
१५ असोज, ज्यूरिख (रासस/एपी) । स्विट्जरलैंड की हिमनदियों में इस वर्ष कुल बर्फ की मात्रा में ५.५ प्रतिशत की गिरावट आई है। अत्यधिक गर्मी और सर्दियों में कम हिमपात के कारण बर्फ के पिघलने की दर तेज होने से यह कमी रिकॉर्ड में दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट मानी गई है। ग्लामोस स्विस हिमनदी निगरानी सेवा और स्विस एसोसिएशन ऑफ साइंसेज ने गुरुवार को जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में स्विट्जरलैंड की हिमनदियों में बर्फ लगभग एक पांचवें हिस्से तक कम हो गई है।
ग्लामोस के प्रमुख और हिमविज्ञान के प्रोफेसर मैथियास हस ने बताया कि अल्पाइन हिमनदियाँ वर्तमान स्थिति में दीर्घकालिक रूप से टिक नहीं सकतीं। उनके अनुसार हाल का तापमान वृद्धि पूरी तरह से मानवजनित जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। मानव गतिविधि और जीवाश्म ईंधन के उपयोग के बिना इस तरह की तापमान वृद्धि संभव नहीं है। सर्दियों में पर्याप्त हिमपात न होने से हिमनदियों के दीर्घायु पर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।
हिम बर्फ पुराने ग्लेशियर को पिघलने से बचाता है और ऊंचाई पर नई बर्फ बनने के लिए आधार भी तैयार करता है। २०२२ में अत्यधिक गर्मी, कम हिमपात, तथा सहारा रेगिस्तान से आई लाल धूल के कारण स्विस हिमनदियों में अब तक की तेज़तम बर्फ की कमी दर्ज हुई थी। इस वर्ष जुलाई से सितंबर के बीच स्विट्जरलैंड की हिमनदियों ने लगभग २२ खरब लीटर पानी के बराबर बर्फ खोई है। यह मात्रा लगभग ९१ लाख की जनसंख्या वाले स्विट्जरलैंड की वार्षिक जल खपत का चार गुना है।
स्विट्जरलैंड अपनी आधे से अधिक विद्युत जलविद्युत से उत्पन्न करता है, इसलिए हिमनदियों की स्थिति जल स्रोतों और ऊर्जा उत्पादन पर सीधे प्रभाव डालती है। इस वर्ष हिमनदियों में खोई गई बर्फ की मात्रा २००३ की तुलना में कम है, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से नुकसान अधिक है। २००३ में कुल बर्फ की मात्रा में ३.५ प्रतिशत की गिरावट आई थी जबकि आज हिमनदियों में बची बर्फ की मात्रा २३ साल पहले के करीब एक तिहाई तक रह गई है। इस वर्ष कुछ हिमनदियों में औसत वर्षा की मोटाई २.५ से ४ मीटर तक और कुछ हिमनदियों के आगे के भाग में बर्फ की मोटाई १० मीटर तक कम पाई गई है।
एलालिन, क्लेरिडेन्ट, रोन और आल्प्स क्षेत्र में स्थित सबसे बड़ी एलेट्स हिमनदी तेजी से बर्फ खोने वाले समूह में शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि हिमनदियों के पिघलने के प्रभाव केवल स्विट्जरलैंड तक सीमित नहीं हैं। स्विट्जरलैंड को यूरोप का ‘पानी का टावर’ माना जाता है और यहाँ से डेन्यूब, पो, राइन और रोन जैसी प्रमुख नदियों को जल स्रोत प्राप्त होते हैं। वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण हिमालय, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका सहित कई क्षेत्रों में भी बर्फ और हिमनदियों में बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं।





