
समाचार सारांश: हेटौंडा स्थित गोरक्षेश्वर दिव्यधाम के संस्कृत वेद विद्यालय ने प्राचीन धर्मग्रंथों के संग्रह के माध्यम से अध्ययन और अनुसंधान के केंद्र के रूप में पुस्तकालय विकास की पहल शुरू की है। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामकृष्ण थापा ने प्राचीन धार्मिक पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर पुस्तकालय के संरक्षण एवं विकास में सहयोग करने का आग्रह किया है। बागमती प्रदेश के पर्यटन मंत्रालय ने गत आर्थिक वर्ष २०८१/०८२ में पुस्तकालय प्रबंधन के लिए दो लाख रुपये प्रदान किए थे, जिसकी जानकारी विद्यालय द्वारा दी गई है। २५ साउन, बागमती।
हेटौंडा उपमहानगरपालिका–१० में स्थित गोरक्षेश्वर दिव्यधाम के संस्कृत वेद विद्यालय के पुस्तकालय में प्राचीन धर्मग्रंथ संग्रह अभियान चलाया जाएगा। २०५६ साल में स्थापित इस विद्यालय द्वारा वर्तमान में संचालित पुस्तकालय को और व्यवस्थित करते हुए प्राचीन धार्मिक पुस्तकों के संग्रह की तैयारी की जा रही है, जिसके संबंध में विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामकृष्ण थापा ने जानकारी दी है।
पुस्तकालय में वर्तमान में लगभग २५० पुस्तकें संग्रहित हैं, और उन्होंने प्राचीन महत्व की धर्मग्रंथों की उपलब्धता हेतु सभी से आग्रह किया है। उन्होंने कहा, “पुस्तकालय व्यवस्थित करने के उद्देश्य से गत आर्थिक वर्ष २०८१/०८२ में बागमती प्रदेश के पर्यटन मंत्रालय ने दो लाख रुपये प्रदान किए थे।” “हम इस पुस्तकालय को प्राचीन धर्मग्रंथ संग्रह कर अध्ययन तथा अनुसंधान का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखते हैं,” उन्होंने आगे बताया। साथ ही, “यदि किसी के पास प्राचीन धर्मग्रंथ सुरक्षित हैं तो उन्हें पुस्तकालय को सहयोग स्वरूप उपलब्ध कराने का अनुरोध है।”
पुस्तकालय में रखी गई पुस्तकों से विद्यार्थी एवं शोधकर्ता लाभान्वित होंगे और ये दशकों तक सुरक्षित रहेंगे। देश के विभिन्न जिलों से आए लगभग ५० बटुक विद्यार्थी इस विद्यालय में अध्ययनरत हैं, जो लगभग ४० विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा भी प्रदान करता है।





