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लेखक: space4knews

सर्वोच्च अदालत का आदेश: दीपक खड्के की गिरफ्तारी और हिरासत अवधि बढ़ाने में कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन, तत्काल मुक्त करने का निर्देश

३ वैशाख, काठमाडौं । सर्वोच्च अदालत ने संपत्ति शुद्धिकरण एवं राजस्व चुहावट जांच के दौरान हिरासत में लिए गए पूर्व सचिव दीपक खड्के की गिरफ्तारी और हिरासत अवधि बढ़ाने में कानूनी प्रक्रिया का सही पालन न होने का निर्धारण करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल एवं न्यायाधीश श्रीकांत पौडेल की संयुक्त पीठ ने खड्के की हिरासत को लेकर ‘‘उचित विधि व प्रक्रिया’’ पूरी न करने के कारण बन्दी प्रत्यक्षीकरण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने आदेश में कहा है, ‘निर्दिष्ट सिद्धांतों के अनुसार निवेदक की हिरासत के दौरान प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। गिरफ्तारी वारंट और हिरासत का विस्तार कानूनी मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। मृतक के दावे पर आधारित जांच स्थिति में, जांच हिरासत के बाहर भी संभव है, अतः संबंधित न्यायालय की अनुमति लेकर ही विदेश यात्र हेतु अनुमति दी जाए और तत्काल निरुद्ध को मुक्त किया जाए।’

गिरफ्तारी और हिरासत अवैध क्यों माना गया? अदालत ने खड्के की गिरफ्तारी और हिरासत अवधि विस्तार में हुई प्रमुख कानूनी त्रुटियों को स्पष्ट किया है। पुलिस द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट का दुरुपयोग कर गिरफ्तारी की गई है। अदालत का मानना है कि गिरफ्तारी वारंट केवल तब जारी किया जाना चाहिए जब प्रतिवादी भागने या साक्ष्य नष्ट करने का स्पष्ट खतरा हो, जो इस मामले में अनुपालित नहीं हुआ। जिला अदालत द्वारा वारंट को मान्यता देते समय आधारहीनता भी पाई गई है। संपत्ति शुद्धीकरण विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में खड्के के खिलाफ कोई आपराधिक अभिलेख विरोधाभासी नहीं पाया गया और अब तक कोई दायित्व सिद्ध नहीं हुआ। फैसले में कहा गया है कि आरोप तय न होने की स्थिति में हिरासत उचित नहीं है।

सर्वोच्च ने हिरासत अवधि बढ़ाने में बिना खड्के को अदालत में उपस्थित कराए अनुमति देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। राजस्व जांच विभाग ने ललितपुर जिला अदालत से हिरासत अवधि बढ़ाते समय अभियुक्त की उपस्थिति नहीं कराई और हिरासत में रखने वाले पक्ष को भी इस जानकारी से अवगत नहीं कराया गया। हिरासत के लिए कोई ठोस आधार नहीं था, यह सर्वोच्च का अभिप्राय भी है। हिरासत अवधि विस्तार करते समय हिरासत बनाए रखने हेतु आवश्यक आधार आदेश में सम्मिलित नहीं थे। राजस्व चुहावट कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी का दावा था, लेकिन खड्के का बयान नहीं लिया गया और कानून की धारा १३ के तहत गिरफ्तारी का कोई प्रमाण नहीं मिला। अदालत ने कहा है कि खड्के के विरुद्ध मामला हिरासत के बाहर भी जांच योग्य है। राजस्व चुहावट कानून के नवीनतम संशोधन में जुर्माना देकर समाधान करने की भी व्यवस्था की गई है, जिस पर विशेष ध्यान दिया गया। सर्वोच्च ने आदेश दिया है कि खड्के को तुरंत रिहा किया जाए और विदेश यात्रा केवल अदालत की अनुमति से ही संभव हो।

कसले कसको अधिकार मिच्यो ? – Online Khabar

किसने किसका अधिकार मारे?

समाचार सारांश

  • धनगढी उपमहानगरपालिकाले वैशाख ४ से विद्यार्थी भर्ना अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।
  • संघीय सरकार ने वैशाख १५ से भर्ना और वैशाख २१ से पढ़ाई शुरू करने के निर्देश दिए थे।
  • संविधान ने कक्षा १२ तक की शिक्षा से संबंधित सभी निर्णयों का अधिकार स्थानीय सरकार को दिया है।

३ वैशाख, काठमांडू। धनगढी उपमहानगरपालिकाले वैशाख ४ से विद्यार्थियों के भर्ना अभियान चलाने का निर्देश दिया है। जबकि संघीय सरकार ने वैशाख १५ से भर्ना और वैशाख २१ से पढ़ाई शुरू करने का आदेश दिया था।

धनगढी के मेयर गोपाल हमाल ने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए भर्ना शुरू करने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा, ‘छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए पुरानी कैलेंडर के अनुसार भर्ना कर रहे हैं,’ मेयर हमाल ने कहा, ‘कक्षा १२ तक की शिक्षा स्थानीय सरकार के एकल अधिकार में आती है।’

यह पहली पालिका नहीं है जो संघीय सरकार के निर्देश का पालन नहीं कर रही है। रुपन्देही के तिलोत्तमा, प्युठान के झिमरुक, तनहुँ के आँबुखेरनी, बन्दीपुर सहित कई पालिकाओं ने भी पहले ही भर्ना शुरू कर दिया है।

पालिका प्रमुखों का कहना है कि संघीय सरकार ने असंवैधानिक निर्देश दिया है और समय पर पढ़ाई शुरू न करने से कोर्स पूरा नहीं हो पाएगा।

गांवपालिकाओं के छाता संगठन, राष्ट्रीय गांवपालिका महासंघ ने भी इस मुद्दे पर संघीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर विरोध जताया है। महासंघ की अध्यक्ष लक्ष्मी पांडे ने बताया कि उन्होंने शिक्षा मंत्री को विरोध पत्र सौंपा है।

नवलपुर के हुप्सेकोट गांवपालिका अध्यक्ष भी रही पांडे कहती हैं, ‘संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उल्लंघन करने का अधिकार संघीय सरकार को नहीं है।

संविधान द्वारा तय संयुक्त अधिकारों में समन्वय से काम करेंगे। परीक्षा कब लेनी है? भर्ना कब करनी है? कक्षा कब चलानी है? जैसे निर्णय पालिका अपने स्तर पर लेती है।’

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र (बालेन) शाह के नेतृत्व वाली सरकार के स्वीकृत शासकीय सुधार कार्यसूची के कई निर्णय संविधान और संघीयता के विरुद्ध हैं।

कार्यसूची के एक बिंदु में संघ, प्रदेश तथा स्थानीय स्तर की संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण के राष्ट्रीय मानक १५ दिनों के भीतर तैयार कर स्वीकृत करने कहा गया है।

लेकिन उसी कार्यसूची के एक अन्य बिंदु में स्थानीय सरकार के एकल अधिकार वाले शिक्षा विषय पर संघीय सरकार ने स्वयं निर्णय ले लिया है।

सरकार ने निर्णय किया है कि कक्षा ५ तक के विद्यार्थियों के लिए आंतरिक परीक्षा अगले शैक्षिक सत्र से बंद की जाएगी।

स्थानीय तह

शिक्षाविद् डॉ. विद्यानाथ कोइराला कहते हैं कि अवधारणात्मक रूप से परीक्षा न लेने का फैसला सही है, लेकिन इसका कार्यान्वयन और प्रक्रिया ठीक नहीं हुई। वे कहते हैं, ‘सोचने के दृष्टिकोण से यह निर्णय ठीक है, लेकिन अभ्यास और प्रक्रिया में सुधार की जरूरत थी।’

