विद्यार्थी भर्ना और शुल्क वसूली की कानूनी स्थिति: किस शीर्षक में शुल्क लेना वैध है?

शिक्षा मंत्रालय ने 2083 साल के शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले विद्यालयों द्वारा विद्यार्थी भर्ना और शुल्क वसूली को गैरकानूनी बताया है। सरकार ने 15 वैशाख 2083 से शैक्षिक सत्र शुरू करने का निर्णय लेते हुए, मंत्रालय ने समय से पहले शुल्क वापस न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। निजी विद्यालय संचालकों का कहना है कि वे सरकार द्वारा तय की गई तिथि के अनुसार ही भर्ना और शुल्क वसूल कर रहे हैं, वहीं मंत्रालय ने हेल्प डेस्क भी स्थापित किया है। 25 चैत, काठमाडौं।
काठमाडौं के एक निजी विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों ने शिकायत की, “शैक्षिक सत्र 2083 अभी शुरू नहीं हुआ है, फिर भी विद्यालय से वार्षिक शुल्क का बिल मिला है। क्या अब तुरंत पैसा जमा करना होगा?” यह समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कई अभिभावकों के घर भी शुल्क का बिल पहुंचने की बात सामने आई है। शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसी शुल्क वसूली गैरकानूनी है।
सरकार ने आगामी वैशाख 15 से 2083 का शैक्षिक सत्र शुरू करने का निर्णय कर लिया है। लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही छात्र भर्ना कराना और अभिभावकों को शुल्क का बिल भेजने के कारण मंत्रालय ने कड़ी कार्रवाई का आगाह किया है। मंत्रालय के प्रवक्ता शिवकुमार सापकोटाले कहा, “विद्यालय संचालन की गरिमामय और जिम्मेदार प्रणाली में इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियाँ न केवल अवांछनीय हैं, बल्कि दंडनीय भी हैं।”
निजी विद्यालय संचालक 1 वैशाख से शैक्षिक सत्र शुरू होने की उम्मीद कर काम कर रहे थे, परन्तु सरकार ने 15 वैशाख से सत्र शुरू करने का निर्णय लेने के पश्चात भर्ना और शुल्क लेने की प्रक्रिया रोकने का निर्देश दिया है। नेपाल निजी विद्यालय संचालन संघ (एनप्याब्सन) के अध्यक्ष सुवास न्यौपाने ने बताया कि सरकार के इस ताजा निर्णय के बाद भर्ना रोक दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि नियम उल्लंघन पाए जाने पर 25 हजार तक का जुर्माना और विद्यालय का अनुमतिपत्र रद्द किया जा सकता है।
इसी के साथ, शिक्षा मंत्रालय ने विद्यार्थी शुल्क संबंधित शिकायतों के लिए हेल्प डेस्क की स्थापना की है। इस हेल्प डेस्क से संपर्क के लिए निर्देशक निमप्रकाश सिंह राठौर को संपर्क किया जा सकता है। नियमों के अनुसार केवल 14 शीर्षकों में ही शुल्क लेने की अनुमति है।





