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अन्तर्राष्ट्रिय मुद्रा कोष ने कहा – पश्चिम एशियाई युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर डाले ‘‘काले बादल’’

१ वैशाख, काठमाडौं । अन्तर्राष्ट्रिय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण विश्व आर्थिक वृद्धि की पूर्वानुमान से ०.३ प्रतिशत की कमी होने की बात कही है। पहले आईएमएफ ने वर्ष २०२६ में विश्व अर्थव्यवस्था की ३.४ प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था, जो अब घटकर ३.१ प्रतिशत रह गया है। नेपाल की आर्थिक वृद्धि इस वर्ष २.९५ प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि आने वाले वर्ष में ४.५ प्रतिशत की वृद्धि की संभावना जताई गई है। अमेरिकी भन्सार दर में कटौती और तकनीकी प्रगति के चलते वर्ष २०२६ की शुरुआत में विश्व अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत मिले थे, लेकिन फरवरी में पश्चिम एशिया में शुरू हुए युद्ध ने इस गति को रोक दिया है, यह आईएमएफ ने स्पष्ट किया है।

आईएमएफ के आर्थिक सलाहकार पिएरे–ओलिवियर गोरिंचास ने मंगलवार को अपने प्रमुख प्रकाशन वर्ल्ड इकोनोमिक आउटलुक में कहा, ‘‘मध्यपूर्व के संघर्ष ने आर्थिक वृद्धि को स्थिर होने से रोका है और इससे उत्पन्न हुए नुक़सान को कम करने के लिए उचित नीतियाँ और मजबूत वैश्विक सहयोग आवश्यक है।’’ यदि यह युद्ध लंबा चलता है और ऊर्जा अवसंरचना को अधिक क्षति होती है, तो आर्थिक वृद्धि दर २ प्रतिशत तक गिर सकती है। आईएमएफ ने इस बार के रिपोर्ट का विषय ‘‘युद्ध की छाया में विश्व अर्थव्यवस्था’’ रखा है। हालांकि अस्थायी युद्ध विराम की खबरें आ रही हैं, पर बहुत क्षति पहले ही हो चुकी है और यह वृद्धि दर को कम करने के जोखिम को बढ़ाता है, आईएमएफ ने जानकारी दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आयात पर निर्भर कमजोर और विकासशील देश सबसे अधिक प्रभावित होंगे। खासकर महंगाई के कारण गरीब देश और उनके नागरिक कमजोर पड़ सकते हैं। गोरिंचास ने बताया कि ‘‘पश्चिम एशिया में श्रमिक भेजने वाले देशों में मजदूरों से मिलने वाला प्रेषण कम होगा,’’ जिससे नेपाल जैसे देशों की स्थिति चिंताजनक हो सकती है। आईएमएफ ने २०२२ में यूक्रेन युद्ध के संकट से मिली सीख याद दिलाते हुए सरकारों को सुझाव दिया कि ‘‘मूल्य नियंत्रण और निर्यात प्रतिबंध समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि उल्टा प्रभाव डाल सकते हैं।’’