संविधान ने कक्षा १२ तक की शिक्षा से संबंधित सभी निर्णयों का अधिकार स्थानीय सरकार को दिया है। संविधान की अनुसूची-८ के अनुसार, आधारभूत और माध्यमिक शिक्षा स्थानीय सरकार के एकल अधिकार में आती है।

नेपाल नगरपालिका संघ के महासचिव नरूलाल चौधरी संघीय सरकार से निर्णय करते समय संवैधानिक प्रावधानों का पालन करने का सुझाव देते हैं। वे कहते हैं, ‘संविधान के तहत दिए गए एकल अधिकारों के विषयों पर स्थानीय सरकार को ही निर्णय करना चाहिए, इसमें कोई विवाद नहीं है।’

‘प्रदेश और स्थानीय सरकारें संघीय सरकार के अधीन नहीं हैं। विज्ञापन यहां छापने देना या वहां नछापने देने का अधिकार संघीय सरकार को नहीं है।’ – मधेश प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत

सरकार ने संविधान और संघीयता के नियमों का उल्लंघन करते हुए एक और निर्णय लिया है। १८ चैत को प्रधानमंत्री एवं मन्त्रिपरिषद् कार्यालय ने सचिवस्तरीय निर्णय जारी कर प्रदेश और स्थानीय सरकारों को अपनी अधीनस्थ इकाइयों की तरह निर्देश दिए हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि ‘सरकारी निकायों द्वारा सार्वजनिक खरीद समेत सूचनाओं का प्रकाशन और प्रसारण केवल नेपाल सरकार, प्रदेश सरकार और स्थानीय तह या उनके अधीनस्थ निकायों द्वारा सरकारी संचार माध्यमों जैसे गोरखापत्र संस्थान, रेडियो नेपाल, नेपाल टेलिविजन के माध्यम से किया जाएगा।’

सार्वजनिक सूचना निजी संचार माध्यमों पर प्रकाशित या प्रसारित न करने का यह निर्णय सही है या गलत, इस पर बहस जारी है। संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से यह निर्णय गलत बताया जा रहा है।

मधेश प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत कहते हैं कि प्रदेश या स्थानीय सरकारों को निर्देश देने का अधिकार संघीय सरकार के पास नहीं है। राउत कहते हैं, ‘प्रदेश और स्थानीय सरकारें संघीय सरकार की अधीन नहीं हैं। विज्ञापन यहां छापना या वहां न छापने की अनुमति संघीय सरकार को नहीं है।’

मधेश प्रदेश सरकार ने जब राउत मुख्यमंत्री थे, तब अपने अधिकार छिनने के आरोप में संघीय सरकार के खिलाफ सर्वोच्च अदालत का रुख किया था।

उस समय दायर आधा दर्जन से अधिक मामले अभी विचाराधीन हैं। जिन फैसलों में प्रदेश ने जीत हासिल की है।

२३जेठ २०७६ को संघीय सरकार ने सागरनाथ वन विकास परियोजना को ‘दि टिम्बर कर्पोरेशन अफ नेपाल’ में मर्ज कर नेपाल वन लिमिटेड नामक कंपनी में पंजीकृत किया था।

हालांकि, वन अधिकार संविधान से प्रदेश को दिए गए हैं, बावजूद इसके संघीय सरकार ने हस्तक्षेप किया, जिसके कारण मधेश प्रदेश के उद्योग, पर्यटन, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया कि वन से संबंधित सभी अधिकार प्रदेश सरकार के होंगे। साथ ही संवैधानिक पीठ ने फैसला दिया कि वन संबंधी सभी अधिकार प्रदेश सरकार के होने चाहिए और इसके लिए संघीय सरकार राष्ट्रीय नीति बनाए।

राउत कहते हैं, ‘रास्वपा नेतृत्व वाली सरकार ने नए विचार लाने का दावा तो किया, लेकिन उनके कई निर्णय पुराने तरीकों जैसे ही हैं। संविधान द्वारा निर्धारित प्रदेश और स्थानीय सरकारों के अधिकार संघीय सरकार छीन नहीं सकती।’

संविधान की धारा ५६ द्वारा संघीय लोकतान्त्रिक नेपाल की मूल संरचना संघ, प्रदेश और स्थानीय तह, तीन स्तर में स्थापित की गई है। तीनों स्तरों के साझा और एकल अधिकार संविधान के अनुसूची में वर्णित हैं।

धारा ५७ की उपधारा २ में कहा गया है कि प्रदेश के एकल अधिकार के अंतर्गत सूचीबद्ध अधिकार संविधान और प्रदेश कानून के अनुसार उपयोग किए जाएंगे।

इसी प्रकार, उपधारा ४ के अनुसार स्थानीय सरकार अपने एकल अधिकार वाले विषयों को संविधान और ग्राम सभा या नगर सभा द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार लागू करेगी।

संविधान विशेषज्ञ डॉ. विपिन अधिकारी का कहना है कि संविधान के बाहर जाकर किसी के पास निर्णय लेने या निर्देश देने का अधिकार नहीं है।

वे कहते हैं, ‘प्रदेश या स्थानीय सरकार के पास कार्यपालक या प्रबंधकीय अधिकार हो सकते हैं, लेकिन नीति निर्माण का अधिकार संघीय सरकार को नहीं है।’

प्रादेशिक और स्थानीय सरकार के अधिकारों के विषय में कानून बनाने, प्रशासनिक निर्णय लेने, संरचना बनाने और नीतिगत क्षमता संबंधित प्रदेश या पालिका के पास होती है, डॉ. अधिकारी बताते हैं। वे कहते हैं, ‘संघीय सरकार का अधिकार वहीं तक सीमित रहना चाहिए, अन्यथा संघीयता खत्म हो जाएगी।’

सहकारीमा डेढ अर्बको अपचलन, समस्याग्रस्त घोषणा करने हेतु प्राधिकरण में बचतकर्ताओं की आग्रह

सहकारी बचतकर्ता संरक्षण राष्ट्रीय अभियान ने ११ सहकारी संस्थाओं को समस्याग्रस्त घोषित कर बचत वापसी हेतु राष्ट्रीय सहकारी नियमन प्राधिकरण को आवेदन दिया है। अभियान के अध्यक्ष कुशलभ केसी के अनुसार, इन सहकारी संस्थाओं में १ अरब ४८ करोड़ २२ लाख रुपये से अधिक बचत का अपचलन हुआ है और संचालक संपर्क में नहीं हैं। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. खगराज शर्मा ने स्पष्ट किया कि समस्याग्रस्त घोषण की प्रक्रिया दर्ता अधिकारी कार्यालय से फाइल प्राप्ति के बाद ही सुगम बनेगी और इसके लिए समन्वय आवश्यक है। ३ वैशाख, काठमाडौं।

सहकारी पीड़ितों ने अन्य एक दर्जन से अधिक सहकारी संस्थाओं को भी समस्याग्रस्त घोषित करने की मांग की है। बचतकर्ताओं ने अपनी राशि वापस पाने के लिए उन संस्थाओं को समस्याग्रस्त घोषित करने की आवश्यकता बताई है। गुरुवार को प्राधिकरण कार्यालय में असामान्य माहौल था जहां ११ सहकारियों के सैकड़ों बचतकर्ता व कुछ पुलिसकर्मी मौजूद थे। बचत वापसी में उत्पन्न समस्याओं के समाधान की मांग के साथ कैंसर पीड़ित भी प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे थे। इस उपस्थिति से यह उम्मीद जताई गई कि प्राधिकरण उचित समाधान देंगे, क्योंकि कई वर्षों से बचत वापस नहीं मिली है।

