
२० असोज, वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बढ़ते डिजल के दामों को नियंत्रित करने के लिए ‘रेड–डाइड डिजल’ (लाल रंग की डिजल) वाहनों पर भी कर में छूट देने की नई व्यवस्था की है। ट्रम्प ने सोमवार रात को इस निर्णय को कार्यकारी आदेश के जरिए लागू किया। आदेश के अनुसार, ‘ऑफ-रोड’ उपयोग के लिए मिलने वाली कर छूट वाली लाल डिजल को अस्थायी रूप से राजमार्ग पर चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। अमेरिका में लाल रंग की डिजल और सामान्य डिजल का ईंधन गुणवत्ता समान है, लेकिन लाल डिजल पर संघीय ईंधन कर नहीं लगता। यह डिजल मुख्यतः ट्रैक्टर, निर्माण उपकरण और अन्य ऑफ-रोड कार्यों के लिए प्रयुक्त होती है। नेब्रास्का में चुनावी रैली के दौरान ट्रम्प ने कहा कि इस निर्णय से ट्रक ड्राइवरों, किसानों और आम उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलेगी। कर छूट वाली डिजल के उपयोग में वृद्धि से खाद्यान्न सहित विभिन्न वस्तुओं के परिवहन लागत में भी कमी आएगी, उनका दावा है।
अमेरिका में सड़क पर चलने वाले डिजल पर प्रति गैलन २४.४ सेंट संघीय कर लगता है। इसके अतिरिक्त राज्यों के अनुसार भी कर लगते हैं, जिनका औसत ३५.५ सेंट प्रति गैलन है, यह संघीय आँकड़ों में दर्ज है। डिजल के दामों में हाल के समय अत्यधिक उछाल आया है। AAA के अनुसार, इरान युद्ध के पहले डिजल की कीमत प्रति गैलन ३.७६ डॉलर थी, जबकि २२ सितंबर को यह ६.५३ डॉलर तक पहुंच गई थी। सोमवार को इसका राष्ट्रीय औसत ६.३२ डॉलर प्रति गैलन रहा। १८ पहियों वाले ट्रक में २५० गैलन डिजल भरने पर लगभग १,५७५ डॉलर खर्च होता है। कर मुक्त डिजल का उपयोग करने से लगभग १५० डॉलर तक की बचत संभव है। इससे पहले टेक्सास, ओक्लाहोमा और अलाबामा सहित १० राज्यों ने राजमार्गों पर चलने वाले वाहनों के लिए कर छूट वाली डिजल उपयोग को सहज बनाने के प्रयास किए हैं। २३ सितंबर से २ अक्टूबर तक जारी इस कदम से इन १० राज्यों में कुल अमेरिकी डिजल बिक्री का लगभग एक तिहाई हिस्सा कवर होगा, बताया गया है।
फिर भी, ईंधन बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का फैसला डिजल की मुख्य समस्या का समाधान नहीं करेगा। पेट्रोलियम विश्लेषक पैट्रिक डी हान के अनुसार, “कार्यान्वयन जटिल है।” कर छूट वाली डिजल की पहुंच बढ़ाना आसान नहीं होगा क्योंकि ट्रक विभिन्न राज्यों से गुजरते हैं और हर राज्य के नियम अलग होते हैं, जो कार्यान्वयन को जटिल बनाएंगे। उन्होंने कहा, “यह कोई स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन राजनीतिक नेताओं के लिए थोड़ी सफलता दिखाने का अवसर हो सकता है।” अमेरिका में इस वर्ष डिजल के दाम लगभग ७७ प्रतिशत बढ़ चुके हैं। हाल ही में दामों में २० सेंट की गिरावट आई है, फिर भी यह २००० से AAA द्वारा रखे जा रहे रिकॉर्ड में सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि की ओर अग्रसर है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजल के दाम बढ़ने का मुख्य कारण क़र नहीं बल्कि विश्वव्यापी रिफाइनरी की कमी है। मध्य पूर्व और रूस की रिफाइनरी युद्ध के कारण प्रभावित हुई हैं, जबकि चीन ने घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो इससे रोकने के लिए निर्यात कम किया है। अमेरिकी रिफाइनरियां इस वैश्विक कमी को पूरा करने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन वे अधिकतम क्षमता पर चल रही हैं और तत्काल उत्पादन बढ़ाना संभव नहीं है। लिपोव ऑयल एसोसिएट्स के अध्यक्ष एंडी लिपोव के अनुसार, कर हटाने से अल्पावधि में उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन ईंधन की कमी की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
इसी बीच, यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरी पर हमले तेज करने का संकेत दिया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि वे रूस की तेल प्रसंस्करण सुविधाओं पर निरंतर हमले जारी रखेंगे। इससे दुनिया के बाजारों में डिजल और अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर और दबाव पड़ सकता है। ट्रम्प ने कहा है कि डिजल के मूल्य जल्द कम होंगे। कार्यकारी आदेश कब तक लागू रहेगा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई है कि लंबी अवधि तक इसका अतिरिक्त उपयोग आवश्यक नहीं होगा।





