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डेनमार्क ने उत्तरी सागर में कार्बन भंडारण प्रक्रिया शुरू की

डेनमार्क ने उत्तरी सागर में समुद्री सतह के नीचे कार्बनडाइऑक्साइड भंडारण करने वाली ‘ग्रीन्सैंड’ परियोजना का शुभारंभ किया है। ऊर्जा समूह आईएनईओएस ने ग्रीन्सैंड को यूरोपीय संघ का पहला पूर्ण क्षमता वाला कार्बनडाइऑक्साइड भंडारण स्थल बताया है। परियोजना के पहले चरण में निनी वेस्ट के पुराने तेल प्लेटफॉर्म के नीचे प्रति वर्ष चार लाख टन कार्बनडाइऑक्साइड संग्रहित की जाएगी।

२ अक्टूबर, कोपेनहेगन (रासस/एएफपी) – डेनमार्क ने उत्तरी सागर में समुद्री सतह के नीचे कार्बनडाइऑक्साइड भंडारण की सुविधा शुरू की है। आईएनईओएस के मुख्य कार्यकारी डेविड बकनल ने ग्रीनसैंड को यूरोपीय संघ (ईयू) का पहला पूर्ण क्षमता वाला कार्बनडाइऑक्साइड भंडारण स्थल बताया है। उनके अनुसार, यह यूरोप भर में ऐसी परियोजनाओं को विस्तार देने के लिए एक आधार तैयार करेगा।

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने सीमेंट और स्टील जैसे उद्योगों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस) तकनीक को प्रभावी उपाय के रूप में मान्यता दी है। हालांकि, यह तकनीक जटिल और महंगी मानी जाती है। डेनमार्क के पश्चिमी तट से लगभग २०० किलोमीटर दूर स्थित ग्रीन्सैंड के भंडारण स्थल निनी वेस्ट के पुराने तेल प्लेटफॉर्म के नीचे है।

आईएनईओएस ने वर्ष २०३० तक इस क्षमता को बढ़ाकर वार्षिक ४० लाख से ८० लाख टन तक पहुंचाने की योजना बनाई है। कार्बनडाइऑक्साइड मुख्यतः डेनमार्क के बायोमीथेन उत्पादन केंद्रों से संकलित कर तरल रूप में एस्बेर्ज़ बंदरगाह से जहाजों के माध्यम से भंडारण स्थल तक पहुंचाई जाएगी। यूरोपीय संघ ने नेट-जीरो उद्योग कानून के अंतर्गत वर्ष २०३० तक वार्षिक कम से कम पांच करोड़ टन कार्बनडाइऑक्साइड भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले, पड़ोसी नॉर्वे की ‘नॉर्दर्न लाइट्स’ परियोजना ने अगस्त २०२५ में समुद्र की तलहटी में स्थित चट्टानी परतों में कार्बनडाइऑक्साइड भंडारण शुरू किया था।