प्राधिकरण पहुंचे पीड़ित दल का नेतृत्व सहकारी बचतकर्ता संरक्षण राष्ट्रीय अभियान के अध्यक्ष कुशलभ केसी ने किया। उन्होंने इन संस्थाओं के बचतकर्ताओं के दस्तावेज एवं विवरण भी लिए। वे औपचारिक रूप से समस्याग्रस्त घोषित करने और बचत राशि फिर्ता करने की प्रक्रिया शुरू करने हेतु प्राधिकरण को फाइल सौंपने पहुंचे थे। अभियान ने पहले भी १७ सहकारी संस्थाओं को समस्याग्रस्त घोषित करने हेतु प्राधिकरण में आवेदन दिया था।

दिये गए आवेदन पर प्राधिकरण ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए इसे भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरीबी निवारण मंत्रालय को भेजा था। मंत्रालय ने प्रक्रिया पूरी न होने के कारण फाइल प्राधिकरण को वापस कर दी है। समस्याग्रस्त घोषण के मामले में मंत्रालय, विभाग, प्राधिकरण, प्रदेश एवं स्थानीय तह के बीच आवश्यक समन्वय की कमी के बारे में अध्यक्ष केसी ने बताया। सहकारी नियामक की भूमिका अधिक होने से समस्याएं और जटिल हो रही हैं। ‘‘जिन संस्थाओं में कोई संभावनाएं नहीं हैं उन्हें समस्याग्रस्त घोषित कर संचालकों की संपत्ति बेचकर बचतकर्ताओं की राशि लौटाने हेतु अनुरोध किया गया है, पर संबंधित संस्थान एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं,’’ उन्होंने स्पष्ट किया।

मुस्ताङ भन्सार कार्यालय ने पांच अरब 73 करोड़ 61 लाख रुपयों का राजस्व एकत्र किया

३ वैशाख, मुस्ताङ। नेपाल–चीन उत्तरी कोरला नाका पर स्थित लोमान्थाङ–१ न्हेचुङ में स्थित मुस्ताङ भन्सार कार्यालय ने चालू आर्थिक वर्ष के 31 भदौ से पूर्ण रूप से संचालन में आने के बाद पिछले सात महीनों में पांच अरब 73 करोड़ 61 लाख रुपये का राजस्व एकत्रित किया है।
उत्तरी कोरला नाका में स्थित मुस्ताङ भन्सार कार्यालय से इस अवधि में 12 अरब 22 करोड़ 76 लाख रुपये मूल्य के माल वस्तुएं चीन से आयात हुई हैं, मुस्ताङ भन्सार कार्यालय के प्रमुख रमेश खड्काले जानकारी दी। इसके साथ ही नेपाल से 20 करोड़ 55 लाख रुपये मूल्य के माल वस्तुएं चीन निर्यात की गई हैं।
पिछले साउन और भदौ में रसुवागढी और तातोपानी भन्सार कार्यालय बाढ़ और भूस्खलन के कारण बंद रहे, जिससे यहाँ के कोरला नाका से आयात/निर्यात में वृद्धि हुई, लेकिन हाल के समय में भन्सार प्रमुख रमेश खड्काले बताया कि आयात/निर्यात की मात्रा घट गई है। मुस्ताङ भन्सार कार्यालय से अब तक कोरला नाका के माध्यम से चीन से कुल 2,347 विद्युत इलेक्ट्रॉनिक (EV) वाहनों का भन्सार जांच-पास हुआ है। साथ ही चीन से नेपाल में 1,818 माल परिवहन कंटेनरों की भन्सार जांच-पास की गई है। नेपाल से घरेलू उत्पाद एवं हस्तशिल्प सामग्री लदे 137 मालवाहक कंटेनर मुस्ताङ भन्सार कार्यालय में जांच-पास किए गए हैं, कार्यालय प्रमुख खड्काले बताया।
कोरला नाका के पूर्ण संचालन के बाद मुस्ताङ कार्यालय में आयात-निर्यात का कारोबार व्यापक रूप से बढ़ा है। कोरला नाका के माध्यम से नेपाल के व्यापारिक कंपनियाँ चीन से विद्युत सवारी वाहन, वस्त्र, कॉस्मेटिक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आयात कर रही हैं।

कसरी चल्दैछ बालेन सरकार, कति मिलेको छ रविसँग तालमेल ?

बालेन सरकार कैसे आगे बढ़ रही है, रवि के साथ तालमेल कैसा है?

३ वैशाख, काठमांडू । रास्वपा के चुनाव अभियान के दौरान वरिष्ठ नेता बालेन शाह भोजन करते समय अक्सर सभापति रवि लामिछाने का देर तक इंतजार करते थे। रवि भी जब टीम खाना खत्म कर लेती थी तब प्रधानमंत्री उम्मीदवार बालेन का इंतजार करते थे।

१२ फागुन को इटहरी के चुनाव सभा में भी ऐसा ही हुआ। कोशीटप्पू में पक्षी देख कर वापस लौटते समय बालेन को रवि भूखा पाया गया। रास्वपा के एक उच्च स्रोत के अनुसार, खाना खाने के शिष्टाचार ने रवि–बालेन के संबंध को तय किया है, जो अब तक कायम है।

दुनिया भर के आम वास्तविकताओं में से एक यह है कि राजनीतिक रिश्ते राजनीतिक विज्ञान से अधिक मनोविज्ञान द्वारा निर्धारित होते हैं। इसलिए रास्वपा सभापति रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन शाह के बीच का रिश्ता कैसा होगा? पिछली सरकारों जैसे ओली–प्रचंड, गिरिजा–देउवा, माधव–ओली के संबंधों में रुचि रखने वालों के लिए ताजा जनादेश ने नई जिज्ञासा बढ़ाई है। साथ ही, पुराने संबंधों की गतिविधियां कम ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

गत पुस–माघ की संगीतपूर्ण शामों से शुरू हुई रवि–बालेन की कहानी है। रास्वपा एकता अभियान आगे न बढ़ पाने पर तत्कालीन काठमांडू मेयर बालेन अचानक देशविकास पार्टी खोलने की तैयारी करने लगे थे। जब रवि ने प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में बालेन को चुनने की अनुमति दी, उसी दिन से नेपाल के राजनीतिक इतिहास में नया अध्याय शुरू हुआ।

पिछले फागुन में हुए आम चुनाव में रवि ने बालेन को आगे बढ़ाकर दो तिहाई के करीब परिणाम दिलाए।

सरकार द्वारा पिछले लगभग तीन हफ्तों में किए गए कार्यों पर रवि न तो पूरी तरह संतुष्ट हैं और न ही असंतुष्ट। वे पार्टी सभापति की ‘अभिभावकीय भूमिका’ से सरकारी कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। बालेन द्वारा एकतरफा नेतृत्व करने की प्रारंभिक धारणा के बावजूद, रवि के विचार में यह उनका सर्वाधिकार नहीं बल्कि अग्राधिकार है।

इसका अपना एक संदर्भ है। उपसभामुख चयन से पहले रवि ने राप्रपाला उक्त पद का वादा किया था। संसदीय पक्ष में रवि, सरकारी पक्ष में बालेन को निर्णय लेने में अग्रणी माना गया था। हालांकि, बालेन पक्ष के प्रभुत्व के दौरान श्रम संस्कृति पार्टी की रूबी कुमारी ठाकुर के पक्ष में लॉबिंग करने से दोनों नेताओं के बीच तनावट आई, जिसे रवि की उदारता के कारण तुरंत सुलझा लिया गया।

मंत्री चयन के दौरान रवि चाहते थे कि डीपी अर्याल को गृह मंत्री बनाया जाए। लेकिन उच्च स्रोतों के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सुदन गुरुङ को गृह मंत्री बनाने का समर्थन किया, और बालेन के साथ होने के कारण रवि ने वापस हटना पसंद किया।

रवि के अनुसार, बालेन की टीम को काम करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, और यदि कुछ कमियां दिखें तो समझाइश की जानी चाहिए। उन्होंने कुछ मंत्रियों और नेताओं से कहा है, ‘यह मजबूत सरकार है, प्रधानमंत्री को काम करने दें।’

