इरान–अमेरिका तनाव युद्ध और शांति के बीच, होर्मुज जलमार्ग खोलने के लिए इरान की ६ शर्तें

समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा की गई।
- इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेस्कियान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी तनाव के बीच देश को युद्ध और शांति की अनिश्चित स्थिति से बाहर निकालने की बात कही है।
- इरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका के सामने ६ कठोर शर्तें रखीं, जिसमें Iranian संपत्ति की रिहाई और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना शामिल है।
- होर्मुज स्ट्रेट में यूएई के तेल टैंकर पर हमला और सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी में आग लगने से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं।
२४ साउन, काठमाडौं। इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेस्कियान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी तनाव के बीच देश को न युद्ध की स्थिति में रहने और न ही शांति की अनिश्चित स्थिति में फंसे रहने से बाहर निकालने पर जोर दिया है।
ओमान के मध्यस्थता में हो रही वार्ता में उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की विवादित स्थिति को सुलझाने और युद्धविराम उल्लंघन की घटनाओं को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास सर्वोत्तम विकल्प बताया।
इरानी मीडिया से बात करते हुए पेजेस्कियान ने कहा, ‘देश में फिलहाल एकता और शक्ति मौजूद है और मेरी राय में इरान इस युद्ध में विजयी और शक्तिशाली स्थिति में है। लेकिन हम इस अनिश्चित स्थिति से बाहर निकलना चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि ओमान में हो रही वार्ता से जल्द कोई निष्कर्ष निकलेगा।’
होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए इरान की ६ कठोर शर्तें
ओमान के मध्यस्थता में इरान और पश्चिमी देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट के व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवागमन के लिए एक ‘मध्य मार्ग’ या अस्थायी शिपिंग मार्ग बनाने पर सहमति के करीब पहुंचा गया है।
इरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि नई मार्ग की भौगोलिक सीमांकन अंतिम चरण में है।
हालांकि, इरान की उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने स्ट्रेट पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका के सामने ६ सख्त पूर्व शर्तें रखी हैं:
१. इरान और उसके पवित्र मूल्यों के खिलाफ धमकियां खत्म होनी चाहिए।
२. इरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई स्थायी रूप से बन्द होनी चाहिए।
३. इरान की समुद्री नाकाबंदी में लगे अमेरिकी नौसेना और वायुसेना को वापस जाना होगा।
४. हाल के संघर्ष में अमेरिकी सरकार को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करनी होगी।
५. इरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए।
६. अमेरिका द्वारा रोकी गई इरानी संपत्ति रिहा की जानी चाहिए।
अमेरिका का दावा और पेंटागन की नई रणनीति
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों ने इरान के परमाणु कार्यक्रम और पारंपरिक सैन्य क्षमता को कमजोर किया है।
उन्होंने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि इरान अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के लिए दीर्घकालीन परिवर्तन करेगा या नहीं। अगर नहीं भी करता है तो हम दबाव जारी रखेंगे और मध्य पूर्व में ईंधन आपूर्ति आसान बनाकर अमेरिकी जनता को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराएंगे।’
वहीं, युद्ध जारी रहने पर हथियार भंडार और लागत को ध्यान में रखते हुए पेंटागन अपनी रक्षा रणनीति में व्यापक संशोधन कर रहा है। अमेरिकी रक्षा नवप्रवर्तन इकाई (डीआईयू) के उप निदेशक जैरेड कनली ने कहा है कि पेंटागन के पास पर्याप्त हथियार हैं और अब कम लागत और स्वचालित हथियार प्रणाली पर जोर दिया जाएगा।
यूएई टैंकर पर हमला और सऊदी अरब की अरामको में आग
होर्मुज स्ट्रेट में संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी कंपनी ‘एडनोक’ द्वारा संचालित तेल टैंकर पर हमला हुआ है। यूएई ने इस हमले के लिए इरान को दोषी ठहराया है।
इस हमले की निंदा सऊदी अरब, बहरीन, कतर, जॉर्डन, सीरिया और यमन के अधिकारियों ने की है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इरान का यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला है।
इसी बीच, सऊदी अरब के जिजान में ‘सऊदी अरामको’ के रिफाइनरी में रविवार सुबह भीषण आग लग गई।
दमकल कर्मियों ने आग को नियंत्रण में लिया और कोई मानव जानहानि नहीं हुई है, यह जानकारी सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने दी। यमन के हूती विद्रोहियों ने पहले भी उस रिफाइनरी पर हमला कर चुके हैं।
इराकी मिलिशिया का बदला चेतावनी और ‘मक्का रक्षा समझौता’
इराक के इरान समर्थित ‘हरकात हिज़्बुल्लाह अल-नुजाबा’ मिलिशिया के प्रमुख अक्रम अल-काबी ने पिछले महीने सऊदी-अमेरिकी संयुक्त हवाई हमले में मारे गए अपने २० से ज्यादा लड़ाकों का बदला लेने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के साथ कूटनीति बेकार है और मिसाइल का जवाब मिसाइल से तथा आग का जवाब आग से दिया जाएगा।
वहीं, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच मक्का में हुए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते में अगले चरण में मिस्र भी शामिल हो सकता है, यह जानकारी तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य इरान को निशाना बनाना नहीं है।
(अलजज़ीरा के सहयोग से)





