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सऊदी अरब पर हमला करने वाले हूथी विद्रोही कौन हैं?

समाचार सारांश

  • यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूथी विद्रोहियों के बीच संघर्ष फिर से तेज हो गया है, जिससे लगभग 2 करोड़ 23 लाख लोग मानवीय सहायता के लिए आसरे पर हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2026 की शुरुआत से कम से कम 1 लाख 25 हजार लोग नए विस्थापित हुए हैं और 6 अगस्त से 14 सितंबर के बीच 2,883 लोग मारे गए या घायल हुए हैं।
  • 19 सितंबर को हूथियों द्वारा रियाद और सऊदी के तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने के दावे के बाद सऊदी–हूथी युद्धविराम कमजोर हुआ है।

यमन में वर्षों से चला आ रहा सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन और हूथी विद्रोहियों के बीच संघर्ष फिर से भयावह स्तर पर पहुंच गया है। सितंबर 2026 के मध्य तक यह द्वंद्व पहले से कहीं अधिक व्यापक रूप ले चुका है।

कुछ वर्षों की शांति के बाद सऊदी अरब और हूथी के बीच मोर्चा फिर से मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमले और समुद्री नाकाबंदी के कारण तनावपूर्ण हो गया है।

इस लगातार जारी संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है, जो चरम खाद्य असुरक्षा, विस्थापन, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, बेरोजगारी और जर्जर पूर्वाधार की समस्याओं से जूझ रही है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में यमन के लगभग 2 करोड़ 23 लाख लोग मानवीय सहायता और सुरक्षा सुविधाओं की जरूरत में हैं, जिनमें 52 लाख आंतरिक विस्थापित हैं।

साल 2026 की शुरुआत से कम से कम 1 लाख 25 हजार लोग नए विस्थापित हुए हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 6 अगस्त से 14 सितंबर के बीच कम से कम 2,883 लोगों के हताहत या घायल होने की सूचना दी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने भी सितंबर के महीने में 93,864 नए विस्थापित होने की बात कही है। खाद्य असुरक्षा का सामना लगभग 1 करोड़ 83 लाख लोग कर रहे हैं।

हूथी विद्रोहियों ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में प्रशासन चलाने का दावा किया है, लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन, पत्रकारों और आलोचकों पर कार्रवाई के आरोपों का सामना भी कर रहे हैं।

इसी बीच, हूथियों के खिलाफ सैन्य अभियान से भी नागरिकों की हताहतियाँ, अवसंरचना के नुकसान और विस्थापन में वृद्धि हुई है। नई कार्रवाइयों ने हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है और संघर्ष ने सामान्य जनजीवन और भी कमजोर बना दिया है।

हूथी आंदोलन का उदय और प्रारंभिक समय

हूथी आंदोलन, जिसे आधिकारिक रूप से ‘अंसार अल्लाह’ कहा जाता है, उत्तरी साड़ा प्रांत में जायदिया शिया समुदाय से उत्पन्न हुआ है।

1980 के दशक में उत्तर-पश्चिम यमन में स्थापित यह आंदोलन भ्रष्टाचार और बाहरी प्रभाव के खिलाफ विरोध स्वरूप उभरा था। जायदिया शियाएँ यमन की लगभग एक-तिहाई आबादी है और पहले इमामत शासन चलाते थे। लेकिन 1962 में राजतंत्र समाप्त होने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव घट गया था।

1980 और 1990 के दशकों में धार्मिक और सामाजिक आंदोलनों की बढ़ती लहर के बीच बीलीविंग यूथ मूवमेंट का विकास हुआ, जिसका नाम इसके संस्थापक हुसैन बदरुद्दीन अल-हूथी के परिवार से लिया गया था।

हुसैन अल-हूथी ने अमेरिकी और इज़राइली नीतियों की आलोचना करते हुए 2004 में विद्रोह शुरू किया। हुसैन की मृत्यु के बाद भी आंदोलन जारी रहा और साढ़ा युद्ध के नाम से जानी जाने वाली छह लड़ाइयाँ लड़ीं।

इस अवधि में उन्होंने अपने संगठन को मजबूत किया और स्थानीय भूगोल तथा धार्मिक-राजनीतिक नेटवर्क का उपयोग करके विस्तार किया।

2011 की अरब क्रांति और सानाः पतन की शुरुआत

2011 में यमन में भी अरब दुनिया में फैल रही क्रांति आई। राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ और अंततः उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी। उपराष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी औपचारिक संक्रमणकालीन राष्ट्रपति बने। इस बीच, हूथी आंदोलन ‘अंसार अल्लाह’ के नाम से लोकप्रिय हो गया।

