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कम्युनिस्ट पार्टी का ७७वां स्थापना दिवस: एकता और विभाजन की यात्रा

९ वैशाख, काठमांडू। टूट-फूट का सामना कर रहे नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टियां आज अपना स्थापना दिवस मना रही हैं। आज से ७७ साल पहले, भारत के कोलकाता में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक महासचिव पुष्पलाल श्रेष्ठ थे, जबकि अन्य संस्थापक नेताओं में निरंजन गोविंद वैद्य, नरबहादुर कर्माचार्य, नारायणविलास जोशी और मोतिदेवी श्रेष्ठ शामिल थे। हालांकि, इस पार्टी के गठन में मनमोहन अधिकारी, तुलसीलाल अमात्य, केशरजंग रायमाझी जैसे नेता भी जुड़े थे। नेपाल में जहानियाँ राणाशासन के दौर में भूमिगत रूप से स्थापित इस पार्टी का उद्देश्य सामंतीवाद, दलाल-नौकरशाही पूंजीवाद और साम्राज्यवाद से नेपाली जनता और राष्ट्र को मुक्त करना था।

कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे महासचिव मनमोहन अधिकारी और तीसरे महासचिव तुलसीलाल अमात्य थे। इसी दौरान, कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने २०११ साल में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था। २०१५ साल के पहले आम चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ने चार सीटें जीती थीं। तत्कालीन राजा महेन्द्र ने जननिर्वाचित सरकार को गिरा कर पंचायती व्यवस्था लागू करने के बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी फिर से प्रतिबंधित हो गई। उस दौरान केशरजंग रायमाझी समर्थित पक्ष ने पंचायती व्यवस्था का समर्थन किया, जिससे पार्टी विभाजित हो गई। विभाजन के बीच झापा में तत्कालीन झापाली क्रांतिकारियों ने ‘वर्गशत्रु सफाया’ अभियान चलाते हुए झापा क्रांति के माध्यम से नेकपा माले और वर्तमान एमाले का रूप लिया। पुष्पलाल और मनमोहन के समूह अंततः २०४७ के बाद एमाले धारा में एकीकृत हुए।

मोहनविक्रम सिंह, निर्मल लामाले नेतृत्व किए विभिन्न समूह नेकपा चौम, नेकपा मोटा मशाल, नेकपा पतला मसाल, नेकपा एकता केन्द्र से होकर आज के माओवादी धारा में परिवर्तित हो गए हैं। हालांकि, मोहनविक्रम सिंह अभी भी पतला मसाल का नेतृत्व कर रहे हैं। २०१५ साल में चार सीटें जीतकर अस्तित्व में आई नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पंचायती काल में विभिन्न धाराओं में विभाजित हो गई। २०४६ साल के जनआंदोलन के बाद तत्कालीन माले और मार्क्सवादी ने मिलकर बनाए गए एमाले संसद में ६९ सीटों के साथ सशक्त विपक्ष बने, जबकि तत्कालीन जनमोर्चा और वर्तमान माओवादी ९ सीटों के साथ तीसरे दल बने। २०५२ साल में माओवादी ने जनयुद्ध शुरू किया और संसदीय राजनीति छोड़ दी। माओवादी ने २०५१ साल के आम चुनाव का बहिष्कार किया, जिससे एमाले ८८ सीटों के साथ पहली पार्टी बनी और दक्षिण एशिया में पहली कम्युनिस्ट एकल सरकार बनाई। २०५४ साल में एमाले विभाजित हुई, जिसके बाद २०५६ की आम चुनाव में ७० सीटों के साथ पुनः दूसरी पार्टी बनी।