प्रधानमंत्री बालेन अपने निर्णयों में सभापति रवि से सलाह करते हैं। खासतौर पर वे रवि से मिलने या फोन पर रिपोर्टिंग करते हैं, निकट सूत्रों ने बताया।

‘निर्णय तो बालेन ही करेंगे, लेकिन रवि दाई के साथ समझदारी में सब कुछ हो रहा है,’ सचिवालय के एक सदस्य ने कहा, ‘पार्टी रवि दाई चलाएंगे, सरकार बालेन चलाएंगे, संसद डीपी अर्याल चलाएंगे, ऐसा हमारा समझौता है।’

रवि से जुड़े कुछ नेताओं ने मंत्री नियुक्ति और संसदीय दल की नियुक्तियों में बालेन द्वारा एकतरफा अधिकार लेने की शिकायत शुरू कर दी है। उन्होंने सभापति रवि से सरकार के कई कार्यों की निगरानी करने का आग्रह किया है। लेकिन रवि का कहना है कि फिलहाल यह उचित नहीं है।

‘प्रधानमंत्री मैं बना हूँ, मंत्री बनाते समय भी बालेन के लिए सहूलियत को ध्यान में रखता हूँ,’ रवि ने कहा, ‘पिछले समय में पार्टी ने सरकार को नियंत्रित करने की कोशिश की तो बिगड़ गया, इस बार ऐसा नहीं होगा। समस्या आई तो चर्चा करेंगे।’

बालेन प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने अधिकांश कार्य सिंहदरबार से कर रहे हैं। वे अक्सर रवि से सिंहदरबार या बूढ़ानीलकण्ठ के रवि के आवास पर ही मिलते हैं। सरकारी निवास में बालेन मुख्य सलाहकार कुमार बेन के अलावा अन्य से नहीं मिलते।

‘बालुवाटार, सिंहदरबार, पार्टी कार्यालय जैसी जगहों पर मिलने से बेहतर है घर पर बात करना, इसलिए प्रधानमंत्री को रवि दाई के घर में बात करना सहज लगता है,’ कुमार बेन ने कहा, ‘उन्होंने वहां तीन बार मुलाकात की है। संबंध बहुत सौम्य हैं।’

लेकिन रवि के एक भरोसेमंद सदस्य के अनुसार, बालेन चार बार रवि के निवास गए हैं, लेकिन रवि बालुवाटार नहीं गए हैं।

सिंहदरबार में अनावश्यक कड़ाई बरती जा रही है। पत्रकारों ने सामान्य विरोध भी व्यक्त किया है। लेकिन सचिवालय का कहना है – सिंहदरबार स्वयं प्रधानमंत्री के लिए भी जेल की तरह है। ‘बालुवाटार छोड़ते समय प्रधानमंत्री कहते हैं – एक जेल से दूसरे जेल की ओर जा रहा हूँ,’ बालेन की टीम ने बताया।

कुमार बेन उनके सबसे करीबी साथी और मुख्य रणनीतिकार हैं, जो प्रधानमंत्री बनने के बाद अनाथ पद पर मुख्या सलाहकार हैं। बेन ने कार्यालय को सूचित किया है कि उन्हें वेतन या सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है।

प्रधानमंत्री पद संभालते ही बालेन ने अपनी कार्यशैली में तेजी लाई है, जिसे रवि ने ‘खिल निकालने वाला वर्ष’ कहा है। कुछ मंत्री अपने मंत्रालयों में बालेन के सचिवालय के अनावश्यक दखल देने से असंतुष्ट हैं।

लेकिन रवि ने इसे सामान्य रूप से लेने को कहा है और कुछ मंत्रियों को इसका स्मरण कराया है, जो अनौपचारिक बातचीत में बताए गए हैं।

‘विदेश एवं वित्त मंत्रालय को छोड़कर सभी मंत्रालयों में प्रधानमंत्री सचिवालय सीधे हस्तक्षेप करता है, मंत्रियों के लिए अपने फैसले लेना मुश्किल हो जाता है,’ एक मंत्री ने शिकायत की, ‘जनता द्वारा चुने गए मंत्रियों को गैर-निर्वाचित टीम चलाए यह उचित नहीं।’

लेकिन बालेन के सचिवालय के अनुसार पिछला जनादेश बालेन के वादों के लिए आया है, इसलिए सभी मंत्रालयों और राज्य संस्थानों को सहयोग करना चाहिए। ‘हमें पता है अधिकांश मंत्रियों की अलग पहचान और कार्यक्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। अब हम सभी बालेन हैं, हम एक हैं, अलग नहीं।’

एक अन्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को सिंहदरबार में सभी मंत्रियों के निजी सचिवों की एक भेंट करवाई जिससे काम करने के तरीके सिखाए गए।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी मंत्रियों के निजी सचिवों को सिंहदरबार में एक अलग बैठक में कार्यशैली के बारे में अभिमुखीकरण दिया है। बालेन समानुपातिक सांसदों से चर्चा करते हुए, उनके कुछ टीम सदस्य मंत्रियों के निजी सचिवों को बेहतर कार्यक्षमता के उपाय सिखा रहे थे।

पिछले प्रधानमंत्रियों के विपरीत, जिन्हें सीधे सांसद और नेता कार्यकर्ता मिलने आते थे, बालेन ने यह परंपरा बदली है। वे पार्टी संबंधी विषयों पर केवल रवि से बातें करते हैं। संसदीय दल के संबंध में उपसभापति स्वर्णिम वाग्ले और डीपी अर्याल से बात होती थी, अब वाग्ले वित्त मंत्री और डीपी सभामुख हैं। अब बालेन को संसदीय दल के उपनेता गणेश पराजुली, प्रमुख सचेतक कविन्द्र बुर्लाकोटी और सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल तथा प्रकाशचन्द्र परियार के साथ समन्वय करना होगा।

‘वे पार्टी के मामलों में रवि दाई के अलावा किसी से बात नहीं करते, सांसदों से मिलने की जरूरत नहीं, कोई भी विधेयक, शिकायत या ध्यानाकर्षण डिजिटल माध्यम से देखते हैं, प्रधानमंत्री स्वयं डिजिटल निगरानी कर रहे हैं,’ सचिवालय के सदस्य ने कहा।

श्रम मंत्री दीपक साह को बर्खास्त करने के फैसले में भी बालेन के सचिवालय की मुख्य भूमिका थी, जो पार्टी के अंदर से शिकायत मिली थी। लेकिन मुख्य सलाहकार कुमार बेन ने स्वीकार किया कि प्रारंभिक विश्लेषण के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए सीसीटीवी फुटेज की जाँच के बाद निर्णय लिया गया।

‘सुनियोजित प्रशासन में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, उच्च पद पर रहने वालों को जिम्मेदार होना पड़ता है, झूठ बोलना स्वीकार्य नहीं है,’ बेन ने कहा, ‘श्रम मंत्री की बर्खास्तगी अभी तक की सबसे पारदर्शी कार्रवाई है।’

एडोबी ने ‘फायरफ्लाई एआई असिस्टेंट’ को किया सार्वजनिक

एडोबी ने पिछले अक्टूबर में ‘प्रोजेक्ट मूनलाइट’ के तहत प्रदर्शित अपने नए एआई सहायक को आधिकारिक तौर पर ‘फायरफ्लाई एआई असिस्टेंट’ के रूप में पेश किया है। यह असिस्टेंट एडोबी के विभिन्न एप्लिकेशन्स जैसे फोटोशॉप, एक्रोबेट, और एक्सप्रेस को एक साथ जोड़कर उपयोगकर्ताओं के जटिल कार्यों को सरलता से पूरा करने में मदद करेगा। यह एआई असिस्टेंट कुछ हफ्तों में सार्वजनिक बीटा परीक्षण के लिए उपलब्ध होगा।

