
नवनिर्वाचित सांसदों की शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) संसद में कैसे प्रस्तुत होगी इस विषय में पुनः चर्चा शुरू हो गई है। लगभग दो-तिहाई बहुमत प्राप्त रास्वपा के प्रवक्ता एवं सांसद मनीष झालाले ने कहा है कि वे जनअपेक्षाओं के अनुसार जिम्मेदारीपूर्वक आगे बढ़ेंगे। विपक्षी दलों के सांसदों ने भी आगामी दिनों में रास्वपा द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियों में सहयोग और समन्वय करने की प्रतिक्रिया दी है। भाद्र महीने में हुए ‘जेन जी विद्रोह’ के बाद सम्पन्न आम चुनाव से प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़े दल के रूप में रास्वपा के 182 सांसद हैं। प्रमुख विपक्षी नेपाली कांग्रेस के 38, नेकपा एमाले के 25, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के 17, श्रम संस्कृति पार्टी के 7, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी के 4 और एक स्वतंत्र सांसद भी हैं।
स्थापित राजनीतिक दलों के आकार घटने के बाद विश्लेषकों का मानना है कि रास्वपा को उन दलों से अलग दिखना अनिवार्य है। इस बात को रास्वपा के नेता भी गलत नहीं ठहरा रहे हैं। अन्य दलों से अलग दिखने के कारण ही जनता ने उन्हें वोट दिया है, बताते हैं झालाले। “पहले हमने दूसरों को मजबूत किया, अब हम तुम्हें बना रहे हैं, इसी सोच से मतदाताओं ने हमें वोट नहीं दिया,” वे कहते हैं। “दूसरों ने अपेक्षा के अनुसार काम नहीं किया, अब यह जिम्मेदारी आप पर है, इसलिए मतदाताओं ने हम पर विश्वास किया और मौका दिया है। इस विषय को स्पष्ट रूप से समझकर ही हम काम करेंगे।”
संसद के साथ-साथ सरकार में भी अलग तरीके से उपस्थित होने की तैयारी अभिमुखीकरण कार्यक्रम से शुरू हुई है, बताते हैं झालाले। उन्होंने कहा कि सांसदों को सरकार की कार्यप्रणाली में सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। “अभिमुखीकरण में उपसभापति स्वर्णिम वाग्ले ने हमें सरकार के प्रति कड़ा रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा, रमाकर न बैठो,” आकथन किया झालाले। “यह दर्शाता है कि वे चाहते हैं कि सरकार सही राह न छोड़े। हम इस अभ्यास को निरंतर जारी रखेंगे और सतर्कता का माहौल बनाए रखेंगे।”





