
बूढीगण्डकी जलविद्युत् परियोजना से प्रभावित स्थानीय लोगों ने सरकार से तत्काल मुआवजा वितरण या अपने घर-जमीन लौटाने की अपील की है। परियोजना ने डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जिन्दगी कठिन बना दी है और विकास कार्य भी ठप पड़ गए हैं, जिसके कारण सरोकार समिति ने सरकार की आलोचना की है। समिति ने अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो और आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है तथा पिछले दशक से परियोजना की अनिश्चितावस्था पर आरोप लगाया है। २७ साउन, काठमाडौं।
बूढीगण्डकी जलविद्युत् परियोजना अनिश्चित स्थिति में पड़ने के बाद स्थानीय प्रभावित लोगों ने मुआवजा देने या घर-जमीन वापस करने की मांग रखी है। पुनर्वास और पुनर्स्थापनाकी आशा में कुछ लोगों ने मुआवजा लेकर जमीन दी थी, जो अब अनिश्चितता में हैं। वे बाकी बचे मुआवजे की मांग कर रहे हैं, क्योंकि प्रशासनिक कारणों से मुआवजा से वंचित हुए हैं, साथ ही बाजार क्षेत्र के निवासियों के व्यवसाय सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग है। मुआवजा न मिलने पर घर-जमीन वापस करने की चेतावनी भी दी गई है।
बूढीगण्डकी जलविद्युत् परियोजना की राष्ट्रीय सरोकार समिति ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि वर्तमान सरकार परियोजना को जरूरी महत्व नहीं दे रही है और स्थानीय लोगों को असमंजस में डाले हुए है। समिति ने डूब क्षेत्र में रह रहे लोगों के पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) रिपोर्ट और जिला मुआवजा समिति गोरखा-धादिङ द्वारा मंत्रिपरिषद को दिए गए सुझावों के अनुसार सुविधाएं प्रदान करने की मांग की है। साथ ही, बूढीगण्डकी जलाशय के बाहर चक्रपथ बनाकर एक व्यवस्थित शहर स्थापित कर डूब इलाकों के लोगों का पुनर्वास करने का आग्रह भी किया गया है। अन्यथा परियोजना को आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा की चेतावनी भी दी गई है।





