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सुकुमवासी संबंधी सरकार की शासकीय सुधार कार्यसूची में क्या-क्या शामिल है?

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने सुकुमवासी लोगों के रहने वाले क्षेत्र खाली कराए जाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए हैं। सरकार ने भूमिहीन, सुकुमवासी एवं अव्यवस्थित बसोबास करने वालों की एकीकृत डिजिटल उपस्थिति संग्रहण 60 दिन के भीतर पूरा करने की योजना बनाई है। सुकुमवासी समस्याओं के समाधान के लिए उच्च स्तरीय राष्ट्रीय भूमि अधिकार प्राधिकरण गठन का वादा रास्वपा ने किया है। 10 वैशाख, काठमांडू।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा सुकुमवासी आबादी वाले क्षेत्रों को खाली कराने के लिए सुरक्षा विभाग को निर्देश देने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। बुधवार को सुरक्षा विभाग के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री शाह ने इन क्षेत्रों को खाली कराने का निर्देश दिया था। नई सरकार के पहले दिन मंत्रिमंडल द्वारा पारित शासकीय सुधार की 100 कार्यसूचियों में भूमिहीन, सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबास करने वालों को हटाने की नीति शामिल नहीं की गई है।

शासकीय सुधार की 100 कार्यसूचियों में 90वें क्रमांक पर भूमिहीन, सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबास करने वालों की एकीकृत उपस्थिति संग्रहण करने का उल्लेख है। देशभर के भूमिहीन, सुकुमवासी एवं अव्यवस्थित रहने वालों का डिजिटल प्रमाणिकरण 60 दिनों के भीतर पूरा करने का सरकार का लक्ष्य है। शाह नेतृत्व वाली सरकार ने भूमिहीन, सुकुमवासी तथा अव्यवस्थित बसोबास से जुड़ी समस्याओं को 1000 दिन के अंदर सुलझाने का संकल्प लिया है।

इस अवधि में स्थानीय स्तर के साथ समन्वय कर आवासीय परिवारों का सर्वेक्षण करने, वास्तविक लाभार्थियों की पहचान के लिए स्पष्ट मानदंड लागू करने की योजना भी है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक, ऐलानी एवं गुठी भूमि के अभिलेखों का अद्यतनीकरण, नक्शांकन तथा भू-स्थानिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की शासकीय सुधार कार्यसूची में सुकुमवासी विषय से जुड़ी प्रमुख पहलें क्या-क्या हैं? सरकार ने वास्तविक सुकुमवासियों को चरणबद्ध ढंग से जमीन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।

शहरी क्षेत्रों में स्थित भूमिहीन, सुकुमवासी और अव्यवस्थित बसोबास करने वालों के लिए वैकल्पिक रूप से एकीकृत आवासीय योजना भी शासकीय सुधार कार्यसूची में शामिल है। पुनर्वास की व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। सरकार भूमिहीन लोगों के लिए जमीन आवंटन और पुनर्वास प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का भरोसा दे रही है। चुनावों से पहले जारी अपने सार्वजनिक वचनपत्र में रास्वपा ने सुकुमवासी समस्या के समाधान हेतु उच्च स्तरीय भूमि अधिकार प्राधिकरण गठन का वादा किया था।

नकली एवं वास्तविक सुकुमवासियों को अलग करने के लिए ‘उच्च स्तरीय राष्ट्रीय भूमि अधिकार प्राधिकरण’ गठन करने का संकल्प रास्वपा ने व्यक्त किया था। भूमिहीन, सुकुमवासी एवं अव्यवस्थित बसोबास से संबंधित रास्वपा के वचनपत्र में कहा गया है, “बीती असफलताओं से सीख लेते हुए, भू-उपग्रह नक्सांकन और डिजिटल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से वास्तविक भूमिहीन तथा सरकारी जमीनों का गलत कब्जा करने वाले नकली सुकुमवासियों को वैज्ञानिक रूप से अलग किया जाएगा। उच्च स्तरीय राष्ट्रीय भूमि अधिकार प्राधिकरण गठित किया जाएगा। वास्तविक भूमिहीनों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और उत्पादन से जुड़े एकीकृत नमूना बस्ती का विकास कर स्थायी आवास एवं भूमि के स्वामित्व (लालपूर्जा) की गारंटी दी जाएगी।