
समाचार सारांश
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- सरकार ने कूड़ा प्रबंधन विधेयक २०८३ संसद में दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें ट्रांसफर स्टेशन, प्रसंस्करण केंद्र और पुनर्चक्रण को स्पष्ट रूप दिया गया है।
- मंत्री सुनील लम्साल के अनुसार पुराना कानून, कानूनी अस्पष्टता और संरचनात्मक कमी के कारण काठमांडू सहित कई नगरपालिकाओं में समेकित कूड़ा प्रबंधन लागू नहीं हो सका है।
- लम्साल ने दावा किया कि तीन वर्षों के भीतर देश भर की सभी नगरपालिकाओं को शून्य कूड़ा अवधारणा पर ले जाया जाएगा और विधेयक पारित होने के एक वर्ष के भीतर प्रभाव दिखने लगेगा।
सरकार कूड़ा प्रबंधन के लिए एक विधेयक तैयार कर रही है। पूर्वाधार विकास मंत्री सुनील लम्साल के अनुसार कूड़ा प्रबंधन विधेयक २०८३ संसद में दायर करने की प्रक्रिया में है। काठमांडू महानगरपालिका में बालेन शाह के निर्वाचित होने के बाद लम्साल ने कूड़ा प्रबंधन पर काम किया था। मंत्री लम्साल ने पीएच.डी. स्तर की पढ़ाई भी कूड़ा प्रबंधन में की है।
जब बालेन शाह काठमांडू के मेयर थे तब बांचरेडांडा लैंडफिल साइट शुरू किया गया था। लेकिन कूड़ा प्रबंधन की समस्या अभी भी हल नहीं हो पाई है। २० वर्षों के लिए बनाये गए बांचरेडांडा लैंडफिल साइट पर चार वर्षों में ही कूड़ा क्यों भर गया? कूड़ा प्रबंधन इतनी जटिल समस्या क्यों बन जाती है? सरकार इस संबंध में क्या कर रही है?
इन विषयों पर केन्द्रित साक्षात्कार में मंत्री लम्साल से संवाददाता दिनेश गौतम ने बातचीत की, जिसके संपादित अंश प्रस्तुत हैं:
आप काठमांडू महानगरपालिका में काम कर चुके हैं और कूड़ा प्रबंधन पर अध्ययन भी किया है। कूड़ा प्रबंधन में समस्या कहाँ है? समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है?
संविधान ने स्थानीय तह को कूड़ा प्रबंधन का अधिकार दिया है, लेकिन हमारे पास जो कूड़ा प्रबंधन कानून है वह २०६८ साल का है। यह संविधान से पहले का कानून है। इसमें समेकित कूड़ा प्रबंधन प्रणाली की कल्पना नहीं की गई थी। काठमांडू सहित कई नगपालिकाओं में समेकित कूड़ा प्रबंधन आवश्यक है।
समेकित प्रणाली न होने के कारण सभी नगरपालिकाओं को एक समझ में लेकर काठमांडू महानगरपालिका को नेतृत्व करना चाहिए था, लेकिन उसके पास कानूनी वैधता नहीं थी, इसलिए दीर्घकालिक समाधान संभव नहीं हो पाया।
काठमांडू के कूड़ा प्रबंधन के लिए २०६६ साल में टेंडर निकाला गया था, लेकिन कानूनी अस्पष्टता और फैसलों में देरी के कारण यह लागू नहीं हो सका।
संविधान लागू होने के बाद कूड़ा प्रबंधन का अधिकार स्थानीय तह को मिला, लेकिन उस टेंडर की स्थिति अब भी पेंडिंग है क्योंकि कानूनी आधार कमजोर था।
एक अन्य समस्या धुनिबेसी नगरपालिका में स्थित लैंडफिल साइट का कानूनी स्वामित्व अस्पष्ट होना है। नया बन रहे कानून में इसे स्पष्ट किया जाएगा।
तो क्या कूड़ा प्रबंधन विधेयक तैयार किया जा रहा है? इसमें क्या क्या शामिल है?
