
९ वैशाख, काठमाडौं। प्रतिनिधि सभाका सभामुख, विभिन्न दलों के प्रमुख सचेतक, सचेतक और प्रतिनिधि बुधवार को आयोजित चर्चा में इस निष्कर्ष पर पहुंचे—‘कूटनीतिक राहदानी के सिफारिश और उपयोग से जुड़े विषयों पर हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि तत्काल के लिए वर्तमान कानून कडाई से पालन किया जाएगा और दीर्घकालीन सुधारों के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।’ इस चर्चा में भाग लेने वाली राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) की प्रमुख सचेतक खुश्बु ओली के अनुसार, सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने बताया कि प्रतिनिधि सभा के सदस्यों से कूटनीतिक राहदानी की मांग बढ़ रही है, इसलिए सभी दलों के प्रमुख सचेतक और सचेतकों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया।
गत फागुन में संपन्न चुनाव से निर्वाचित सांसदों ने कूटनीतिक राहदानी के लिए संघीय संसद सचिवालय में आवेदन दिया है। सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी ने कहा, ‘तीन से चार सांसदों ने कूटनीतिक राहदानी के लिए आवेदन किया है।’ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, प्रधान न्यायाधीश, मंत्री, संघीय एवं प्रदेश सांसद, राष्ट्रिय योजना आयोग के उपाध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, महानगर के मेयर एवं उपमेयर को कूटनीतिक राहदानी प्रदान की जाती है। सचिवालय की सिफारिश के आधार पर परराष्ट्र मंत्रालय कूटनीतिक नोट जारी करता है, इसके बाद वीजा प्रक्रिया शुरू होती है।
कूटनीतिक राहदानी (रातो पासपोर्ट) प्राप्त करना वीजा मिलने की गारंटी नहीं है। परंतु कुछ सांसदों में अनावश्यक कूटनीतिक राहदानी पर आकर्षण देखा गया है, जो परराष्ट्र मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है। ‘राहदानी ऐन और नियमावली के अनुसार, केवल विशेष सरकारी कार्य या कार्यों के लिए निर्दिष्ट पदाधिकारी ही कूटनीतिक राहदानी प्राप्त कर सकते हैं,’ राप्रपा की प्रमुख सचेतक ओली ने चर्चा के बाद पत्रकारों से कहा, ‘लेकिन कई माननीयों को विभिन्न कारणों से विदेश यात्रा करनी पड़ती है, और वर्तमान नियमावली के अनुसार उचित नहीं होता, इसलिए आगामी दिनों में सुविधा प्रदान करने के तरीकों पर विभिन्न दलों से सुझाव मांगे गए हैं।’
सरकारी कार्यों के लिए ही विदेश यात्रा के दौरान इस राहदानी का उपयोग कानूनी प्रावधान है। राहदानी ऐन में सरकारी कार्यों या विशेष कामों के सिलसिले में विदेश जाने वाले पदाधिकारियों को संबंधित मंत्रालय, संवैधानिक निकाय या सचिवालय से निर्णय या सिफारिश मिलने पर कूटनीतिक राहदानी जारी करने का प्रावधान है। हालांकि, कुछ सांसद व्यक्तिगत कारणों के लिए भी कूटनीतिक राहदानी की सिफारिश के लिए संघीय संसद सचिवालय आते हैं, यह वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। नाम उजागर न करने वाले उस अधिकारी ने कहा, ‘जब हम कानूनी अनुपालन नहीं बताते हैं, तो संशोधन के विषय में चर्चा होगी।’
आप्रवासन संबंधित सलाह देने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी हेन्ली एंड पार्टनर्स के अनुसार, नेपाल का पासपोर्ट वर्तमान में ३५ अंक के साथ विश्व में ९६वें स्थान पर है, जबकि जुलाई २०२५ में इसकी रैंकिंग ३८ अंक के साथ ९५वीं थी। इस बार संघीय सांसद व्यक्तिगत यात्रा में भी कूटनीतिक राहदानी के उपयोग की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट के दुरुपयोग और दंडहीनता के कारण नेपाल के पासपोर्ट की स्थिति कमजोर होती जा रही है।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, प्रधान न्यायाधीश, मंत्री, संघीय और प्रदेश सांसद, राष्ट्रिय योजना आयोग के उपाध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, महानगर के मेयर और उपमेयर को कूटनीतिक राहदानी मिलती है। खासतौर पर संघीय सांसदों द्वारा दुरुपयोग की घटनाएं अधिक दर्ज की गई हैं। कूटनीतिक राहदानी न लौटाने और व्यक्तिगत मामलों में इसका उपयोग बढ़ रहा है। पूर्व सदस्य संसद शिवपुजन राय, गायत्री साह, विश्वनाथ यादव इस तरह के पासपोर्ट की बिक्री में संलिप्त पाए गए थे, जो अदालत ने प्रमाणित किया था। इस बार संघीय सांसदों ने व्यक्तिगत यात्रा में भी कूटनीतिक राहदानी का प्रयोग करने की मांग की है, यह सूत्रों द्वारा पुष्टि की गई है।
प्रतिनिधि सभा के सभामुख, प्रमुख सचेतक और सचेतक मौजूद चर्चा में परराष्ट्र सचिव अमृत राई ने राहदानी ऐन, २०७६ और राहदानी नियमावली, २०७७ के अनुसार केवल सरकारी या विशेष कार्य के लिए इसका उपयोग संभव होने पर ही अनुमति दी जाने का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वीजा प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने के उपाय खोजे जाने चाहिए। संघीय संसद के महासचिव पद्मप्रसाद पांडे ने कहा कि निर्धारित प्रयोजन के अलावा राहदानी का उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी कार्यों के लिए कूटनीतिक राहदानी और निजी यात्राओं के लिए साधारण राहदानी का उपयोग किया जाए, जो सभामुख के सचिवालय की विज्ञप्ति में उल्लिखित है। वर्तमान में राहदानी के निर्धारित प्रयोजन से अलग उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
साल २०४९ तक परराष्ट्र मंत्रालय ने त्रिभुवन अन्तरराष्ट्रीय विमानस्थल में अपने कर्मचारी नियुक्त करके अवैध कूटनीतिक राहदानी के उपयोग पर रोक लगाई थी, लेकिन अब मंत्रालय ने कर्मचारी नहीं लगाए हैं और कूटनीतिक राहदानी कम ही वापस मिलती हैं, यह समय-समय पर सुनने को मिलता है। अपवादों को छोड़कर सभी को कूटनीतिक राहदानी वापस करने की आवश्यकता होती है, लेकिन ऐसा मालूम होता है कि अधिकतर लोग इसका पालन नहीं करते। पूर्व परराष्ट्र मंत्री प्रदीप ज्ञवाली कहते हैं कि कूटनीतिक राहदानी देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है, इसलिए संसद में इसके उपयोग पर विवेकपूर्ण निर्णय लेना आवश्यक है। उनके अनुसार, ‘यह किसी भोग विलास की वस्तु नहीं है, बल्कि देश और संसद की गरिमा के आधार पर जारी की जाती है। व्यक्तिगत यात्रा के लिए साधारण राहदानी का उपयोग करना उचित रहता है।’





