से हजारों शिक्षक राजधानी काठमांडू की सड़कों पर कई हफ्ते दबाव डालने के बाद सरकार ने शिक्षक महासंघ के साथ 2082 वैशाख 17 को नौबिंदु समझौता किया था। उसी वर्ष असार 15 तक विधेयक पारित करने का वादा भी किया गया था।