अमेरिका की उदार लोकतंत्र से ‘इलेक्टोरल डेमोक्रेसी’ की ओर तीव्र गिरावट में प्रेस स्वतंत्रता पर हमले का प्रभाव
समाचार की संपादकीय समीक्षा पर आधारित भी-डेम इंस्टिट्यूट की २०२६ लोकतंत्र रिपोर्ट में अमेरिका के लोकतंत्र सूचकांक में गिरावट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्तर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में अमेरिका समेत ४३ अन्य देशों का निरंकुशता की ओर बढ़ना बताया गया है, साथ ही विश्व के पाँच सबसे जनसंख्या वाले देशों—भारत, चीन, इंडोनेशिया और पाकिस्तान—को निरंकुश शासन में वर्गीकृत किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि ट्रम्प प्रशासन ने मीडिया, शिक्षा क्षेत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर गंभीर प्रहार किए हैं, जबकि न्यायालय निरंकुश कार्रवाइयों को रोकने में सक्षम हो सकता है। १ असोज, काठमाडौं। स्वीडन स्थित भी-डेम इंस्टिट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का लोकतंत्र सूचकांक निरंतर गिरावट पर है। प्रमुख लोकतंत्र विशेषज्ञ इस रिपोर्ट में कहते हैं, “आधुनिक इतिहास में अमेरिका का लोकतंत्र इतनी तेजी से गिरता हुआ पहले कभी नहीं देखा गया।” संस्थान ने अमेरिका में मीडिया और विपक्षी आवाज़ों को दबाने के लिए दबाव और धमकियों को लोकतंत्र के पतन के प्रमुख कारणों के रूप में चिन्हित किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्तर अमेरिका में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। भी-डेम की २०२६ वार्षिक ‘डेमोक्रेसी रिपोर्ट’ में अमेरिका और अन्य ४३ देशों के निरंकुशता की तरफ झुकाव का उल्लेख है। २०२ देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों के आधार पर यह ‘लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स’ तैयार करता है। इस वर्ष की रिपोर्ट नागरिकों के लिए निरंकुशता की लगातार बढ़ती चुनौती को चिंताजनक चित्र में प्रस्तुत करती है। भी-डेम विश्वविद्यालय गोथेनबर्ग में स्थित है और इसे यूरोपीय आयोग, विश्व बैंक तथा अन्य संस्थान आर्थिक रूप से समर्थन प्रदान करते हैं। दक्षिणपंथी आलोचक इस संस्थान को ‘सोरोस-फंडेड’ बताकर आलोचना करते हैं। भी-डेम के मूल्यांकन में विश्व के पाँच सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में भारत, चीन, इंडोनेशिया और पाकिस्तान निरंकुश शासन में शामिल हैं। पाँचवाँ देश अमेरिका है, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में अपनी ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ की स्थिति खोकर ‘इलेक्टोरल डेमोक्रेसी’ में सीमित हो गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, ट्रम्प के पहले कार्यकाल ने इस बदलाव की नींव रखी थी जबकि दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रपति पद के केंद्रीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। उन्होंने बताया कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा घट गई है और रिपब्लिकन नियंत्रण वाली विधान सभा ने विधायकी नियंत्रण को कम किया है। भी-डेम रिपोर्ट में मीडिया सेंसरशिप को निरंकुश शासकों का प्रमुख उपकरण बताया गया है। इस वर्ष की रिपोर्ट में निरंकुशता की ओर बढ़ने वाले देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार कमजोर पड़ने वाला पहला क्षेत्र बताया गया है। अमेरिका और लगभग ४० अन्य देशों में मीडिया में ‘स्वयं सेंसरशिप’ एक बड़ी समस्या बन चुकी है। ट्रम्प नियमित रूप से समाचार संस्थाओं और अन्य निकायों पर उनके खिलाफ पूर्वाग्रह का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अभी भी कई अन्य देशों से बेहतर बनी हुई है। रिपोर्ट में ट्रम्प प्रशासन द्वारा मीडिया, शिक्षा क्षेत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर किए गए हमलों के प्रभावों को भी उजागर किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि अदालतें और सर्वोच्च न्यायालय ट्रम्प प्रशासन की निरंकुश कार्रवाइयों को चुनौती देने और उन्हें रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





