
फ्त्योदोर दोस्तोएव्स्की ने 1880 में पुस्किन स्मारक अनावरण समारोह में पुस्किन को रूसी चेतना के भविष्यप्रदर्शक और मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में वर्णित किया था। दोस्तोएव्स्की का उपन्यास ‘डेमंस’ प्रगतिशील राजनीतिक विचारधारा से समाज के नैतिक पतन की चेतावनी देता है। उपन्यास के पात्र उदारवादी और कट्टरपंथी विचारधाराओं की मनोवृत्ति और समाज पर उनके गहरे प्रभाव को सूक्ष्मता से चित्रित करते हैं।
8 जून 1880 को फ्त्योदोर दोस्तोएव्स्की ने मॉस्को में ‘सोसाइटी ऑफ़ लवर्स ऑफ रूसी लिटरेचर’ की सभा में पुस्किन स्मारक के अनावरण समारोह में अपना प्रसिद्ध ‘पुस्किन भाषण’ प्रस्तुत किया था। यह भाषण इतना प्रभावशाली था कि मौजूद लोग आँसुओं को रोक नहीं पाए। दोस्तोएव्स्की ने पुस्किन के चरित्र और कृतित्व का गहन विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी रचनाएँ आने वाली मानवता की यात्रा में कितनी महत्वपूर्ण हैं।
उपन्यास ‘डेमंस’ प्रगतिशील राजनीतिक विचारधारा के कारण समाज में नैतिक पतन के विषय पर केंद्रित है। इतिहास ने 19वीं शताब्दी को पुरानी धार्मिक समाज की संज्ञा दी, जबकि 20वीं शताब्दी कुछ नया और अलग करने के लिए अपने आप को एक ऊर्जावान काल के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही थी।
लेनिन, ट्रॉट्सकी, स्टालिन, माओ, पोल पोट, किम इल सुंग जैसे नेताओं द्वारा बिना विवेक नकल की गई इस प्रणाली ने मानवता के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से पर प्रभुत्व कायम कर लिया। किरिलोव की कल्पना में भविष्य में एक ऐसा ‘नया इंसान’ उदय होगा जो मृत्यु के इस चिरस्थायी तर्क से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।