हाँ, कूड़ा प्रबंधन विधेयक २०८३ तैयार हो रहा है। मैंने काठमांडू महानगरपालिका में रहते हुए कूड़ा प्रबंधन की समस्या नजदीक से देखी है, और इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए यह विधेयक बनाया जा रहा है।
इस विधेयक में कूड़े से निकलने वाले उत्पाद और कबाड़ को व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने पर ध्यान दिया गया है। कूड़े से निकलने वाले कबाड़ के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण के मानक शामिल किए गए हैं।
काठमांडू में घरों से कूड़ा इकट्ठा कर ट्रांसफर स्टेशन तक लाना पड़ता है। पुराने कानून में ट्रांसफर स्टेशन बनाने की अनुमति नहीं थी, जिससे समस्या बनी हुई थी। नए विधेयक में ट्रांसफर स्टेशन को पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) से मुक्त किया गया है। ट्रांसफर स्टेशन केवल कूड़ा जमा करने की जगह नहीं है, बल्कि छोटे वाहनों से बड़े वाहनों में कूड़ा स्थानांतरित करने का स्थल है।
यह विधेयक कूड़ा घटाने और शून्य कूड़ा अवधारणा को बढ़ावा देगा। इसमें कूड़ा संग्रहण के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों के मानक, स्थानांतरण केंद्र के क्षेत्रफल और स्थान निर्धारण को अनिवार्य बनाया गया है।
प्रसंस्करण केंद्र के लिए मल उत्पादन इकाई का प्रावधान है। इसे फैक्ट्री मान्यता दी जाएगी और अनुदान भी दिया जाएगा। इससे कूड़े को मल में परिवर्तित करने को प्रोत्साहन मिलेगा और बांचरेडांडा पर जाने वाले कूड़े की मात्रा कम होगी।
कूड़ा जलाकर या अन्य प्रक्रिया से बिजली उत्पादन की व्यवस्था है। सरकार प्रति यूनिट १६ से १८ रुपये तक खरीद की गारंटी देगी, जिससे निवेश में सुविधा होगी।
निर्माण संबंधी कूड़ा संसाधन के लिए क्रेशर प्लांट स्थापित करना अनिवार्य होगा। इससे निर्माण संबंधी कूड़ा पुनः संसाधित होकर टाइल, रिंग आदि उत्पाद बनाए जाएंगे, जिन्हें सरकार प्राथमिकता देगी।
इंसिनरेटर प्लांट द्वारा काम न आने वाले कूड़े को जलाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए कूड़ा उत्पादन करने वाली कंपनियाँ अपने बाजार भाग के अनुसार प्रबंधन लागत वहन करेंगी, जो वैश्विक प्रचलन को दर्शाता है।
विधेयक पारित होने पर नगरपालिकाओं को तीन महीनों के भीतर समिति गठित करनी होगी, छह महीनों के भीतर आवश्यक भूमि उपलब्ध करानी होगी, और तीन वर्षों के भीतर देश की सभी नगरपालिका को शून्य कूड़ा अवधारणा में परिवर्तित करना होगा।
बांचरेडांडा लैंडफिल साइट चार वर्षों में भर जाने का मुख्य कारण क्या था?
कूड़े की अधिक मात्रा इस समस्या का प्रमुख कारण थी। वर्तमान में रोजाना कम से कम १५०० मैट्रिक टन कूड़ा उत्पन्न होता है। कानून के मार्गदर्शन न होने के कारण नगरपालिकाओं ने उचित संरचना नहीं बनाई, जिससे समस्या बढ़ी।
कई नगरपालिकाओं ने अपने क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधन के लिए भूमि भी आवंटित नहीं की है। काठमांडू महानगरपालिका में केवल टेकु में ही थोड़ी सी भूमि है, जहां विवाद भी है।
कूड़ा घटाने के लिए स्रोत स्तर पर काम करना जरूरी है, लैंडफिल तक कूड़ा पहंचाना समस्या का समाधान नहीं है। विधेयक पारित होते ही इसका प्रभाव एक साल में दिखने लगेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।
काठमांडू महानगरपालिका में काम करते हुए स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका?
