
१ भदौ, तेहरान (रासस/एपी) । ईरान ने विश्व के महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक होर्मुज जलसन्धि से व्यावसायिक जहाजों की पारगमन व्यवस्था पर ओमान के साथ संयुक्त बयान को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहा है। यह पहल ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने तथा शांति समझौते के लिए निर्धारित ६० दिन की वार्ता अवधि समाप्त होने के समय कोई ठोस सहमति न बनने की स्थिति में आई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने सोमवार को तेहरान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि होर्मुज जलसन्धि में जहाजों के पारगमन मार्ग को लेकर समझौता हो चुका है और इसे संयुक्त बयान के जरिए अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन पहले सार्वजनिक हुई जानकारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में ईरान की जलमार्ग से जहाजों का अंदर आना और ओमान की जलमार्ग से बाहर जाना शामिल होगा।
अंतरिम अवधि में जहाजों से कोई शुल्क या टोल न लेने के विषय पर भी चर्चा हुई है। अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाने से पहले होर्मुज जलसन्धि को व्यावसायिक ट्रांसपोर्ट के लिए पुनः खोलने की मांग करता रहा है। हालांकि, ईरान और ओमान के बीच बन रही व्यवस्था अमेरिकी उम्मीदों को पूरा करती है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हुआ है। ईजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध के बाद ईरान ने होर्मुज जलसन्धि में जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से सीमित कर दी थी। युद्ध से पहले, विश्वव्यापी कुल व्यापारिक तेल की लगभग पांचवीं हिस्सेदारी इसी जलमार्ग से होकर जाती थी।
बाघाई ने ओमान के साथ वार्ता अपेक्षाकृत धीमी रही स्वीकार करते हुए बताया कि नक्शा संबंधित समझौता और संयुक्त बयान को एक पैकेज के रूप में अंतिम रूप देने की योजना है। इसी बीच, ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्ति के लिए निर्धारित ६० दिन की वार्ता अवधि समाप्त होने जा रही है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई स्पष्ट सहमति के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। वार्ता अवधि बढ़ाने को लेकर भी कोई तत्काल घोषणा नहीं हुई है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और मध्य पूर्व वार्ताकार जारेड कुश्नर ने सोमवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। कुश्नर ने इससे पहले मिस्र में हमास के नेता खलील अल-हयाह से समूह के निशस्त्रीकरण पर चर्चा की थी। इजरायल ने गाजा में युद्धविराम के लिए अमेरिका द्वारा प्रस्तावित १५ बिंदु योजना को अस्वीकार किया है, जिसके बाद कुश्नर और नेतन्याहू की यह बैठक हुई। हमास ने इस योजना को स्वीकार किया है और मध्यस्थों तथा अमेरिकी नेतृत्व वाले शांति बोर्ड से आग्रह किया है कि वे इजरायल को भी योजना स्वीकार करने के लिए दबाव डालें। योजना के अनुसार, इजरायली सेना को गाजा से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना होगा। लेकिन इजरायल ने यह कहते हुए अपनी सेना की वापसी से इनकार किया है कि हमास पूरी तरह से निशस्त्र नहीं हुआ है। इजरायली सेना वर्तमान में गाजा के लगभग ६० प्रतिशत क्षेत्र पर नियंत्रण रखती है, और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सैन्य कार्रवाई बढ़ाने की चेतावनी भी दी है।