लेकिन सत्ता परिवर्तन से समस्याएँ सुलझीं नहीं, देश आर्थिक संकट, सेना का विखंडन, दक्षिण में पृथकतावाद, अलकायदा की सक्रियता, और कमजोर प्रशासन की चुनौतियों से घिर गया। इसी बीच हूथियों ने अपना प्रभाव फैला लिया।

2014 में संविधान विवाद के बीच हूथियों ने सानाअ पर कब्ज़ा किया और यमन के राजनीतिक एवं सैन्य संकट ने उन्हें राजधानी और अन्य क्षेत्रों में कब्जे में मदद की।

हूथी की सफलता में पूर्व राष्ट्रपति सालेह के साथ अस्थायी गठबंधन ने अहम भूमिका निभाई, जिसने उन्हें पुराने सैन्य ढांचे और हथियारों तक पहुंच दिलाई।

जनवरी 2015 में राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर तत्कालीन राष्ट्रपति हादी को देश छोड़ने पर मजबूर किया गया। लेकिन 2017 में सालेह–हूथी मतभेद के बाद सालेह की हत्या हो गई और हूथियों का नियंत्रण मजबूत हुआ। आज उनका नियंत्रण यमन के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्रों पर है।

सऊदी हस्तक्षेप और हथियारों का स्रोत

सानाअ पर कब्जा के बाद यमन का संकट सऊदी अरब के लिए सीमा पार राजनीतिक समस्या नहीं रह गया। सऊदी ने इसे ईरान के प्रभाव विस्तार के रूप में देखा और 2015 में अमेरिकी समर्थन से हूथियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन शुरू किया।

हूथियों ने सरकारी सैनिकों के हथियार, कब्जा किए गए गोदाम और ईरान की मदद से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाई। ईरान के साथ उनका संबंध 1990 के दशक से शुरू हुआ था और 2009 से यह सहयोग तेज हुआ।

ईरान ने हूथियों को गुप्त सूचना, हथियार, रसद, कूटनीतिक समर्थन, प्रशिक्षण और ईंधन दिया है। ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और हिज़्बुल्लाह से प्रशिक्षक और सलाहकार भी भेजे हैं। इन सलाहकारों ने मिसाइल और ड्रोन सिस्टम यमन तक पहुंचाने के लिए जटिल तस्करी नेटवर्क विकसित किया है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, हूथियों की सैन्य क्षमता में विदेशी सहायता महत्वपूर्ण है, और अमेरिकी प्रतिबंध रिपोर्टों ने उनके वैश्विक खरीद नेटवर्क की भी पुष्टि की है।

हालांकि हूथी समर्थक दावा करते हैं कि वे मात्र ईरानी कठपुतली नहीं हैं। उनकी ताकत स्थानीय सैन्य क्षमता, ईरानी सहयोग, अंतरराष्ट्रीय खरीद नेटवर्क और संगठनात्मक कौशल का परिणाम है।

आठ साल का युद्ध और 2022 का युद्धविराम

2015 के बाद यह युद्ध जारी रहा। सऊदी के पास उच्च तकनीकी विमान और हवाई सुरक्षा थी, जबकि हूथी सस्ते ड्रोन, मिसाइलों और स्थानीय भू-राजनीतिक रणनीतियों का उपयोग करते रहे।

इसने यमन के अवसंरचनाओं पर बड़ा प्रहार किया और 2018 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से स्टॉकहोम समझौता हुआ।

लेकिन 2019 और 2020 में हूथियों ने सऊदी तेल उद्योग पर हमले कर अपनी ताकत दिखाई।

अंततः 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ, लेकिन स्थायी शांति स्थापित नहीं हो पाई। हूथी सऊदी की नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहे थे।

यमन का राजनीतिक विभाजन जारी रहने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय दल अपनी ताकत बनाए हुए हैं।

गाजा युद्ध में हूथियों की भूमिका

अक्टूबर 2023 में इज़राइल–हमास युद्ध शुरू होने के बाद हूथी क्षेत्रीय ‘प्रतिरोध के केंद्र’ के रूप में खुद को स्थापित करने लगे। उन्होंने इज़राइल की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए और लाल सागर में जहाजों पर हमला किया।

इस कार्रवाई को गाजा और फिलिस्तीनी जनता के प्रति समर्थन के रूप में बताया गया। 2025 में अमेरिका के साथ युद्धविराम ने कुछ समय के लिए हमलों को रोका, लेकिन स्थायी शांति नहीं आई।

باب المندب जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। हूथी हमलों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को मार्ग बदलना पड़ा है। अमेरिका और ब्रिटेन ने हूथी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।

इस घटना ने हूथियों को घरेलू राजनीतिक ताकत से क्षेत्रीय सैन्य खिलाड़ी बना दिया है।

फरवरी 2026 में अमेरिका–इज़राइल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध ने वर्तमान संघर्ष को प्रभावित किया और ईरान ने अपने सहयोगी हूथियों को और सक्रिय किया।

