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अध्ययन में पाया गया कि वायु प्रदूषण से आत्महत्या का जोखिम बढ़ता है

क्वीनस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट ने 29 विभिन्न अध्ययनों का विश्लेषण करते हुए चेतावनी दी है कि पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों के संपर्क में आने से आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास और आत्महत्या के विचारों में वृद्धि हो सकती है। इस शोध में यह भी बताया गया है कि लंबे समय तक नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क में रहने से भी जोखिम बढ़ता है, जबकि वैश्विक स्तर पर हर वर्ष 7 लाख 20 हजार से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं।

वाहन और जीवाश्म ईंधन से उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण को आत्महत्या के जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारण के रूप में पहचाना गया है। क्वीनस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के शोधकर्ताओं ने 29 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण कर पुष्टि की है कि छोटे और लंबे समय तक पीएम 2.5 के संपर्क में रहना आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास और आत्महत्यात्मक विचारों के जोखिम को बढ़ाता है।

शोधकर्ताओं ने कहा, ‘ये निष्कर्ष आत्महत्या निवारक गतिविधियों में पर्यावरणीय प्रभावों को जोखिम कारक के रूप में मान्यता देने और सुझावित आवश्यक सुधारों की ओर इंगित करते हैं।’ हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इन परिणामों की व्याख्या सतर्कता से करने का आग्रह करते हैं। कार्टिन यूनिवर्सिटी के सह-अध्यাপক अलेक्जेंडर लारकॉम्ब ने कहा, ‘प्रस्तावित सिद्धांत जैविक रूप से मनगढ़ंत नहीं है, लेकिन अध्ययन प्रदूषण के सीधे तौर पर आत्महत्या का कारण बनने का प्रमाण प्रदान नहीं करता।’