
अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने विकसित हो रहे ‘सुपर एल नीनो’ को इतिहास में सबसे शक्तिशाली बनने की लगभग 70 प्रतिशत संभावना जताई है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह शक्तिशाली एल नीनो वर्ष 2027 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बना सकता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के जलवायु विज्ञानी डेनियल स्वेन ने इस घटना को असाधारण बताया है और आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता बढ़ने की संभावना जताई है।
29 साउन, काठमाण्डू – अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने विकसित हो रहे ‘सुपर एल नीनो’ को अब तक का सबसे शक्तिशाली एल नीनो होने का अनुमान लगाया है। गुरुवार को जारी किए गए पूर्वानुमान के अनुसार, इस एल नीनो के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बनने की संभावना लगभग 70 प्रतिशत है। पहले इसे ‘ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सबसे बड़ा एल नीनो’ माना जा रहा था।
इस नवीन अनुमान में बदलाव का मुख्य कारण है एल नीनो का तीव्र विकास और विभिन्न कम्प्यूटर मॉडल जो इसके और अधिक शक्तिशाली होने का संकेत देते हैं। NOAA के अनुसार, यह घटना शरद ऋतु के अंत से लेकर शीतकाल की शुरुआत तक चरम पर पहुँच सकती है। NOAA ने एल नीनो की तीव्रता का रिकॉर्ड 1950 से रखा है। नवीनतम अनुमान यह भी दिखाता है कि यह एल नीनो 1982–83 में आए शक्तिशाली एल नीनो का रिकॉर्ड भी तोड़ सकता है।
एल नीनो की स्थिति में मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के समुद्र तल का तापमान औसत से काफी ज्यादा बढ़ जाता है। गर्म पानी वायुमंडल में तीव्रता लाता है जिससे वैश्विक मौसम प्रणाली पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। NOAA की रिपोर्ट में उल्लेख है कि इस बार प्रशांत महासागर में समुद्र तल के तापमान में औसतन 2.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि हो सकती है। तापमान का यह मापन तीन माह के औसत पर आधारित होता है जो अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को कम महत्व देता है।
एल नीनो के कारण इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखे की घटना बढ़ेगी, जबकि दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का खतरा रहेगा। इसका प्रभाव विश्व के अन्य हिस्सों में अलग अलग होगा। जलवायु परिवर्तन के कारण उष्णकटिबंधीय महासागरों के औसत तापमान में वृद्धि हुई है, जिससे एल नीनो के पारंपरिक प्रभाव में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
NOAA ने ‘रिलेटिव ओशियनिक नीनो इंडेक्स’ (RONI) नामक एक नया सूचक विकसित किया है जो समुद्र के दीर्घकालिक तापमान वृद्धि को ध्यान में रखकर एल नीनो की वास्तविक तीव्रता मापता है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार का एल नीनो असाधारण रूप से तीव्रता से विकसित हो रहा है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डेनियल स्वेन के अनुसार, यह घटना बेहद असाधारण है और एल नीनो अभी से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, साथ ही आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि वर्ष 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि एल नीनो की तीव्रता और इसके प्रभावों को हमेशा सीधे तौर पर नहीं देखना चाहिए, इसलिए इतिहास का सबसे शक्तिशाली एल नीनो होने के बावजूद सभी प्रभावित क्षेत्रों में चरम मौसम की गारंटी नहीं है। हालांकि सामान्य एल नीनो प्रभावों की संभावना अधिक रहेगी, खासकर उत्तरी गोलार्ध में शरद और शीतकाल के दौरान इसके प्रभाव ज़्यादा देखने को मिल सकते हैं।
अमेरिका में कैलिफोर्निया से लेकर दक्षिणी राज्यों तक तथा फ्लोरिडा में असामान्य रूप से अधिक वर्षा होने का अनुमान है। वहीं मध्य-पश्चिमी क्षेत्रों में एल नीनो के कारण सर्दियां सामान्य से गर्म और शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। एल नीनो वैश्विक औसत तापमान को बढ़ाता है। मानवीय गतिविधियों से हो रहे दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन के बीच एल नीनो तापमान में और वृद्धि करता है, जिससे आने वाले वर्ष में इसका प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस शक्तिशाली एल नीनो के कारण वर्ष 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की लगभग निश्चित संभावना है। साथ ही, 2026 भी अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना NOAA के पूर्वानुमान में शामिल है।