हमने कुछ काम किए और काफी कूड़ा कम किया। केवल टेकु में १२ वार्डों से ८० प्रतिशत से अधिक कूड़ा कम किया गया था। यदि काठमांडू की सभी नगरपालिकाएं ऐसा करतीं तो लैंडफिल की आयु १० वर्ष बढ़ सकती थी।
बांचरेडांडा लैंडफिल साइट की स्थिति जटिल है, लिचेट नाले में कूड़ा मिल चुका है और आसपास के गांवों में दुर्गंध फैल गई है?
पहले की तुलना में सिसडोल से अब प्रबंधन बेहतर है, लेकिन सुधार आवश्यक है। इसे प्रसंस्करण इकाई में बदला जाना चाहिए क्योंकि लिचेट बहुत दुर्गंधित होता है।
लिचेट प्रसंस्करण केंद्र के काम की पहल हमने की थी और टेंडर प्रक्रिया तक पहुचाए थे, पर कानूनी अस्पष्टता के कारण आगे नहीं बढ़ पाया। मिश्रित कूड़ा प्रबंधन में लिचेट सबसे बड़ी चुनौती है।
बांचरेडांडा में लिचेट प्रबंधन डैंप बनाया गया था लेकिन भर जाने के कारण वह नाले में मिल गया, ऐसा क्यों हुआ?
बारिश के मौसम में ऐसा होता है क्योंकि अवधारणा के अनुसार लिचेट को संग्रह कर वाष्पित और सुखाना होता है।
लिचेट को प्रसंस्कृत कर ऊपर कूड़ा डालने की योजना क्यों विफल रही?
यह पूरी तरह विफल नहीं हुई, प्रभाव कम हुआ है। बारिश के मौसम में यह प्रणाली प्रभावकारी नहीं रहती, हालांकि अन्य समय में काम करती है।
लैंडफिल साइट की दुर्गंध के कारण स्थानीय लोग रहने में असहज हैं, EIA रिपोर्ट कहां पहुंची है?
EIA रिपोर्ट पूरी हो चुकी है। अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता और प्रभाव क्षेत्र का निर्धारण रिपोर्ट में है। स्थानीय मांगों और रिपोर्ट में कुछ अंतर है, इसलिए और अध्ययन आवश्यक है।
अभी तक पहाड़ी क्षेत्र से लेकर लैंडफिल साइट तक भूमि अधिग्रहित की गई है, लेकिन लोग उस जमीन पर खेती कर रहे हैं, जो सार्वजनिक भूमि है।
स्थानीय लोग यह सवाल कर रहे हैं कि ‘‘कूड़ा और लोग साथ में नहीं रह सकते, कितनी दूरी पर रखा जाए?’’ इसे आप कैसे संबोधित करेंगे?
कूड़े के पास लोग नहीं रहते, समस्या पीड़ितों की है। दीर्घकालिक समाधान खोजने की जरूरत है।
स्थानीय लोग आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं, समाधान का आधार क्या होगा?
अब काम करके दिखाना होगा। संसद में इस विषय पर बहस होगी और यही उचित विकल्प है। सरकार इस आवश्यकता को समझते हुए तेजी से काम कर रही है। एक-दो वर्षों के भीतर कूड़ा समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
यह विधेयक इस अधिवेशन में पास होगा या अगले अधिवेशन तक चलेगा?
संसद में पेश होने के बाद आवश्यकता अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रतिनिधि सभा से जल्दी पास हो सकता है और राष्ट्रिय सभा में भी बड़ी बाधा नहीं होगी।





