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इरान युद्ध के कारण भारत के पानी और बीयर उद्योग पर पड़ा प्रभाव और सामने आने वाली चुनौतियां

भारत में तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों को गर्मी से निपटने की तैयारी करनी पड़ रही है। लेकिन, भारत के ६ अरब डॉलर के बोतलबंद पानी उद्योग को कच्चे माल की कमी के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले महीने, प्रमुख कंपनी ‘बिस्लेरी’ ने ११ प्रतिशत मूल्य वृद्धि करते हुए १२ बोतलों के एक-लीटर वाले पैक की कीमत २४ रुपये बढ़ाने का निर्णय लिया था। ‘बेइली’ और ‘क्लियर प्रीमियम वाटर’ जैसी अन्य कंपनियों ने भी मूल्यवृद्धि की है। डेटा फॉर इंडिया नामक संस्था के अध्ययन के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में १५ प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में ६ प्रतिशत परिवार बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह महंगा विकल्प है।

भारत के कई हिस्सों में स्वच्छ पानी की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण है। पानी की कमी, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी मुख्य समस्याएं हैं। ब्रांड और बोतल निर्माता बताते हैं कि इरान में जारी युद्ध लम्बा चलता है और ईंधन की कीमतों में वृद्धि होती है तो पानी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। विश्व के तेल और तरल प्राकृतिक गैस का लगभग २० प्रतिशत सुदुक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग के माध्यम से परिवहन होता है, जिसे इरान ने वर्तमान में पूरी तरह बंद कर दिया है। इसका विश्व बाजार में ईंधन की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ा है।

पेय जल की कीमतें और क्यों बढ़ सकती हैं? महाराष्ट्र बॉटल्ड वाटर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजयसिंह डुबल के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने प्लास्टिक की बोतल में बिकने वाले पानी की कीमत बढ़ा दी है। इसी सप्ताह एक बैरल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत ११९ डॉलर तक पहुंच गई, जो अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान के विरुद्ध युद्ध शुरू करने के बाद से सबसे उच्च स्तर है। कच्चा तेल पॉलीएथिलीन टेरेफ़्थेलेट (पीईटी) रेजिन के पेलेट बनाने में सहायक होता है। डुबल कहते हैं, “प्रीफॉर्म की कीमत प्रति किलोग्राम ११५ रुपये से बढ़कर लगभग १८० रुपये हो गई है।”

काच की बोतल बनाने वाली कंपनियां भी युद्ध के प्रभावों का सामना कर रही हैं। पिछले महीने हाइनकन और कार्लसबर्ग जैसी प्रमुख ब्रुअरीज का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बताया कि काच की बोतलों की कीमत में २० प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत के मदिरा उत्पादकों ने राज्य सरकार से मूल्यवृद्धि की मांग को लेकर पत्राचार किया है। विट्राम ग्लास जैसी कंपनियों ने प्राकृतिक गैस की कीमत में उतार-चढ़ाव को काच की कीमतों में वृद्धि का कारण बताया है। सेठ कहते हैं, “स्थिति अत्यंत नाजुक है। पानी और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति थोड़ी भी कम होने पर भी प्रभाव बहुत बड़ा होता है।”