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व्यापार वार्ता और एआई उत्साह से एशियाई बाजारों में सुधार

समाचार सारांश: कृत्रिम बौद्धिकता (एआई) के प्रति बढ़ती रुचि और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तथा एआई संबंधी सकारात्मक वार्ता के बाद सोमवार को एशियाई अधिकांश शेयर बाजारों में सुधार देखने को मिला है। अमेरिका और चीन के अधिकारियों ने एआई संबंधी नियमित संवाद के लिए ‘अमेरिका-चीन एआई संवाद’ तंत्र स्थापित करने पर रविवार को चर्चा की थी। हांगकांग का प्रमुख शेयर सूचकांक ०.०५ प्रतिशत बढ़ा, दक्षिण कोरिया का १.५ प्रतिशत और शंघाई सूचकांक भी ०.०५ प्रतिशत उभरा।

५ असोज, हांगकांग (रासस/एएफपी) — वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बौद्धिकता तकनीक की मांग बढ़ने और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार एवं एआई विषयक वार्ता से सकारात्मक संकेत मिलने के कारण सोमवार को अधिकांश एशियाई शेयर बाजारों में तेजी आई है। पिछले सप्ताह विश्व के शेयर बाजार मिश्रित स्थिति में बंद हुए थे। मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए विभिन्न केंद्रीय बैंकों द्वारा कड़ी मौद्रिक नीति अपनाई जा रही है। इसी क्रम में बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाई थी।

अमेरिका और चीन के आर्थिक अधिकारियों ने रविवार को व्यापार और एआई विषयों पर वार्ता की। यह वार्ता आगामी गुरुवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली शिखर बैठक से पहले हुई। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट ब्रेसेंट के अनुसार, दोनों पक्षों ने एआई संबंधी नियमित संवाद के लिए ‘अमेरिका-चीन एआई संवाद’ नामक तंत्र बनाने पर चर्चा की। चीनी सरकारी संचार माध्यमों ने इस वार्ता को स्पष्ट, गहन और रचनात्मक बताया है।

सोमवार को कारोबार शुरू होने के लगभग एक घंटे बाद हांगकांग का प्रमुख शेयर सूचकांक लगभग ०.०५ प्रतिशत बढ़ गया। दक्षिण कोरिया का तकनीकी क्षेत्र केंद्रित सूचकांक १.५ प्रतिशत उभरा, जबकि शंघाई शेयर बाजार भी ०.०५ प्रतिशत बढ़ा। सार्वजनिक अवकाश के कारण जापान के टोक्यो शेयर बाजार बंद थे, वहीं ऑस्ट्रेलिया के सिडनी बाजार में मामूली गिरावट देखी गई।

क्विन्टेक्स इंटेल के विश्लेषक स्टीफन इनेस ने कहा कि ट्रंप-शी की आगामी बैठक में व्यापार, निवेश और कृत्रिम बौद्धिकता से जुड़ा आधार पहले ही तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा, ‘बाजार इस बात का इंतजार कर रहा है कि बड़ी डील न होने के बावजूद दोनों देशों से व्यापारिक तनाव में वृद्धि न हो।’

इसी बीच, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के दाम उच्च बने हुए हैं, जिससे विश्व के केंद्रीय बैंकों पर मुद्रास्फीति नियंत्रण का दबाव बढ़ा है। जापान के केंद्रीय बैंक ने पिछले शुक्रवार को ब्याज दर को तीस वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचाया था। हालांकि, आने वाले दिनों में ब्याज दर वृद्धि अनुमान से धीमी होने के कारण येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। इससे पहले इसी माह यूरोपीय केंद्रीय बैंक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने मौद्रिक नीति और कठोर बनाई थी।

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के दाम में थोड़ी गिरावट आई है। सऊदी अरब ने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के अवरुद्ध होने के कारण कच्चे तेल आपूर्ति में प्रभाव को कम करने के लिए कुछ दिनों में लगभग आधा उत्पादन फिर से चालू करने की उम्मीद जताई है, जिससे दामों में दबाव आया है। हालांकि, ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख कच्चे तेल के मूल्य अभी भी प्रति बैरल लगभग १०० अमेरिकी डॉलर के करीब हैं, जो अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले के स्तर से काफी अधिक है।