
समाचार सारांश
समीक्षा पश्चात् तैयार किया गया।
- कॅम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेसन आर्डे ने अपने शैक्षिक योग्यता और थीसिस पर उठाए गए सवालों के बाद इस्तीफा दिया है।
- विश्वविद्यालय ने आर्डे की शैक्षिक योग्यता और मानद नियुक्ति से जुड़ी नई जानकारी मिलने पर जांच शुरू की है।
- आर्डे ने अपने काम में कुछ त्रुटियां स्वीकार की हैं, लेकिन उन पर जातीय प्रेरित और संगठनबद्ध अभियान का आरोप लगाया है।
२१ साउन, काठमांडू। प्लेगरिज्म विवाद के केंद्र में आए कॅम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर जेसन आर्डे के विषय में नई जानकारी सार्वजनिक करते हुए इस मामले में जांच शुरू करने की घोषणा की। आर्डे की शैक्षिक योग्यता और मानद नियुक्ति से जुड़ी ‘नई बातें’ सामने आने के बाद जांच शुरू की गई है।
आर्डे को साल 2023 में विश्वविद्यालय के सबसे युवा काले प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने काम में कुछ त्रुटियां स्वीकार की हैं, लेकिन उन पर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे अत्यधिक सार्वजनिक समीक्षा और व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ा।’
उनकी कुछ उपलब्धियों को मीडिया ने सवालों के घेरे में रखा था। उन पर उनके पीएचडी थीसिस में प्लेगरिज्म करने के आरोप लगे थे, इसी संदर्भ में उन्होंने ये बयान दिया है।
आर्डे ने कहा, ‘‘यह अध्याय समाप्त करने का सबसे अच्छा तरीका दूर जाना है।’’
गुड एल प्रोजेक्ट द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में आर्डे ने प्रोफेसर पद की प्राप्ति को ‘मेरे जीवन की सबसे बड़ी व्यावसायिक सम्मान’ बताया।
लेकिन उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी व्यक्तिगत मूल्य ज्यादा महत्व रखने लगते हैं।’ इस्तीफे को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया, ‘यह विद्वता का परित्याग या कॅम्ब्रिज पर विश्वास की कमी नहीं है, न ही यह मेरे आसपास बने कथनों की स्वीकृति है।’
आर्डे ने अपने छात्रों और सहकर्मियों का धन्यवाद किया और कहा, ‘अपने खुद के भले के लिए, अपने परिवार के लिए और इस कठिन समय में मेरे साथ खड़े सभी के लिए, यह अध्याय खत्म करने का सबसे उपयुक्त तरीका है दूरी बनाना।’
उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे काम का अंत नहीं है। मुझे ठीक होने के लिए समय चाहिए। जब वह समय आएगा, मैं लौटूंगा।’’
आर्डे पर प्लेगरिज्म का आरोप अमेरिकी शोधकर्ता नेथन कफ़नास ने लगाया था, जो खुद को ‘रेस रियलिस्ट’ कहते हैं। कफनास को कॅम्ब्रिज कॉलेज ने अपनी भूमिका से हटा दिया था।
उनका मानना था कि वास्तविक मेरिटोक्रेसी में काले लोग ‘खेल-कूद और मनोरंजन को छोड़कर लगभग सभी उच्च पदों से गायब हो जाएंगे।’ विरोध के बाद उन्हें हटा दिया गया।
कफनास ने अपने सबस्टैक प्लेटफॉर्म पर आर्डे के काम को प्लेगरिज्म डिटेक्शन सॉफ्टवेयर में डालकर विश्लेषण किया था। उस सॉफ्टवेयर ने ‘‘कई हिस्सों को मामूली संपादन के साथ निकाला गया और कई मामलों में मूल स्रोत से त्रुटिपूर्ण प्रतिलिपि’’ पाया।
शुरू में कॅम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने आर्डे पर लगे आरोपों को ‘‘उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करने के लिए एक खराब अभियान’’ बताया था, लेकिन शनिवार को आर्डे ने द टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कुछ गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार की, पर उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने सीधे झूठ नहीं बोला।
