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‘अब विद्युत् उत्पादन मात्र नहीं, खपत और निर्यात वृद्धि प्राथमिकता होगी’

ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने विद्युत् उत्पादन बढ़ाकर आर्थिक और सामाजिक मूल्य सृजन करने की सरकार की नीति की जानकारी दी। सरकार प्रसारण प्रणाली को सुदृढ़ करने, आंतरिक खपत वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय विद्युत् व्यापार को प्राथमिकता देने की योजना बना रही है। मंत्री श्रेष्ठ के अनुसार जलविद्युत् क्षेत्र में ‘लाइसेन्स राज’ समाप्त कर पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रणाली स्थापित करना सरकार का लक्ष्य है।

१ भदौ, काठमांडू। सरकार अब विद्युत् उत्पादन मात्र नहीं बल्कि उत्पादन से आर्थिक और सामाजिक मूल्य सृजन की नीति पर जोर दे रही है। नेपाल विद्युत् प्राधिकरण के 41वें वार्षिकोत्सव पर ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने बताया कि विद्युत् उत्पादन के साथ आंतरिक खपत, प्रसारण एवं वितरण प्रणाली में सुधार तथा बाह्य बाजार के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्री श्रेष्ठ के अनुसार नेपाल में विद्युत् उत्पादन आंतरिक मांग से अधिक है, इसलिए खपत बढ़ाना और निर्यात का विस्तार करना अनिवार्य है। उन्होंने घरेलू उपभोक्ताओं को सहुलियत मूल्य पर भरोसेमंद विद्युत् उपलब्ध कराने और उत्पादन कक्ष उद्योगों के लिए स्थिर दर पर विद्युत् आपूर्ति करने के सरकार के प्रयास जारी रहने की बात कही। वर्षा ऋतु में विद्युत् का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मौसमी दर लागू करने की पहल भी जारी है, उन्होंने जोड़ा।

प्रसारण पूर्वाधार विस्तार पर जोर
मंत्री श्रेष्ठ ने बताया कि इस आर्थिक वर्ष में सरकार का विशेष ध्यान प्रसारण पूर्वाधार के विस्तार और सुधार पर केन्द्रित है। विद्युत् उत्पादन बढ़ने के बावजूद कमजोर प्रसारण प्रणाली से अर्थ नहीं होगा, उन्होंने बताया। इसलिए रणनीतिक महत्व वाले प्रसारण लाइन, सबस्टेशन, ग्रिड सुदृढ़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रसारण पूर्वाधार निर्माण में तेजी लाने की योजना बनाई गई है। उत्पादित विद्युत् नष्ट न होने पाए, इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रसारण नेटवर्क का विस्तार आवश्यक है, उन्होंने जोर दिया। साथ ही विद्युत् निर्यात बढ़ाकर विदेशी व्यापार घाटा कम करने की योजना में सरकार आगे बढ़ रही है।

आगामी वर्ष में वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण
मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि अब मुख्य चुनौती विद्युत् पहुँच के विस्तार की नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को स्थायी, भरोसेमंद एवं गुणवत्ता से भरपूर सेवा उपलब्ध कराने की है। आगामी आर्थिक वर्ष से वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। पुराने और जीर्ण ढांचे का प्रतिस्थापन, क्षमता वृद्धि, स्मार्ट तकनीक का उपयोग, विद्युत् चुहावट नियंत्रण, मांग प्रबंधन और सेवा प्रवाह में डिजिटल तकनीक का विस्तार आवश्यक है, उन्होंने स्पष्ट किया।

प्राधिकरण की निवेश क्षमता और वित्तीय स्वास्थ्य सुधारते हुए निजी और बाह्य पूंजी आकर्षित करने की नीति आवश्यक है, मंत्री श्रेष्ठ ने कहा। परियोजनाओं के प्रतिफल और जोखिम का मूल्यांकन कर निवेश प्राथमिकता तय करनी चाहिए तथा सार्वजनिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए, उनका कहना है। प्राधिकरण को मजबूत बनाना ज़रूरी है, लेकिन इसका अर्थ एकाधिकार होना नहीं है, उन्होंने स्पष्ट किया। निजी क्षेत्र ऊर्जा विकास में भारी निवेश और जोखिम उठा रहा है, इसका संरक्षण और संवर्धन राज्य की ज़िम्मेदारी है, उन्होंने अतिरिक्त कहा। नियमन और प्रतिस्पर्धी वातावरण बनाकर और अधिक निवेश आकर्षित करना होगा, उनका तर्क है।

मंत्री श्रेष्ठ ने बताया कि सरकार जलविद्युत् क्षेत्र में लंबे समय से जारी ‘लाइसेन्स राज’ को समाप्त कर निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। सरकार ने प्राधिकरण के आर्थिक और प्रशासनिक अधिकारों का विकेंद्रीकरण करने की नीति अपनाई है और उस अनुसार कदम उठा रही है। निर्णय प्रक्रिया को तेज़, जिम्मेदारी स्पष्ट और सेवा प्रवाह पर सीधा प्रभाव डालने वाला बनाने की सरकार की उम्मीद है। प्राधिकरण की संरचनात्मक सुधार और पुनर्संरचना से किसी की प्रतिष्ठा कमजोर नहीं होगी, बल्कि समग्र ऊर्जा क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी, सक्षम और निवेशमैत्री बनाने का अवसर माना जाना चाहिए, उन्होंने अनुरोध किया।

विद्युत् महसूल बकाया वसूली को कानून और व्यवस्थाओं के आधार पर समाधान करने की सरकार की दृष्टि है, मंत्री श्रेष्ठ ने कहा। विद्युत् महसूल राजस्व का मुख्य स्रोत होने के कारण बकाया वसूली को प्राधिकरण की दैनिक प्राथमिकता बनाकर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विद्युत केवल रोशनी जलाने का साधन नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र आर्थिक रूपांतरण की आधारशिला बनकर सफल हुआ है। ऊर्जा क्षेत्र अब नेपाल के आर्थिक रूपांतरण में सहायक ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख स्तम्भ के रूप में स्थापित हो चुका है, उनका कहना था।