इसके मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं: क्रॉस-एप टास्क, जिससे फायरफ्लाई, फोटोशॉप, प्रीमियर प्रो, लाइटरूम, इलस्ट्रेटर और एक्सप्रेस जैसे कई एप्लिकेशन में एक साथ कार्य करना संभव होगा। उपयोगकर्ताओं को केवल अपनी आवश्यकताएं व्यक्त करनी होंगी, बाकी काम एआई करेगा। इसमें स्मार्ट कंट्रोल और सुझाव देने की सुविधा भी शामिल है। उदाहरण के लिए, यदि आप वन के पृष्ठभूमि में फोटो संपादित कर रहे हैं, तो एआई स्लाइडर के माध्यम से पेड़ों या पत्तों की संख्या कम या ज्यादा करने का विकल्प देगा।

एडोबी के अनुसार, यह असिस्टेंट समय के साथ उपयोगकर्ता की रचनात्मक शैली और प्राथमिकताओं का अध्ययन करेगा और उसी के अनुसार कार्य सुझाव प्रदान करेगा। मल्टी-स्टेप ‘स्किल्स’ से सामाजिक मीडिया की सामग्री बनाने जैसे कई चरणों वाले कार्य स्वतः सुसंगठित होंगे। यह स्वचालित रूप से फोटो क्रॉपिंग, फाइल के आकार को समायोजित करने और विभिन्न प्लेटफॉर्मों के लिए फाइल सेव करने का काम भी संभालेगा। वीडियो संपादन में सुधार के लिए, फायरफ्लाई के वीडियो एडिटर में आवाज से अनावश्यक ‘नोइज़’ हटाना, संगीत और रंग समायोजन करना तथा एडोबी स्टॉक लाइब्रेरी से सीधे जुड़ने जैसी नई सुविधाएँ भी जोड़ी गई हैं।

एडोबी में एआई और नवाचार के उपाध्यक्ष अलेक्जेंड्रु कोस्टिन ने इस तकनीक पर चर्चा करते हुए कहा, “फायरफ्लाई एआई असिस्टेंट के माध्यम से हम अपने कई एप्लिकेशनों को सीखने के झंझट से मुक्त कर रहे हैं और ग्राहकों को सरलता से सभी सेवाएं प्रदान करने का अवसर प्राप्त हुआ है।” इसके अतिरिक्त, एडोबी तीसरे पक्ष के एआई मॉडल जैसे क्लिंग 3.0 को भी अपनी लाइब्रेरी में शामिल कर रहा है, जो उपयोगकर्ताओं को और विकल्प उपलब्ध कराएगा।

सल्यान जिल्ला अस्पताल भवन निर्माण दोबारा शुरू, दो वर्षों बाद

३ वैशाख, सल्यान । दो वर्षों से अधर में पड़े सल्यान जिला अस्पताल के निर्माणाधीन दो भवनों का पुनः निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। जिले में विशेषज्ञ सेवाएं बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इन भवनों का निर्माण कार्य आरोग्य-सुवेदी जेवी द्वारा कराया जा रहा है। ठेकेदार ने २०७८ वैशाख में तीन वर्षों के भीतर कार्य पूरा करने का समझौता किया था। हालांकि, कार्य के आरंभ होते ही कई बार रुकावटें आईं और अंतिम चरण पर पहुंचने के बाद निर्माण कार्य बंद हो गया था। कार्य अवधि बढ़ाए बिना दो वर्षों तक अधर में पड़ा निर्माण कार्य अब अवधि बढ़ने के बाद पुनः शुरू कर दिया गया है।

लंबे समय तक रुक चुके निर्माण कार्य के पुनः आरंभ होने से स्थानीय नागरिकों में खुशी देखी जा रही है। अस्पताल परिसर में इलाज के लिए आई सिद्ध कुमाख गाउँपालिका–३ की मनिषा रेउले ने बताया कि पहले अधर में पड़े भवन का निर्माण फिर से शुरू होते देख खुशी हुई। ‘‘पांच महीने पहले अस्पताल आई थी तो भवन अधर में पड़ा देखकर मन दुखी हुआ था,’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब कार्य पुनः शुरू होने की खबर सुन खुशी हुई।’’

दो वर्षों से अधर में पड़े भवन का पुनः निर्माण शुरू होने की खबर से बनगाड़ कुपिण्डे नगरपालिका-१२ निगालचुला के नवीन वली ने खुशी व्यक्त की और विशेषज्ञ उपचार सेवा शुरू होने की आशा जताई। भवन तैयार होने पर जिले में ही विशेषज्ञ सेवा उपलब्ध होगी और जिले के बाहर महंगे शुल्क देने की समस्या खत्म हो जाएगी, उन्होंने कहा। संघीय सरकार द्वारा लगभग १८ करोड़ रुपये की लागत में शुरू यह परियोजना ५० शैयाओं वाले अस्पताल के संचालन के लिए शुरु की गई थी।

निर्माण कार्य शुरू होने के एक वर्ष बाद ठेकेदार के माध्यम से लगभग ७५ प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया, लेकिन शेष कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। अब स्वास्थ्य मंत्रालय से अवधि बढ़ने के बाद नई समय सीमा २०८३ असार १० तक निर्धारित की गई है। निर्माण कंपनी ने बताया है कि यदि शेष बिल समय पर पास हो और कोई अवरोध न आए तो वे ६ महीनों के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल सल्यान में सल्यान के साथ-साथ पड़ोसी जिले रोल्पा और रुकुम के दैनिक १२० से अधिक मरीज उपचार सेवा ले रहे हैं।

१५ शैयाओं की क्षमता वाले अस्पताल में मरीजों के दबाव के कारण अब ५० शैयाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन आवश्यक भवन और अवसंरचना की कमी के कारण सेवा विस्तार में समस्या आ रही है। अस्पताल में आपातकालीन, प्रयोगशाला सहित अन्य सेवाएं तो जोड़ी गई हैं, लेकिन पर्याप्त संरचना न होने के कारण वे प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं, स्वास्थ्य सेवा कार्यालय सल्यान के प्रमुख डॉ. अर्जुनकुमार बुढामगर ने बताया। ‘‘हम सीमित संरचनाओं में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं,’’ उन्होंने कहा, ‘‘आपातकालीन, प्रयोगशाला, वार्ड सभी में विभिन्न सेवाएं जोड़ी गई हैं।’’ भवन निर्माण पूर्ण होने के बाद विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार में और सुगमता आएगी, उन्होंने कहा।

अपराजित पन्जाब शीर्षस्थानमा उक्लियो, मुम्बईको चौथो हार

पंजाब किंग्स ने अपनी अपराजित यात्रा जारी रखते हुए शीर्ष स्थान बरकरार रखा, मुंबई ने चौथी हार भोगी

पूर्व उपविजेता पंजाब किंग्स ने आईपीएल २०२६ में अपनी अपराजित यात्रा जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा बनाए रखा। पंजाब ने मुंबई इंडियन्स को ७ विकेट से हराते हुए १९६ रन का लक्ष्य १६.१ ओवर में हासिल किया। प्रभसीमरन सिंह ने ८० रन नाबाद बनाए, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने ६६ रन बनाए और दोनों ने मिलकर १३९ रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की।

३ वैशाख, काठमांडू। पंजाब किंग्स ने जारी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) २०२६ में बिना हार के शीर्ष स्थान को कायम रखा है। कप्तान श्रेयस अय्यर और प्रभसीमरन सिंह के शानदार बल्लेबाज़ी प्रदर्शन के दम पर पंजाब ने गुरुवार को मुंबई इंडियन्स को मात दी और अपनी अपराजित यात्रा को जारी रखा। वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मैच में पंजाब ने मुंबई को ७ विकेट से पराजित किया।