जुलाई 2026 में हूथियों ने सऊदी के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की और लाल सागर में हमले बढ़ा दिए, जिससे 2022 का युद्धविराम खत्म हो गया।

यह विवाद तहरान से सानाअ तक उड़ान भरने वाले विमान से जुड़ा था। हूथियों द्वारा सऊदी नाकाबंदी को चुनौती देने पर गठबंधन ने हवाई हमले किए और संघर्ष अधिक कड़क हुआ।

8 सितंबर को हूथियों ने सऊदी दक्षिणी क्षेत्रों में बड़ा हमला शुरू किया। गठबंधन के प्रवक्ता के अनुसार नागरिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में नुकसान हुआ और 37 से अधिक घायल हैं।

हूथियों ने तेल प्रतिष्ठान और हवाई सेना पर भी हमले किए। उनके सैन्य प्रवक्ता ने इसे सऊदी हमलों का कड़ा जवाब बताया।

इसके पहले भी हूथियों पर जेल में बच्चों समेत सात लोगों की हत्या का आरोप लगा है। इन संघर्षों ने कम से कम 1 लाख 25 हजार लोगों को विस्थापित कर दिया है।

नागरिक हताहत और मक्का–रियाद की कमजोर सुरक्षा

सितंबर के मध्य तक तेज संघर्ष में कम से कम 14 नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। सऊदी जमीन पर पहली मौत तब हुई जब ताइफ प्रांत में हूथी ड्रोन को रोका गया।

हूथियों के अनुसार सऊदी लड़ाकू विमान ने ताइफ के दूरसंचार टावर पर हमला किया, जिसमें एक नागरिक की मौत हुई और एक घायल हुआ।

हूथी नेता अब्देल-मलिक अल-हूथी ने दावा किया कि उनकी सेना केवल रक्षात्मक कार्रवाई कर रही है। वहीं सऊदी-समर्थित राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख ने कहा कि हूथी कई मोर्चों पर व्यापक नुकसान पहुंचा रहे हैं।

15 सितंबर को सऊदी गठबंधन ने खमीस मसैत, अब्हा और ताइफ पर कड़ा जवाब देने का संकल्प जताया, जहाँ 13 नागरिक घायल हुए और संरचनात्मक नुकसान हुआ।

हूथियों ने 15 सितंबर को 24 घंटे में 54 हवाई हमले करने का दावा किया और 18 सितंबर तक उनके नुकसान में इजाफा बताया।

सऊदी ने मक्का की ओर ड्रोन भेजने के प्रयास को रोकने की बात कही थी, लेकिन हूथियों ने इसे अस्वीकार किया।

19 सितंबर को हूथियों ने रियाद और तेल प्रतिष्ठानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। गठबंधन के अनुसार, उनकी हवाई सुरक्षा प्रणाली ने इन हमलों को सफलतापूर्वक रोका।

रियाद सहित कई जगहों पर विस्फोट और धुआं देखा गया। हूथी सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि रियाद के संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाया गया।

तेल अवसंरचना और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

इस संघर्ष ने सऊदी तेल की खपत को प्रभावित किया है। पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हुए हमलों ने संकट को और जटिल बना दिया है।

ईरान ने होर्मुज जलमार्ग पर प्रतिबंध लगाकर सऊदी को लाल सागर निर्यात पर अधिक निर्भर होने पर मजबूर किया है। मार्च से जुलाई तक सऊदी की कच्चे तेल की निर्यात आठ गुना बढ़ी है।

लगभग 30 टैंकर यानबू के पास हूथी हमले के दायरे में हैं। हूथी पश्चिमी तट से बाब अल-मंदब और दक्षिणी द्वीपों पर कब्जा किए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यह क्षेत्र तीव्र अस्थिरता का सामना कर रहा है।

यमन में अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला के जिहादी, दक्षिण यमन के पृथकतावादी और अन्य स्थानीय समूह भी हूथियों के विरोधी हैं। यह संघर्ष अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं को भी जटिल बनाता है।

ईरान की नीति है कि वह सऊदी के साथ पूर्ण युद्ध नहीं चाहता लेकिन हूथियों पर दबाव बढ़ाना चाहता है। सऊदी-ईरान के बीच चीन की मध्यस्थता से तेहरान संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

चीन और पाकिस्तान ने ईरान के साथ संबंधों का इस्तेमाल करते हुए हूथियों को नियंत्रित करने का आग्रह किया है। तुर्की ने सऊदी की सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते में सहयोग करने की तैयारी दिखाई है।

अगस्त में मक्का में सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के बीच एक संयुक्त रक्षा समझौता हुआ था, जिसे कुछ लोग ‘सुन्नी नाटो’ कहते हैं। लेकिन संसदीय मंजूरी में देरी के कारण इसका क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।