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भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ के बाद बाहरी सहायता: नेपाल को क्या-क्या चाहिए और क्या-क्या आ रहा है?

भारतको गाजियाबादबाट सहायता पठाइँदै

तस्बिर स्रोत, Indian Defence Ministry/Handout via REUTERS

विनाशकारी बाढ़ के बाद खोज एवं उद्धार कार्य जारी हैं और तत्काल ज़रूरत वाले चार-पांच प्रकार के सहायता के विषय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समन्वय चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार इनमें से कुछ सहायता पहले ही मिल चुकी है और कुछ मिलने की प्रक्रिया में हैं।

परराष्ट्र मंत्रालय के प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्री ने बताया, “खोज और उद्धार के लिए ‘टनल टीम’, जीवित व्यक्तियों के फंसे होने की स्थिति में संकेत खोजने वाला ‘स्कैनर’, तुरंत डीएनए विश्लेषण के लिए ‘फोरेंसिक’ तकनीक, शवों के लिए ‘फ्रीजर’ और बेलिब्रिजों की व्यवस्था शुरू के दिन से ही समन्वय किया जा रहा है।”

भोटेकोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं के सुरंगों में कई कामगार फंसे होने का अनुमान है।

सरकार के विदेशी विशेषज्ञ सहायता नहीं लेने के कारण कई लोगों की जान जोखिम में पड़ने की आलोचना करते हुए कुछ लोग हैं, लेकिन मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे असत्य बताया।

प्रवक्ता क्षेत्री ने कहा, “सरकार ने शुरू में सहायता नहीं मांगी, यह कहा जा रहा था, लेकिन चीन और भारत से आए विशेषज्ञ दल प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।”