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जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए नई तकनीक ‘गोफ्लो’

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया ।

  • वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर समुद्री सतह के प्रवाह को अब तक के सबसे व्यापक रूप में ट्रैक करने वाली ‘गोफ्लो’ तकनीक विकसित की है।
  • ‘गोफ्लो’ तकनीक मौसमी उपग्रहों की छवियों को उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री प्रवाह मानचित्र में बदलती है और हर घंटे ताजा मानचित्र उपलब्ध कराती है।
  • यह तकनीक मौसम पूर्वानुमान, तेल रिसाव ट्रैकिंग और समुद्री कचरा प्रबंधन में सहयोग करेगी, ऐसा माना जा रहा है।

9 वैशाख, काठमाडौँ। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए समुद्री सतह के प्रवाह को अब तक के सबसे विस्तृत तरीके से ट्रैक करने वाली नई तकनीक विकसित की है।

‘गोफ्लो’ नामक इस तकनीक से अंतरिक्ष में मौजूद मौसमी उपग्रहों की तस्वीरों को उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री प्रवाह मानचित्र में बदला जाएगा।

‘नेचर जियोसाइंस’ जर्नल में प्रकाशित इस खोज ने पृथ्वी के जलवायु और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के नए रास्ते खोल दिए हैं।

स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशेनोग्राफी के वैज्ञानिक लुक लेटन और उनकी टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है, जो ‘डीप लर्निंग’ का उपयोग कर उपग्रह द्वारा ली गई थर्मल छवियों में तापमान पैटर्न के बदलाव का विश्लेषण करती है और पानी के प्रवाह की गति और दिशा को पहचानती है।

पहले ऐसे छोटे और तेज़ लहरों का प्रत्यक्ष अवलोकन असंभव समझा जाता था।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

समुद्री लहरें विश्व भर में तापमान संतुलित करने, वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को गहरे समुद्र तक पहुंचाने और समुद्री जीवों के लिए पोषक तत्वों के प्रवाह में अहम भूमिका निभाती हैं।

पहले के उपग्रह हर दस दिन में एक बार ही एक स्थान का अवलोकन करते थे, जिससे कुछ घंटों में बनने और खत्म होने वाली लहरों को रिकॉर्ड करना संभव नहीं था। लेकिन ‘गोफ्लो’ हर घंटे ताजा मानचित्र उपलब्ध कराता है, जो समुद्र में होने वाली ‘वर्टिकल मिक्सिंग’ जैसी जटिल प्रक्रियाओं को समझना आसान बनाता है।

पुराने उपग्रहों से नई क्षमताएं

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए कोई नया अंतरिक्ष उपकरण भेजने की आवश्यकता नहीं है।

2023 से उत्तर अटलांटिक क्षेत्र में चलाए गए परीक्षणों ने इस तकनीक को जहाजों से किए गए माप के बराबर सटीक साबित किया है। वैज्ञानिकों ने इसे खासतौर पर ‘गल्फ स्ट्रीम’ जैसी जटिल धाराओं के अध्ययन के लिए इस्तेमाल किया है।

बादल छाने पर तस्वीरें लेने में समस्या होती है, लेकिन वैज्ञानिक अन्य उपग्रहों के डेटा को मिलाकर इसे वैश्विक स्तर पर लागू करने की योजना बना रहे हैं।

यह तकनीक भविष्य में मौसम पूर्वानुमान, तेल रिसाव ट्रेकिंग और समुद्री कचरे के प्रबंधन में महत्वपूर्ण मदद करेगी। साथ ही यह दशक पुरानी सिद्धांतों को वास्तविक आंकड़ों के आधार पर परखने का अवसर प्रदान करती है कि समुद्र कैसे ताप और कार्बन सोखता है।