Skip to main content

क्या AI मानवता का अंत कर सकता है? विशेषज्ञों ने खतरे की ओर इशारा किया

एआई विकास की तेज़ रफ्तार और इसके मानव सभ्यता पर पड़ने वाले संभावित खतरों को लेकर विश्वभर में व्यापक चर्चा हो रही है और उच्च स्तर पर इस विषय पर विचार-विमर्श की मांग बढ़ रही है। तकनीकी क्षेत्र के शीर्ष वैज्ञानिक, उद्यमी और नीति निर्माता एआई के कारण संभावित तात्कालिक एवं दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। एक ओर AI को मानव जीवन को सरल बनाने वाला बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर इसके पूरे मानव जाति के अस्तित्व को समाप्त करने की संभावना को लेकर चेतावनी भी दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, हाल के दिनों में AI सुरक्षा से जुड़ी गंभीर दावे सार्वजनिक हुए हैं। AI के चलते मानव विनाश का खतरा 10 प्रतिशत तक हो सकता है, AI आणविक हथियारों से भी अधिक खतरनाक हो सकता है और इसके बोटनेट से पूरी इंटरनेट प्रणाली ठप्प हो सकती है जैसे चेतावनियां सामने आई हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इन दावों को बड़े तकनीकी निगमों की व्यावसायिक रणनीति या अतिशयोक्ति के रूप में विश्लेषित किया है।

AI अनुसंधान कम्पनी एन्थ्रोपिक के CEO दारियो अमोदेई ने 12 सितंबर को गंभीर चेतावनी दी थी। उनके अनुसार आगामी 6 से 12 महीनों के भीतर AI का नया स्वरूप बोटनेट के माध्यम से पूरे इंटरनेट सिस्टम को नियंत्रित कर सकता है, जिससे अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है। लेकिन न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और AI विश्लेषक ग्यारी मार्कस ने इस दावे पर संपूर्ण भरोसा करने से इनकार किया। उनके विचार में इतनी आसानी से इंटरनेट प्रणाली को खतरे में डालना तर्कसंगत नहीं है, और यह संभवतः तकनीकी प्रयोगशालाओं की गंभीर लापरवाही के बिना नहीं हो सकता।

पी(डूम) की चर्चा में एन्थ्रोपिक के एलाइनमेंट साइंस प्रमुख इवान हबिंगर ने 9 सितंबर को कहा था, ‘AI के अगले दशक में मानवता को नष्ट करने की संभावना 10 प्रतिशत से अधिक है।’ हालांकि, AI नाउ इंस्टीट्यूट की प्रमुख वैज्ञानिक हाइडी खलाफ जैसी विशेषज्ञ इस तरह के प्रतिशतात्मक अनुमानों पर संशय व्यक्त करती हैं। वह कहती हैं, ‘इस तरह के दावे न तो जांचे जा सकते हैं, न प्रमाणित। इसलिए इन्हें वैज्ञानिक दृष्टि से स्वीकार नहीं किया जा सकता।’

विश्व के धनाढ्य व्यक्तित्वों और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने 10 सितंबर को AI जोखिम पर हो रही अत्यधिक चर्चा को एक नियोजित साइअप (मनोवैज्ञानिक रणनीति) बताया। मस्क के अनुसार, बड़े AI कंपनियां सरकार से कड़े नियंत्रण का आग्रह इसलिए करती हैं ताकि वे नए और छोटे प्रतिस्पर्धी कंपनियों को बाजार में प्रवेश करने से रोक सकें। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स ने भी कहा है कि बड़े AI कंपनियों का सरकार से नियंत्रण की मांगना अजीब है और यह किसी ट्रोजन हॉर्स जैसा प्रतीत होता है।

ब्रिटेन के पूर्व रक्षा मंत्री डेस ब्राउन ने 7 सितंबर को कहा था, ‘सुपरइंटेलिजेंट AI आणविक हथियार जितना या उससे भी अधिक घातक हो सकता है।’ लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार का सुपरइंटेलिजेंट AI अभी तक अस्तित्व में नहीं आया है। AI फ्यूचर्स प्रोजेक्ट के अनुसार दिसंबर 2028 से पहले ऐसा AI आने की संभावना नहीं है और ओपनAI के सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि इसके लिए 2035 तक का समय लग सकता है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने 8 सितंबर को कहा, ‘अगर AI की रेस में चीन बढ़त बनाता है तो यह अमेरिका के लिए अपूरणीय क्षति होगी।’ यह तर्क AI को शीत युद्ध कालीन आणविक हथियारों की तरह निर्णायक अस्त्र के रूप में प्रस्तुत करता है। एन्थ्रोपिक के अमोदेई ने भी कहा कि चीन की बढ़त विश्व के लिए खतरा बन सकती है।

–गार्डियन से