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जीपीएस बिना संभव नेविगेशन तकनीक विकसित

१८ चैत, काठमाडौं। वैज्ञानिकों ने प्रकाश के बजाय ध्वनि के कम्पनों से संचालित अत्यंत सटीक ‘फोनोन लेजर’ विकसित कर नया इतिहास रचा है। यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर और रोचेस्टर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का विकास किया है, जो क्वांटम भौतिकी, गुरुत्वाकर्षण अध्ययन और भविष्य में ‘क्वांटम कम्पास’ निर्माण में क्रांतिकारी योगदान करने की संभावनाएं बढ़ाती है।

‘नेचर कम्युनिकेशन’ जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, प्रोफेसर निक भामिभाकास एवं उनकी टीम ने फोनोन अर्थात् ध्वनि के व्यक्तिगत कणों को लेजर के रूप में नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है। जहां सन् १९६० के दशक में आविष्कार हुए परंपरागत लेजर प्रकाश कण (फोटोन) को नियंत्रित करते हैं, वहीं इस नए प्रकार के लेजर में पदार्थ की यांत्रिक गति या कम्पन का नियंत्रण होता है।

पहले इस प्रकार के लेजर में ‘नोइज़’ की वजह से सटीक मापन करना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन वैज्ञानिकों ने प्रकाश की मदद से उन कम्पनों को सीमित करते हुए थर्मल नोइज़ को अत्यंत कम करने में सफलता पाई है। इस उपलब्धि से गुरुत्वाकर्षण और त्वरण को अब तक की सबसे सटीकता से मापा जा सकता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उपयोग बिना सैटेलाइट पर निर्भर नेविगेशन प्रणाली में होगा, जो किसी भी विधि से अवरुद्ध नहीं की जा सकेगी।