
रूस ने यूक्रेन के ओडेसा समेत प्रमुख बंदरगाहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें नौ भारतीय और सीरियाई चालक दल के साथ एक यूक्रेनी पायलट की मौत हो गई है। बंदरगाह पर काम करने वाला माहौल अत्यंत जोखिम भरा हो गया है, मरीन ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष ओलेग ग्रिहोरियुक ने बताया। इन हमलों से यूक्रेन की खाद्य निर्यात क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को लगभग पांच से सात लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उपलब्ध कराने में असमर्थता उत्पन्न हुई है।
रूस ने यूक्रेन के ब्लैक सी क्षेत्रीय बंदरगाहों पर हमले तेज कर दिए हैं। ओडेसा और अन्य प्रमुख बंदरगाहों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। जुलाई माह के दौरान रूस ने नागरिक जहाजों और बंदरगाहों पर दर्जनों बार हमले किए हैं। 19 जुलाई को एक तुर्की मालवाहक जहाज को तीन रूसी मिसाइल लगी थीं। इस हमले में नौ भारतीय और सीरियाई चालक दल के सदस्य तथा एक यूक्रेनी पायलट भी मारे गए थे। अब ब्लैक सी जलमार्ग यात्रियों के लिए विश्व का सबसे खतरनाक क्षेत्र बन चुका है।
बंदरगाह पर काम करने वाले बड़ी भयभीत परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं। ओलेग ग्रिहोरियुक ने कहा, ‘बंदरगाह पर होना युद्ध के मोर्चे पर रहने से भी अधिक भयानक है।’ क्रिमिया क्षेत्र से दागे गए मिसाइल एक मिनट के भीतर पहुंच जाते हैं। कामगारों को क्रेन से उतरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में तीन मिनट से अधिक समय लगता है। इन हमलों के कारण ओडेसा के बंदरगाहों पर जहाजों का आवागमन लगभग बंद हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के मध्यस्थता में हुए खाद्यान्न समझौते के रुक जाने के बाद रूस ने नियमित हमले शुरू कर दिए हैं। पूरे दिन 15 घंटे से अधिक समय तक सायरन बज रहे हैं, जिससे बंदरगाह पर काम पूरी तरह प्रभावित हुआ है। खाद्य निर्यात कंपनी के ट्रेडिंग डायरेक्टर वोलोडिमिर स्लाविन्स्की ने कहा, ‘हमने अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को भेजने के लिए लगभग पांच से सात लाख मीट्रिक टन खाद्य पदार्थ निर्यात करने की क्षमता खो दी है।’





