
जल एवं मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी शुक्रवार और शनिवार को पश्चिमी हवा सक्रिय होने के कारण हल्की से मध्यम वर्षा और तूफ़ान की संभावना जताई है। मौसमविद् के अनुसार, काठमांडू घाटी में भी शुक्रवार और शनिवार को हल्की वर्षा और तूफ़ान आने की संभावना है। १२ चैत्र, काठमांडू। इस सप्ताह के अंत में पुनः पश्चिमी हवा सक्रिय होने की संभावना के साथ तेज़ हवा और गर्जन के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है। विभिन्न मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के अनुसार इस प्रणाली का प्रभाव पूर्व से पश्चिम तक पूरे नेपाल में वर्षा के रूप में दिख रहा है। हालांकि पूर्वी भाग में अधिक और पश्चिमी भाग में कम प्रभाव होने की उम्मीद है। जल एवं मौसम विज्ञान विभाग के मौसमविद् ने भी आगामी शुक्रवार-शनिवार को वर्षा की सम्भावना व्यक्त की है।
विभाग के वरिष्ठ मौसमविद बरुण पौडेल के अनुसार, काठमांडू घाटी में शुक्रवार और शनिवार को हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। इससे पहले ६ और ७ चैत्र को काठमांडू घाटी सहित अधिकांश क्षेत्रों में तूफ़ान और ओलावृष्टि सहित वर्षा हुई थी। हिमालयी जिलों में हिमपात भी दर्ज हुआ था। वर्षा ने किसानों को राहत दी, लेकिन ओलावृष्टि और तूफ़ान ने कुछ समस्या भी पैदा की। नवीन उपग्रह तस्वीरों में भारत और आस-पास के क्षेत्र में वर्षा वाले बादलों की घनी परत दिख रही है, जिसका प्रभाव नेपाल में भी पड़ सकता है। जल एवं मौसम विभाग की मौसमविद् बिनु महर्जन के अनुसार, इस प्रणाली का प्रभाव गुरुवार से महसूस होने लगेगा। उन्होंने कहा, ‘शुक्रवार और शनिवार को वर्षा होने की संभावना है और इसके संकेत गुरुवार से दिखाई देने लगेंगे।’
उनके अनुसार, कई जगहों पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। मूनसून के दौरान तूफ़ान और बिजली गिरने का खतरा अधिक होता है, इसलिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। काठमांडू में भी तूफ़ान की संभावना बढ़ रही है। यह नई प्रणाली तूफ़ान, ओलावृष्टि, वर्षा और हिमपात करा सकती है साथ ही ठंडक भी बढ़ा सकती है। इसका प्रभाव काठमांडू घाटी तक भी हो सकता है। मौसमविद् डॉ. विनोद पोखरेल के मुताबिक, पश्चिमी तराई क्षेत्र में हल्की वर्षा होने की संभावना है, जबकि अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बनी हुई है। जलवायु विश्लेषक डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि वर्षा के साथ शाम के समय काठमांडू घाटी में तूफ़ान चलने की संभावना है। हालांकि घाटी के चारों ओर पहाड़ों से घिरे होने के कारण बड़े तूफ़ान की संभावना कम है।
उन्होंने कहा, ‘भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश की तरफ से नेपाल में प्रणाली प्रवेश करने के बाद लुम्बिनी-चितवन इलाके में इसका प्रभाव अधिक होगा, जबकि काठमांडू घाटी में कम प्रभाव रहने का अनुमान है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन वह भी सीमित और मध्यम स्तर का होगा।’ उच्च पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा और हिमपात की संभावना बनी हुई है। यह नई प्रणाली कितनी शक्तिशाली है? ६ और ७ चैत्र की प्रणाली की तुलना में यह प्रणाली कम शक्तिशाली होने का अनुमान लगाया गया है। मौसमविद् बिनु महर्जन ने कहा, ‘अभी तक की स्थितियों को देखकर यह पिछले सिस्टम से कम शक्तिशाली लग रही है।’ जलवायु विश्लेषक डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि यूरोपीय संघ, जर्मन और भारत के मौसम पूर्वानुमान संस्थानों ने आगामी शुक्रवार और शनिवार को हल्की से मध्यम वर्षा होने का अनुमान लगाया है।
वर्षा का प्रभाव पूर्वी नेपाल में अधिक और पश्चिमी भाग में कम रहने का आकलन है, जबकि तूफ़ान पश्चिमी भाग में अधिक और पूर्वी भाग में कम हो सकता है। उप्रेती ने कहा, ‘इसका प्रभाव शुक्रवार शाम से शनिवार दोपहर तक रहने की संभावना है। काठमांडू घाटी में शुक्रवार शाम को तूफ़ान और वर्षा होने की संभावना है।’ भारत में भी इसका प्रभाव अधिक रहेगा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार यह प्रणाली भारत के कई प्रदेशों में अधिक प्रभावी होगी, जिसके कारण मध्यम जोखिम के लिए सतर्कता जारी की गई है। उपग्रह तस्वीरों के आधार पर उत्तर-उत्तरपूर्वी भारत में मौसम सक्रिय रहेगा और तापमान घटकर ठंडक बढ़ेगी। इसका प्रभाव जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा और हिमपात भी कर सकता है। साथ ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में गरज चमक, तूफ़ान और हल्की से मध्यम वर्षा होगी। उत्तर-पूर्वी भारत के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी बादल छाए रहेंगे और वर्षा जारी रहेगी। दक्षिण भारत में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहने का अनुमान है, हालांकि कुछ जगहों पर बादल छाए हुए हैं। इससे नेपाल में भी तापमान में गिरावट आएगी और ठंडक बढ़ेगी।





