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उच्च अदालत ने वडाध्यक्ष को कैद की सजा की पुष्टि की

९ वैशाख, पोखरा । पोखरा महानगरपालिका वडा नम्बर २४ के वडाध्यक्ष भरतबहादुर अधिकारी के खिलाफ जातीय भेदभाव के आरोप में कास्की जिल्ला अदालत द्वारा सुनाई गई कैद की सजा को उच्च अदालत पोखरा ने भी स्वीकृत कर दिया है। वडासदस्य मैयाँ नेपाली ने वडाध्यक्ष अधिकारी पर अपने साथ जातीय भेदभाव और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कास्की जिल्ला अदालत में २०७९ माघ ५ गते मामला दायर किया था। जिल्ला अदालत की न्यायाधीश अवनी मैनाली भट्टराई की इजलास ने २०८० मंसिर ५ गते वडाध्यक्ष अधिकारी को दोषी ठहराते हुए ४ महीने की कैद और १० हजार रुपये क्षतिपूर्ति का फैसला सुनाया था।

वडाध्यक्ष अधिकारी ने इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की थी। उच्च अदालत की न्यायाधीश अन्जु उप्रेती ढकाल और मेरिना श्रेष्ठ की इजलास ने जिल्ला अदालत के फैसले को स्वीकृत किया है। जातीय तथा अन्य सामाजिक छुआछूत और भेदभाव सम्बन्धी (कसूर व सजाय) ऐन, २०६८ के तहत जातीय भेदभाव करने वालों को ३ महीने की कैद और ५० हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। सार्वजनिक पद धारक व्यक्तियों के मामले में यदि आरोप सिद्ध हो तो सजा ५० प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। इसी के अनुसार अधिकारी को डेढ़ महीना अधिक, यानि साड़े ४ महीने की कैद, ७५ हजार रुपए का जुर्माना और प्रभावित पार्टी को १० हजार रुपए क्षतिपूर्ति का आदेश दिया गया है।

दलित समुदाय के लिए आरक्षित बजट को वडाध्यक्ष अधिकारी द्वारा अन्यत्र खर्च करने के बाद सवाल उठा रही नेपाली पर जातीय दुर्व्यवहार हुआ था। अधिकारी ने नेपाली के प्रति अपशब्द कहे और दलित होने के कारण अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था। नेपाली ने न्याय के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने १५ दिन हिरासत में रखते हुए जांच की और फिर जिल्ला अदालत में मामला दायर किया गया। थुनछेक इजलास की ओर से अधिकारी को १ लाख ५० हजार रुपए जमानत पर रिहा किया गया था। वडासदस्य नेपाली ने बताया कि अदालत ने शायद देर से लेकिन न्याय दिया है।

उन्होंने कहा, “दुर्व्यवहार दलित होने के कारण हुआ और पूरे समुदाय के प्रति अपमानजनक व्यवहार था, जिसके लिए अदालत ने राहत महसूस कराई है। मैं चुप रहती तो अन्य लोग क्या करते, इस डर ने मुझे आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। मैं तो पुराने अनुभवों से गुजर चुकी हूँ, आज भी मेरा समुदाय इन्हीं समस्याओं का सामना कर रहा है। अब चुप रहना सही नहीं, इसलिए मैंने आवाज उठाई।”