मुंबई द्वारा दिए गए १९६ रन के लक्ष्य को पंजाब ने १६.१ ओवर में ३ विकेट खोकर पूरा किया। प्रभसीमरन सिंह ने ३९ गेंदों में ११ चौके और २ छक्के लगाकर ८० रन नाबाद बनाए, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने ३५ गेंदों पर ५ चौके और ४ छक्के लगाकर ६६ रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों ने तब १३९ रन की अहम साझेदारी की जब टीम ४५ रन पर २ विकेट खो चुकी थी।

मुंबई के लिए आलम गजनफर ने २ विकेट लिए, जबकि शार्दुल ठाकुर को १ विकेट मिला। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई ने २० ओवर में ६ विकेट खोकर १९५ रन बनाए। क्विंटन डी कॉक ने नाबाद शतकीय पारी खेली, जिसमें उन्होंने ६० गेंदों में ८ चौके और ७ छक्के लगाए और ११२ रन बनाए। नमन धीर ने ५० रन बनाए जबकि कप्तान हार्दिक पांड्या ने १४ रन का योगदान दिया। पंजाब के अर्शदीप सिंह ने ४ ओवर में २२ रन देकर ३ विकेट लिए। मार्को जानसेन और शशांक सिंह ने एक-एक विकेट हासिल किया। इस जीत के साथ पंजाब ने ५ मैचों में ४ जीत के साथ ९ अंक जुटाए हैं, जबकि एक मैच में उन्होंने अंकों को बांटा था। मुंबई ५ मैच में ४ हार के साथ २ अंक लेकर नौवें स्थान पर है।

सार्वजनिक ऋण 29 खरब पार, प्रति व्यक्ति ऋणभार 1 लाख से अधिक

समाचार सारांश

एआई द्वारा तैयार किया गया। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2082/83 के तीसरे त्रैमासिक तक 29 खरब 33 अरब 79 करोड़ 46 लाख रुपये सार्वजनिक ऋण लिया है।
  • सार्वजनिक ऋण में आंतरिक ऋण 13 खरब 88 अरब 11 करोड़ तथा बाह्य ऋण 15 खरब 45 अरब 67 करोड़ रुपये है।
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन एवं वित्त आयोग ने आंतरिक ऋण को चालू और प्रशासनिक खर्चों में उपयोग न करने की सख्त मनाही की सिफारिश की है।

3 वैशाख, काठमांडू – सार्वजनिक ऋण 29 खरब रुपये से अधिक हो गया है। सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2082/83 के तीसरे त्रैमासिक अवधि (साउन-चैत्र) तक सरकार का बकाया ऋण 29 खरब 33 अरब 79 करोड़ 46 लाख रुपये पहुंच गया है।

इसमें आंतरिक ऋण 13 खरब 88 अरब 11 करोड़ और बाह्य ऋण 15 खरब 45 अरब 67 करोड़ रुपये शामिल हैं। पिछले 9 महीनों में सरकार ने 3 खरब 48 अरब 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया है।

मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और नेपाली मुद्रा की कमजोरी के कारण बाह्य ऋण में 1 खरब 15 अरब 75 करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त भार जुड़ा है, जिसने कुल मिलाकर देश के सार्वजनिक ऋण में तेज वृद्धि की है।

चालू वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले, अर्थात असार के अंत तक सार्वजनिक ऋण 26 खरब 74 अरब 4 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 29.5 खरब के करीब पहुंच चुका है।

नेपाल की जनसंख्या के अनुसार प्रतिव्यक्ति ऋण भार की गणना करने पर, एक नेपाली पर लगभग 1 लाख 594 रुपये का सार्वजनिक ऋण आता है।

सार्वजनिक ऋण को देश की आखिरी जनगणना के अनुसार 2 करोड़ 91 लाख 64 हजार 578 लोगों में विभाजित करने पर यह आंकड़ा निकला है। कुल सार्वजनिक ऋण में बाह्य ऋण का हिस्सा 52.69 प्रतिशत और आंतरिक ऋण का हिस्सा 47.31 प्रतिशत है।

सार्वजनिक ऋण कितना है?

आंतरिक ऋण : 13 खरब 88 अरब

बाह्य ऋण : 15 खरब 45 अरब

कुल ऋण : 29 खरब 33 अरब

स्रोतों के अनुसार नेपाल के कुल घरेलू उत्पाद (GDP) के आधार पर सार्वजनिक ऋण 48.04 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जिसमें आंतरिक ऋण का हिस्सा 22.73 प्रतिशत और बाह्य ऋण का हिस्सा 25.31 प्रतिशत है।

9 महीनों में 3 खरब से करीब ऋण वृद्धि

सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के 9 महीनों में लगभग 3.5 खरब रुपये का सार्वजनिक ऋण जुटाया है। इस वर्ष सरकार का लक्ष्य कुल 5 खरब 95 अरब रुपये तक ऋण उठाने का है। चैत्र तक 3 खरब 48 अरब 15 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त हुआ है, जो वार्षिक लक्ष्य का 58.45 प्रतिशत है।

इस दौरान आंतरिक ऋण 2 खरब 83 अरब 66 करोड़ रुपये और लक्ष्य 3 खरब 62 अरब रुपये है। बाह्य ऋण 64 अरब 48 करोड़ रुपये जुटाया गया है जबकि लक्ष्य 2 खरब 33 अरब 66 करोड़ रुपये है। आंतरिक ऋण में 78.36 प्रतिशत और बाह्य ऋण में 27.60 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है।

सांवा-ब्याज पर 2 खरब 58 अरब खर्च

सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के 9 महीनों में सार्वजनिक ऋण का सांवा-ब्याज चुकाने के लिए 2 खरब 58 अरब 44 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो वार्षिक बजट का 62.88 प्रतिशत है। चैत्र मसांत तक कुल ऋण सेवा खर्च GDP का 4.23 प्रतिशत है।

आंतरिक ऋण पर सांवा भुगतान में 1 खरब 63 अरब 77 करोड़ और ब्याज भुगतान में 45 अरब 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। बाह्य ऋण पर सांवा भुगतान 40 अरब 39 करोड़ और ब्याज भुगतान 8 अरब 67 करोड़ रुपये है। कुल सांवा भुगतान 2 खरब 4 अरब और ब्याज भुगतान 54 अरब 27 करोड़ रुपये है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऋण लेकर फिर ऋण की सांवा-ब्याज चुकाना वर्तमान सार्वजनिक ऋण की जाल में फंसने जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।

सरकार राजस्व संग्रह में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाई है, और प्राप्त राजस्व केवल चालू खर्च चलाने के लिए काफी है। इस वजह से वित्तीय प्रबंधन और पूंजीगत खर्च के लिए सार्वजनिक ऋण पर निर्भर रहना पड़ता है।

अर्थशास्त्री और राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. गोविन्दराज पोखरेल के अनुसार यह स्थिति देश का ऋण चक्र में फंसने का परिणाम है। उनके अनुसार अनुत्पादक क्षेत्रों में खर्च बढ़ने के कारण विकास नहीं हो पा रहा और ऋण बढ़ा है।

निवर्तमान राष्ट्रीय योजना आयोग उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. शिवराज अधिकारी भी कहते हैं कि ऋण सही और उत्पादक क्षेत्रों में बजाए बिना समस्या जटिल होती जा रही है। अधिकांश राष्ट्रीय महत्व के परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं। नए सरकार को इन्हें शीघ्र पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

वे सुझाव देते हैं कि परियोजनाओं के लिए केवल लक्षित आंतरिक ऋण लेना चाहिए और आर्थिक सर्वेक्षण में इसके स्पष्ट विवरण होने चाहिए।

