
सन् २०२५ के प्यू सर्वेक्षण के अनुसार २३ देशों के लगभग ६० प्रतिशत प्रतिभागी लोकतंत्र के प्रति असंतुष्ट नजर आए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी में संक्रामक रोग पहचान, युवा रोजगार और रेल सेवा जैसी सार्वजनिक सेवाएं राज्य की क्षमता की कमी से प्रभावित हुई हैं। लेख में निष्कर्ष निकाला गया है कि लोकतंत्र को नई संस्थाएँ स्थापित करनी होंगी, पुराने निकायों को बंद करना होगा, और एआई युग के अनुकूल कार्यप्रणाली को अपनाना होगा। पिछले दशक में विश्वभर के लोकतंत्र आंतरिक संकटों का सामना कर रहे हैं, इस बात को स्वीकार्यता मिलती जा रही है।
सन् २०२० की शुरुआत में कोविड-१९ महामारी संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश कर गई थी। उस समय अमेरिकी सरकार संक्रामक रोग पहचान के लिए वार्षिक लगभग ६० करोड़ डॉलर खर्च कर रही थी। तब भी यह वायरस एक माह तक किसी की नज़रों से बचकर फैल गया। कर्मचारी तंत्र की जटिलताओं के कारण शोधकर्ताओं को वायरस की पहचान के लिए स्वाब परीक्षण की अनुमति नहीं दी गई। महामारी के बाद ब्रिटेन सरकार ने युवा रोजगार सेवाओं पर अरबों डॉलर खर्च किए। फिर भी १६ से २४ वर्ष के रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर रहने वाले युवाओं की संख्या १० लाख से अधिक हो गई है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के कई इलाकों में लोग राजनीतिक दलों के नेताओं के भाषणों और अपनी आँखों से देखे वास्तविकता की तुलना करते हैं। वे जो सुनते हैं और जो वास्तविक स्थिति है, वे मेल नहीं खाते। इससे लोगों में निराशा और अविश्वास बढ़ा है। वर्तमान संकट का समाधान खोजने के लिए लोकतंत्रों को नई संस्थाएँ बनाने की आदत डालनी होगी। आज लोकतंत्रों में जो समस्याएं हैं उन्हें सुलझाने के लिए कई उपाय आवश्यक होंगे, लेकिन यदि सरकारें अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर पाईं तो कोई अन्य उपाय टिकाऊ नहीं होगा।





