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ट्रम्प ने ज़ेलेंस्की से रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमला रोकने का आग्रह किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन से रूस के अंदर स्थित डीजल रिफाइनरियों पर हमले को तुरंत रोकने का आग्रह किया है। ट्रम्प का आरोप है कि यूक्रेनी हमलों के कारण विश्वव्यापी डीजल की गंभीर कमी उत्पन्न हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी मिसाइल युद्ध के दौरान, यूक्रेन लगातार रूसी तेल एवं गैस बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है। विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक रूस ने यूक्रेनी हमलों के कारण अपनी ईंधन उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता में भारी कमी देखी है।

आइरिस ओपन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रम्प ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से रूसी डीजल उत्पादन के मुख्य केंद्रों पर हमले को रोकने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘ज़ेलेंस्की को एक काम करना होगा – रूस में डीजल ईंधन को नष्ट होने से रोकना होगा। वहां हमले के लिए कई अन्य लक्ष्य मौजूद हैं।’ ट्रम्प ने विश्वव्यापी डीजल संकट का मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध को बताया। यूक्रेन का तर्क है कि रूसी तेल और गैस उद्योग मॉस्को की युद्ध की मुख्य आर्थिक धुरी है, इसलिए इसे ध्वस्त करना अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

यूक्रेनी सेनाओं ने हाल ही में रूस के टाटारिस्तान में स्थित प्रमुख तानेको रिफाइनरी पर सफल हमला किया था, जिसमें दो सामान्य नागरिकों की मृत्यु हुई थी। इसके जवाब में रूस ने भी यूक्रेन के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर हमले तेज कर दिए हैं। अप्रैल से अब तक कम से कम २४६ यूक्रेनी पेट्रोल पंप रूसी निशाने पर आ चुके हैं। अमेरिकी डीजल की कीमत अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। फरवरी से अमेरिकी डीजल की कीमत में ६५ प्रतिशत वृद्धि हुई है, जो प्रति गैलन ६.२० डॉलर हो गई है।

विश्लेषक क्रिस बिचम्प ने यूक्रेनी हमलों के उद्देश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘फिलहाल इसका मुख्य प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ा है, जो रूसी राष्ट्रपति पर आंतरिक दबाव बढ़ाने के लिए एक रणनीति है।’ हालांकि, विश्वव्यापी ईंधन संकट के पीछे केवल यूक्रेनी हमले ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां भी एक प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा मामलों के वरिष्ठ प्रोफेसर एंड्रियास क्रिग ने कहा, ‘इज़राइल युद्ध विश्वव्यापी डीजल आपूर्ति पर एक बड़ा प्रणालीगत झटका है। यूक्रेनी रिफाइनरी अभियान भी एक महत्वपूर्ण दबाव है, लेकिन यह खाड़ी क्षेत्र में हुए व्यवधान के ऊपर जुड़ा हुआ है।’