7 वर्षों में दो गुना बढ़ा सार्वजनिक ऋण

अर्थ मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार पिछली 7 वर्षों में सार्वजनिक ऋण लगभग दोगुना हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2076/77 में ऋण मात्र 14 खरब 33 अरब 40 करोड़ था, जो अब करीब 29.5 खरब रुपये तक पहुंच गया है।

7 साल पहले GDP के 38.05 प्रतिशत था सार्वजनिक ऋण, जो अब 48 प्रतिशत पार कर गया है। विश्व बैंक के घटते अनुदान और घटती राजस्व के कारण ऋण में वृद्धि हो रही है।

सरकार द्वारा लिए गए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाईं, जैसे पोखरा और भैरहवा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा। मेलम्ची जलापूर्ति परियोजना भी समय पर पूरी नहीं हुई और प्राकृतिक आपदाओं ने नुकसान बढ़ाया।

उच्च स्तरीय आर्थिक सुधार सुझाव आयोग की रिपोर्ट बताती है कि सार्वजनिक ऋण संरचना और राजस्व सामान्य नहीं रहने से ऋण का भार बढ़ रहा है।

आयोग ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक ऋण का समुचित उपयोग न होने पर देश ऋण के जाल में फंस सकता है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे आवश्यक क्षेत्रों के बजट में कमी होने की संभावना बताई है और वित्तीय सतर्कता अपनाने की सलाह दी है।

चालू और प्रशासनिक खर्च में आंतरिक ऋण निषेध करें : आयोग

राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन एवं वित्त आयोग ने आंतरिक ऋण को चालू और प्रशासनिक खर्च में कड़ाई से उपयोग न करने की सिफारिश की है।

आगामी वित्तीय वर्ष 2078/79 के लिए संघ, प्रदेश और स्थानीय स्तर द्वारा लिए जाने वाले आंतरिक ऋण की सीमा GDP के 5.5 प्रतिशत से अधिक न बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।

आयोग ने आंतरिक ऋण का निवेश रोजगार सृजन, दीर्घकालीन लाभ और पूंजी निर्माण वाली परियोजनाओं में करने पर जोर दिया है तथा चालू एवं प्रशासनिक खर्चों में कड़ाई से रोक लगाने पर बल दिया है।

वित्तीय वर्ष 2078/79 में आंतरिक ऋण परिचालन GDP का मात्र 1.41 प्रतिशत था और अधिकांश ऋण पुराने ऋण सेवा खर्च में जा चुका था, आयोग ने बताया।

आयोग ने योजना चयन प्रक्रिया में लागत-लाभ विश्लेषण कर आर्थिक लाभ अधिक होने वाले नफा वाले प्रोजेक्टों में ही आंतरिक ऋण निवेश करने की सलाह दी है।

साथ ही, सामाजिक क्षेत्र के परियोजनाओं में ही आंतरिक ऋण का उपयोग करने का सुझाव दिया है।

नई या चल रही परियोजनाओं को चुनते समय अन्य बातों के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना से अर्जित लाभ से ऋण सेवा तथा ब्याज का भुगतान संभव हो।

आयोग ने उत्पादन वृद्धि, रोजगार सृजन, अवसंरचना विकास और पूंजी निर्माण वाली पूरी तरह तैयार परियोजनाओं में ही आंतरिक ऋण निवेश करने की सिफारिश की है।

तीनों स्तर की सरकारों को बजट निर्माण में परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों के स्रोतगत विवरण में अनिवार्य रूप से आंतरिक ऋण का उल्लेख करना होगा, आयोग ने कहा।

सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय के माध्यम से तीनों स्तरों से लिए जा रहे आंतरिक ऋण और सार्वजनिक ऋण के एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक सूचना प्रबंधन, लेखांकन और रिपोर्टिंग प्रणाली बनाने के लिए भी आयोग ने अनुरोध किया है।

आंतरिक ऋण को भविष्य के राजस्व पर वर्तमान खर्च करने की प्रवृत्ति बन्द करने और राजस्व सुधार के लिए रणनीति बनाने का सुझाव भी आयोग ने दिया है।

‘बाह्रखरी गल्फ तथा इकोनोमिक सिम्पोजियम’ १९ वैशाखमा काठमाडौंमा हुने

‘बाह्रखरी गोल्फ एवं आर्थिक परिसंवाद’ १९ वैशाख को काठमाडौं में आयोजित होगा

समाचार सारांश की समीक्षा की गई है। एनसेल बिजनेस बाह्रखरी गोल्फ प्रतियोगिता और आर्थिक सिम्पोजियम का नवां संस्करण वैशाख १९ तारीख को गोकर्ण गोल्फ कोर्स में आयोजित किया जाएगा। भारत के नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कान्त ‘की नोट स्पीकर’ के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले विशेष संबोधन करेंगे। प्रतियोगिता में एक सौ से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे, तथा मुख्य विजेता को सोने का बॉल पुरस्कार दिया जाएगा, वहीं होल इन वन खिलाड़ी को बीवाईडी की एट्टो थ्री गाड़ी पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाएगी। ३ वैशाख, काठमाडौं। ‘एनसेल बिजनेस बाह्रखरी आमंत्रण गोल्फ प्रतियोगिता’ का नवां संस्करण और ‘आर्थिक सिम्पोजियम’ इस वर्ष काठमाडौं में आयोजित होने जा रहा है। बिहीवार (वैशाख ३) को काठमाडौं में पत्रकार सम्मेलन के दौरान बाह्रखरी मीडिया ने पुष्टि की कि प्रतियोगिता और आर्थिक परिसंवाद इसी वैशाख १९ को गोकर्ण गोल्फ कोर्स में आयोजित होंगे। इस नववें संस्करण के ‘एनसेल बिजनेस बाह्रखरी गोल्फ तथा आर्थिक सिम्पोजियम’ में भारत के वरिष्ठ प्रशासक अमिताभ कान्त ‘की नोट स्पीकर’ के रूप में भाग लेंगे। वे एमआईआईटी यूनिवर्सिटी के चांसलर एवं भारत के नीति आयोग के पूर्व सीईओ रह चुके हैं। पत्रकार सम्मेलन में बाह्रखरी मीडिया के प्रधान संपादक प्रतीक प्रधान ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ‘आर्थिक सिम्पोजियम’ में मुख्य अतिथि के रूप में विशेष संबोधन करेंगे।

‘कांग्रेस विवाद संवाद और सहमति से सुलझाना होगा’

नेपाली कांग्रेस के आंतरिक विवाद तेज़ हो रहे हैं। केंद्रीय अनुशासन समिति ने निवर्तमान कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्का से नकली लेटरपैड का उपयोग कर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के आरोप में सात दिन का स्पष्टीकरण मांगा है। खड्काओं ने इस निर्णय को अवैध, हास्यास्पद और निरर्थक करार देते हुए अस्वीकार किया है। उन्होंने पार्टी की आधिकारिकता से जुड़ा मामला सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन होने और उन्होंने वास्तविक लेटरपैड का उपयोग किया होने का दावा किया है। इस विवाद ने पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व की वैधता पर गंभीर टकराव पैदा किया है।

इस विषय पर कांग्रेस के नेता एवं पूर्व विदेश मंत्री एनपी साउद से किए गए संक्षिप्त संवाद में उन्होंने कहा, “पूर्णजी से मांगा गया स्पष्टीकरण उचित नहीं है। 14वें महाधिवेशन से निर्वाचित कार्यसमिति और विशेष महाधिवेशन से निर्वाचित कार्यसमिति के विवाद का अंतिम निर्णय अभी तक नहीं हुआ है। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “अदालत में विचाराधीन मामलों पर पार्टी के भीतर विवाद होने से विभाजन की संभावना बढ़ती है।”

साउद ने कहा, “नेपाली कांग्रेस एक ऐतिहासिक पार्टी है। इसकी एकता लोकतंत्र और राष्ट्रवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने पार्टी सदस्यता अद्यतन प्रक्रिया में बदलाव से आंतरिक लोकतंत्र, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की चेतावनी दी।

