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नेपाल के इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा सस्ते पैकेज बंद करने से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला प्रभाव

नेपाल की निजी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों ने सोमवार से सस्ते और कम गति वाले इंटरनेट पैकेज बंद करने का निर्णय लिया है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर सीधे प्रभाव पड़ने की संभावना है। इंटरनेट सेवा प्रदाता संघ ने महंगाई सहित विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए यह कदम उठाने की आवश्यकता बताई है। सस्ते पैकेज बंद होने के बाद उपयोगकर्ताओं के पास महंगे पैकेज लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा, यह बात उपभोक्ता अधिकार संगठनों ने कही है। छात्रों से लेकर व्यवसायियों तक यह बदलाव प्रभावित करेगा, इसलिए ऐसे आकस्मिक निर्णय को अनुचित बताया जा रहा है।

सरकारी स्वामित्व वाली नेपाल टेलिकॉम के प्रवक्ता ने कहा है कि ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा के शुल्क में फिलहाल कोई तत्काल परिवर्तन करने की योजना नहीं है। इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के छतरी संगठन ने सस्ते दरों पर मिलने वाले पैकेज हटाने का मुख्य कारण मूल्य वृद्धि बताया है। संघ के अध्यक्ष सुधीर पराजुली ने जारी विज्ञप्ति में कहा, “पिछले वर्ष की मूल्यवृद्धि, मध्यपूर्व के तनाव के कारण इंधन की कीमतों में वृद्धि, फाइबर की महंगाई, उच्च मुद्रास्फीति और एआई तकनीक में तेज विकास के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और चिपसेट की कीमतों में अचानक वृद्धि हुई है।”

हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा कर क्षेत्र में बड़े करदाता कार्यालय के खिलाफ दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया है। अदालत के फैसले और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों के इस नए निर्णय के बीच संबंध समझने के प्रयास में संघ के पदाधिकारी फोन नहीं उठा रहे हैं। वहीं, उपभोक्ता अधिकार संगठनों ने इंटरनेट सेवा प्रदाता के इस निर्णय की निंदा की है। उपभोक्ता हित संरक्षण मंच के महासचिव विष्णुप्रसाद तिमिल्सिनाले इसे सूचना पहुँच में और अधिक बाधा के रूप में देखा है।