ऐतिहासिक जनआन्दोलन के बाद २०६४ में हुए पहले संविधान सभा चुनाव में नेकपा माओवादी प्रत्यक्ष क्षेत्र में बहुमत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनी। २०७० के दूसरे संविधान सभा चुनाव में एमाले दूसरी और माओवादी तीसरी पार्टी बनी। इस बीच नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी से मनमोहन अधिकारी, माधवकुमार नेपाल, पुष्पकमल दाहाल प्रचंड, झलनाथ खनाल, बाबुराम भट्टराई और केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री बने। २०७४ साल के प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा चुनाव में गठबंधन बनाकर लड़े गए दो कम्युनिस्ट पार्टियों, एमाले और माओवादी ने लगभग दो-तिहाई बहुमत से सीटें जीतीं। यह नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के करीब ७० साल के इतिहास में सबसे बड़ी सफलता थी। चुनावी गठबंधन के बाद २०७५ जेठ ३ को एमाले और माओवादी के बीच पार्टी एकता हुई और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) का गठन हुआ।

नेकपा के आंतरिक विवाद के चरम पर, सर्वोच्च अदालत ने इस एकता को रद्द कर दिया, जिससे अब एमाले और माओवादी फिर से पुराने स्वरूप में लौट आए हैं। उस समय सरकार का नेतृत्व कर रही नेकपा एमाले भी विभाजित हुई। एमाले से अलग होकर माधव कुमार नेपाल ने अपनी अगुवाई में नेकपा एकीकृत समाजवादी बनाई, जिसमें उन्होंने २८ केंद्रीय सदस्यों को शामिल कर २०७८ साल भदौ २ को निर्वाचन आयोग में पार्टी दर्ज कराई।

हाल के भदौ २३-२४ के जनजीवन क्रांति के बाद नेपाल की राजनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन के साथ कम्युनिस्ट पार्टियों में एकता और ध्रुवीकरण दिखाई दे रहा है। २०८२ कात्तिक १९ को प्रचंड नेतृत्व वाले नेकपा माओवादी और माधव नेपाल नेतृत्व वाली एकीकृत समाजवादी सहित १० कम्युनिस्ट घटकों ने मिलकर ‘नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी’ की घोषणा की। पार्टी के संयोजक प्रचंड एवं सहसंयोजक माधव कुमार नेपाल बने। बाद में इस पार्टी में करीब एक दर्जन छोटे समूह शामिल हुए।

परन्तु २१ फागुन के प्रतिनिधि सभा चुनाव में नई पार्टी रास्वपा ने अकेले १८२ सीटें जीतीं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रत्यक्ष क्षेत्र में ८ और समानुपातिक तौर पर ९, कुल १७ सीटें ही हासिल कीं। नेकपा एमाले ने प्रत्यक्ष क्षेत्र में ९ और समानुपातिक में १६, कुल २५ सीटें जीतीं। चुनाव के तुरंत बाद बने बालेन सरकार ने जनजीवन क्रांति पर दमन के आरोप में तत्कालीन प्रधानमंत्री और नेकपा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार किया।

अब प्रचंड सहित शीर्ष नेताओं की संपत्ति शुद्धिकरण समेत अन्य जांच चल रही है। चुनाव में घटते परिणाम और शीर्ष नेताओं के विवादित मामलों के कारण कम्युनिस्ट पार्टियां अस्तित्व संरक्षण की चुनौती में हैं। इसलिए कम्युनिस्ट पार्टी के ७७वें स्थापना दिवस के अवसर पर शुभकामना संदेश जारी करते हुए नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक प्रचंड ने नेपाल के समग्र कम्युनिस्ट आंदोलन के पुनर्गठन की आवश्यकता पर जोर दिया और इसके लिए आह्वान किया है।

आंतरिक विवाद के कारण कम्युनिस्ट पार्टियां टूट-फूट का सामना कर रही हैं और एकता के प्रयास विफल हो रहे हैं, जिससे नेता और कार्यकर्ता निराश हैं। वहीं, नेताओं में कम्युनिस्ट आचरण और व्यवहार के अभाव से आम जनता के बीच उनका प्रति वितृष्णा बढ़ी है।