साउद ने निष्कर्ष में कहा, “नेपाली कांग्रेस में व्यापक एकता, परिवर्तन और नियमित वैधानिक प्रक्रियाओं को बाधित किए बिना ही पार्टी को मजबूत किया जा सकता है। चर्चा और संवाद से किसी भी जटिल समस्या का समाधान संभव है।”

महिमानसिंह विष्ट को ६ महीने की कैद की सजा, रेसम चौधरी की गिरफ्तारी में संलिप्तता सबूतित

२२ चैत, काठमाण्डौ। जिल्ला अदालत काठमाण्डौ ने सर्वोच्च अदालत के शाखा अधिकारी महिमानसिंह विष्ट को लिखित संबंधी अपराध में दोषी पाते हुए ६ महीने की कैद की सजा सुनाई है। विष्ट द्वारा जारी किए गए नकली पत्र के आधार पर नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के तत्कालीन संस्थापक नेता रेसम चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। न्यायधीश खिमानन्द भुसाल की अदालत ने उन्हें ६ महीने की कैद के साथ-साथ १० हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पिछले वैशाख १७ को सर्वोच्च अदालत के शाखा अधिकारी महिमानसिंह विष्ट द्वारा जारी किए गए पत्र की वजह से नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के संरक्षणकर्ता एवं पूर्व सांसद रेसम चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में विचाराधीन मामले का अंतिम निर्णय न होने के बावजूद चौधरी को दंडित करने वाला यह पत्र अनधिकृत और गैर कानूनी घोषित किए जाने पर कुछ ही घंटों के भीतर चौधरी को रिहा कर दिया गया था। इस घटना के बाद उक्त पत्र जारी करने वाले विष्ट को गिरफ्तार किया गया।

सर्वोच्च अदालत ने कारागार और पुलिस को तुरंत एक अन्य पत्र भेजकर रेसम चौधरी की रिहाई की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की।

इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम तय, ट्रम्प ने किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम पर सहमति होने की घोषणा की है। ट्रम्प ने बताया कि 34 वर्षों के बाद वाशिंगटन डीसी में दोनों देशों के अधिकारियों की पहली बार मुलाकात हुई है। उन्होंने उपराष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सेना प्रमुख के साथ मिलकर दीर्घकालीन शांति स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं।

3 वैशाख, काठमाडौं। गुरुवार शाम सोशल मीडिया ट्रुथ पर अपने संदेश में ट्रम्प ने कुछ ही घंटों में 10 दिन के युद्धविराम की सहमति की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘मैंने अभी-अभी लेबनान के माननीय राष्ट्रपति जोसेफ अवाने और इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतान्याहू से बात की। ये दोनों नेता अपने-अपने देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए 10 दिन के युद्धविराम शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं।’

ट्रम्प के अनुसार, इन दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने 34 वर्षों बाद पहली बार वाशिंगटन डीसी में मिलकर बातचीत की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल थे। ‘मैंने उपराष्ट्रपति जेडी भान्स, विदेश मंत्री रुबियो और संयुक्त सेना प्रमुख समिति के अध्यक्ष डान कैनी को निर्देश दिया है कि वे इजरायल और लेबनान के बीच दीर्घकालीन शांति स्थापना के लिए काम करें,’ उन्होंने कहा। ट्रम्प ने यह भी बताया कि विश्व में अब तक नौ युद्ध समाधान मेरी प्रतिष्ठा हैं और यह युद्ध समाधान 10वां होगा।

सिंहदरबारभित्र भुर्रभुर्र (तस्वीरहरू) – Online Khabar

सिंहदरबार के भीतर रंग-बिरंगे फूलों का नज़ारा (तस्वीरें)

फूल किराफट्याङ्ग्रा और पक्षियों को भोजन, आकर्षण और सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं। फूलों के प्रति मानव और पक्षियों की आकर्षितता मानवीय स्वभाव और प्राकृतिक आवश्यकताओं को स्पष्ट करती है। ३ वैशाख, काठमांडू। विभिन्न प्रजाति के रंग-बिरंगे फूलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंचा है। फूलों की सुन्दरता मानवीय जाति को आकर्षित करती है। फूलों के प्रति आकर्षण केवल मानवीय स्वभाव की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि किराफट्याङ्ग्रा से लेकर पक्षी भी इससे आकर्षित होते हैं। पक्षियों के फूलों के प्रति आकर्षण के कई कारण हैं। फूल पक्षियों को भोजन, आकर्षण और सुरक्षित आवास का संयोजन प्रदान करते हैं, जिसके कारण वे स्वाभाविक रूप से फूलों की ओर आकर्षित होते हैं। देश के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र सिंहदरबार के भीतर वर्तमान में रंग-बिरंगे फूलों की बहार है। सिंहदरबार के चारों ओर के रंग-बिरंगे फूल भँगेरा, जुरेली, सारौं जैसे पक्षियों का स्वागत करते प्रतीत होते हैं। रंग-बिरंगे फूलों के बीच पक्षी स्वतंत्र रूप से उड़ते हुए आनंदित और प्रसन्न दिख रहे हैं।

यूट्यूब शॉर्ट्स को स्थायी रूप से बंद करने का नया विकल्प जारी

यूट्यूब पर वीडियो देखते हुए ‘शॉर्ट्स’ की अनंत दुनिया में खो जाने और समय व्यर्थ करने की समस्या से अब निजात मिल सकती है। यूट्यूब ने अपनी ‘टाइम मैनेजमेंट’ सुविधा को अपडेट करते हुए उपयोगकर्ताओं को बिना किसी तृतीय पक्ष ऐप के शॉर्ट्स फीड को पूरी तरह से ब्लॉक करने का विकल्प प्रदान किया है। यह सुविधा प्रारंभ में अभिभावकों के लिए जारी की गई थी और अब १६ अप्रैल, २०२६ से सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो गई है।

शॉर्ट्स बंद करने का तरीका इस प्रकार है: सेटिंग्स में जाएं: अपने एंड्रॉइड या iOS डिवाइस पर यूट्यूब ऐप खोलें। स्क्रीन के नीचे दाईं ओर स्थित प्रोफाइल आइकन पर टैप करके ‘सेटिंग्स’ में प्रवेश करें। टाइम मैनेजमेंट: सेटिंग्स के अंदर ‘टाइम मैनेजमेंट’ सेक्शन खोलें। यहां यूट्यूब ने उपयोगकर्ताओं का समय बचाने और ध्यान भटकाने वाली समस्याओं को रोकने के लिए विभिन्न विकल्प शामिल किए हैं।

शॉर्ट्स फीड लिमिट ऑन करें: उपलब्ध ‘Shorts feed limit’ विकल्प को ऑन (Toggle on) करें। पहले इसमें कम से कम 15 मिनट की सीमा निर्धारित करनी होती थी, लेकिन नए अपडेट में इसे ‘शून्य’ मिनट पर सेट किया जा सकता है। समय सीमा ‘०’ मिनट करें: अपनी दैनिक सीमा को ‘० मिनट’ पर निर्धारित करें। इस सेटिंग के बाद यूट्यूब तुरंत ही आपके लिए शॉर्ट्स सामग्री दिखाना बंद कर देगा।

यह सुविधा सक्रिय करने के बाद क्या होगा? जब आप समय सीमा को शून्य पर सेट करेंगे, तो यूट्यूब के शॉर्ट्स टैब में कोई वीडियो प्रदर्शित नहीं होगा। इसके स्थान पर “आपने अपने शॉर्ट्स फीड की सीमा पूरी कर ली है” (Reached your Shorts feed limit) संदेश दिखाई देगा। अधिकांश मामलों में आपके होम फीड से भी शॉर्ट्स संबंधित सामग्री हटा दी जाएगी।