
सरकार ने जेठ १५ से नेपाल–भारत सीमा नाकों पर सौ रुपये से अधिक मूल्य वाले सामानों पर अनिवार्य भन्सा भुगतान का नियम लागू किया है। मधेस प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों ने भन्सा कड़ाई के कारण आर्थिक और सामाजिक समस्याओं में वृद्धि होने की बात कही है। सशस्त्र पुलिस मधेस प्रदेश के प्रमुख डीआईजी कृष्ण ढकाल ने कहा है कि इस नियम का पालन कराना राजस्व वृद्धि और कर भुगतान की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से है।
६ वैशाख, जनकपुरधाम। शनिवार दोपहर साढ़े ३ बजे के लगभग सिर पर चावल का बोरा लेकर भारतीय बाजार भीठामोड़ से नेपाल प्रवेश करते समय महोत्तरी, जलेश्वर की संगीता यादव घबराई हुई थीं। चावल समेत कुछ और सामान खरीदने के लिए सीमा पार गईं संगीता यादव को सौ रुपये से अधिक मूल्य वाले सामानों पर अनिवार्य भन्सा भुगतान का नियम वहीं पता चला, जिसके कारण उन्हें २० किलो के एक बोरे चावल के अलावा कोई सामान लेकर वापस जाना पड़ा। उन्होंने बताया, ‘दूर से वाहन का भाड़ा देकर बाजार पहुंची थी। वहां पहुंचकर ही पता चला कि भन्सा में कड़ाई की गई है। इसलिए सिर्फ एक बोरा चावल लेकर लौटना पड़ा। इस पर भी भन्सा देना पड़ेगा या नहीं, पता नहीं।’
सरकार ने नेपाल–भारत सीमा नाकों पर भन्सा वसूली में कड़ाई की है। सौ रुपये से अधिक मूल्य के सामान लाने पर अनिवार्य भन्सा भुगतान करने को कहा गया है और सशस्त्र पुलिस नाकों पर माइकिंग करके आम जनता को सूचित कर रही है। भन्सा महसूल ऐन, २०८१ की धारा १३ के उपधारा (३) के अधिकार का उपयोग करते हुए सरकार ने गत जेठ १५ से यह नियम लागू किया है, जबकि पहले इस पर कड़ाई नहीं थी। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद नाकों पर कड़ाई बढ़ गई है, जिससे सीमा क्षेत्र के लोग चिंतित हैं।
सस्ते सामान की लालसा में अधिकांश सीमावर्ती क्षेत्र के लोग भारतीय बाजार पर निर्भर हैं। संगीता यादव के अनुसार, ‘यदि नेपाली बाजार में सस्ते दाम में खाद्य सामग्री मिलती, तो हम जैसे गरीब लोग भारतीय बाजार क्यों जाते। सरकार ने यहां कोई सुविधा नहीं दी, उल्टा सख्त नियम लगाए हैं। सभी सामान महंगे हैं, गरीब लोग कैसे जियेंगे?’ उन्होंने सवाल किया।
सशस्त्र पुलिस मधेस प्रदेश प्रमुख डीआईजी कृष्ण ढकाल ने स्पष्ट किया कि पुलिस का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी निर्देशों का पालन कराना है। उन्होंने कहा, ‘हमारा उद्देश्य राजस्व वृद्धि और कर भुगतान की संस्कृति विकसित करना है। इसमें कोई समझौता संभव नहीं।’ हालांकि, इस नियम की राजनीतिक स्तर पर आलोचना हो रही है और सत्तारुढ़ दल के अंदर भी सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को देखते हुए नियम में पुनर्विचार की मांग उठने लगी है।





