
चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज ने विश्व की पहली ‘प्यारोनमिक’ कार्बन लेखांकन प्रणाली का अनावरण किया है। यह प्रणाली वस्तुओं के उपभोक्ता देशों को उत्सर्जन में अधिक जिम्मेदार मानने का एक नया नजरिया प्रस्तुत करती है। वर्ष 2022 में चीन का उत्सर्जन 17.7 प्रतिशत कम और अमेरिका का 15.2 प्रतिशत अधिक रिकॉर्ड किया गया है।
शंघाई एडवांस्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित यह नया मॉडल पारंपरिक दृष्टिकोणों से अलग तरीके को अपनाते हुए, वस्तु उत्पादन करने वाले देशों के बजाय उन वस्तुओं के उपभोक्ता देशों को उत्सर्जन के लिए अधिक उत्तरदायी मानता है। पारंपरिक मॉडल बिजली घर या कारखाने जैसे उत्पादन केंद्रों से होने वाले कुल उत्सर्जन के आधार पर देशों की जिम्मेदारी निर्धारित करता था, जिससे चीन जैसे बड़े उत्पादक देशों का उत्सर्जन अधिक दिखाया जाता था।
लेकिन इस नए मॉडल के अनुसार उपभोक्ता केंद्रित गणना करने पर, वर्ष 2022 में चीन का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा मानकों की तुलना में 17.7 प्रतिशत कम मापा गया है। इसी प्रकार, अधिक उपभोग करने वाला राष्ट्र संयुक्त राज्य अमेरिका का कुल उत्सर्जन इस पद्धति के अनुसार 15.2 प्रतिशत अधिक दिखा है। 8 अप्रैल को जारी इस ‘साइंसवॉन-यूहेन्ग कार्बन अकाउंटिंग लार्ज मॉडल’ को जलवायु परिवर्तन क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
इस मॉडल के प्रमुख वैज्ञानिक एवं संस्थान के उपाध्यक्ष वेई वेई के अनुसार, यह प्रणाली कार्बन उत्सर्जन को समझने और प्रबंधन करने के तरीके में मौलिक बदलाव लाने की उम्मीद रखती है। चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज का दावा है कि यह प्रणाली वैश्विक जलवायु सुशासन को और अधिक सटीक बनाने तथा विभिन्न देशों के बीच उत्सर्जन की जिम्मेदारी को यथार्थपरक और वैज्ञानिक आधार पर बांटने में सहायक होगी।