उन्होंने कहा, ‘मैं कॅम्ब्रिज आने के बाद से ही अपने पद से हटाने के लिए अच्छी तरह से सुसंगठित और योजनाबद्ध अभियान का शिकार रहा हूं’ और इसे ‘‘जातीय प्रेरित’’ करार दिया। वे विविधता, समानता और समावेशन नीतियों की आलोचना करने वाले ‘‘लाइटनिंग रॉड’’ बन गए थे।
आर्डे ने जल्दी किए अपने शैक्षिक कार्य में कुछ त्रुटियां ऑटिज़्म के कारण हुई बताई। वे कहते हैं कि सूचना को समझने के लिए वे अनुकरण पर निर्भर थे, जिससे समस्या हुई। उनका तर्क है कि यह सूक्ष्म समीक्षा अन्य विद्वानों के काम में भी त्रुटियां निकाल सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘यहाँ हम अकादमिक मुद्दों की बात कर रहे हैं। मैंने किसी की हत्या नहीं की है। मुझे मजबूर झूठ और कल्पनात्मक तरीके से प्रस्तुत करना अस्वीकार्य है।’’
कफनास ने आर्डे के अन्य दावों पर भी सवाल उठाए थे। आर्डे ने कहा था कि उन्होंने 35 दिनों में 30 मैराथन दौड़े, तीन दिनों में 300 मील दौड़ कर 50 लाख पाउंड से अधिक का दान इकट्ठा किया और छह दिनों में ट्रेडमिल पर 600 मील दौड़ लगाई।
लेकिन आर्डे ने द गार्जियन को बताया कि ये राशि 20 वर्षों में अन्य सहयोगियों की मदद से जुटाई गई है और गैर-प्रकटीकरण समझौते के कारण सहयोगी के नाम नहीं बता सकते।
जब पत्रकारों ने 600 मील दौड़ की चुनौती के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि यह चुनौती 12 दिनों में पूरी हुई, जो प्रशिक्षण के कारण जमा हुई थकान के चलते आराम अवधि थी, और अन्य दौड़ें अभी भी जारी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लोग मुझ पर विश्वास नहीं कर सकते। कोई भी अपने हर काम का रसीद लेकर जीवन नहीं बिताता।’ बुधवार से पहले विश्वविद्यालय ने जांच शुरू की थी। नई जानकारियों के आधार पर इन्होंने आर्डे की शैक्षिक योग्यता और मानद नियुक्ति को लेकर जांच आरंभ की है।
विश्वविद्यालय का कहना है कि उन्हें शैक्षिक दुरुपयोग से जुड़े कई शिकायतें मिली हैं, जिन्हें उनकी जांच नीति के तहत सुलझाया जा रहा है।
विश्वविद्यालय ने कहा कि वे सार्वजनिक टिप्पणियों और चिंताओं से पूरी तरह जागरूक हैं और सभी प्रक्रियाओं को विश्वविद्यालय की नीति और रोजगार कानून के अनुरूप रखना जरूरी समझते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि इस स्थिति के केंद्र में एक व्यक्ति है और हम उन्हें समर्थन प्रदान करते रहेंगे।’’ आर्डे जिजस कॉलेज के फेलो हैं और कॉलेज ने भी विश्वविद्यालय की जांच के साथ अपनी जांच प्रक्रिया शुरू की है।
बुधवार से पहले प्रकाशक साइमन एंड शुस्टर ने आर्डे का समर्थन करते हुए कहा था कि वे इसी माह के अंत में उनकी संस्मरण प्रकाशित करेंगे।
प्रकाशक ने कहा, ‘‘हमें गर्व है कि हम प्रोफेसर जेसन आर्डे का प्रकाशन कर रहे हैं। हमने उनके साथ करीब से काम किया है और उन्होंने पूरे प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान पेशेवर और निष्ठावान व्यवहार दिखाया है।’’
दूसरी ओर, मेट्रोपोलिटन पुलिस ने पत्रकारों के खिलाफ जांच की पुष्टि की है। जब पत्रकारों ने आर्डे से सवाल पूछने के लिए ईमेल भेजे थे, तो धमकाने की घटना की जांच हुई, लेकिन बाद में कोई अपराध नहीं पाया गया।
पुलिस ने पत्रकारों को आर्डे से अतिरिक्त संपर्क ना करने का आग्रह किया, कहा कि यह उचित नहीं था और इससे वैध पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है।
आर्डे के सहकर्मी जोहन ओवुसु-नेपाल ने बीबीसी न्यूज नाइट को दिए इंटरव्यू में कहा कि ‘‘पूरी घटना खेदजनक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कैंब्रिज में उनके कॅरियर को लेकर अस्पष्ट आलोचनाएं मुझे विचलित और दुखी कर रही हैं। उनके सीवी से जुड़ी गलत सूचनाओं के बारे में सुनकर मुझे दुःख हुआ है।’’





