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रोपाई के लिए उर्वरक की कमी का खतरा, नेपाल ने भारत से सहयोग की मांग की

संक्षेप में, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण नेपाल में खरीदे गए 94 हजार टन रासायनिक उर्वरक का आयात अवरुद्ध हो गया है। सरकार ने भारत से जी-टू-जी व्यवस्था के तहत 1 लाख 50 हजार टन उर्वरक उपलब्ध कराने का औपचारिक अनुरोध भेजा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमत दुगुनी बढ़ने से ठेका समझौता कर चुके आपूर्ताकारों ने फोर्स मेजर घोषित कर दिया है। 13 वैशाख, काठमांडू। नई सरकार द्वारा रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति और वितरण को व्यवस्थित करने का राष्ट्रीय प्रतिबद्धता जताने के बीच, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने नेपाल के कृषि क्षेत्र को संकट में डालने का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय ने आवश्यक आंकड़ों के आधार पर उर्वरक खरीद कैलेंडर बनाकर वितरण प्रणाली सुधारने का मसौदा तैयार किया है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण नेपाल आना चाहिए था रासायनिक उर्वरक का आयात रुक गया है। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के कारण खरीद समझौते के तहत 94 हजार टन से अधिक रासायनिक उर्वरक का आयात पूरी तरह रोका गया है। 90 हजार टन अतिरिक्त खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है, लेकिन युद्ध के कारण ‘स्टेट ऑफ होरमुझ’ मार्ग अवरुद्ध होने से मुख्य कृषि अवधि में किसानों को उर्वरक की कमी का सामना करना पड़ सकने का जोखिम बढ़ गया है।

उर्वरक आपूर्ति के प्रभारी कृषि सामग्री कंपनी लिमिटेड, साल्ट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड और कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय ने बताया है कि वर्तमान गोदामों और रास्ते में मौजूद मात्रा के कारण आगामी असार मास तक उर्वरक की आपूर्ति संभव है। अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि तथा होरमुझ और अन्य जलमार्गों में व्यवधान के कारण ठेका प्राप्त आपूर्ताकारों ने ‘फोर्स मेजर’ घोषित कर उर्वरक आपूर्ति बंद कर दी है, जिससे साउन के बाद की कृषि अवधि पूरी तरह प्रभावित होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कमी और बढ़े मूल्य के कारण आपूर्ताकार नेपाल में उर्वरक लाने के इच्छुक नहीं हैं। सरकार द्वारा यूरिया उर्वरक की आपूर्ति के लिए जारी पिछले दो निविदाओं में कोई रूचि नहीं दिखाई गई। इसके बाद फिर से 21 दिन की अवधि के साथ निकली एक और निविदा में भी किसी भी ढुलाई कंपनी ने आवेदन नहीं दिया, कृषि सामग्री कंपनी ने जानकारी दी है।

उर्वरक खरीद के लिए बजट की कमी, बढ़ रहे मूल्य और नए निविदा रद्द होने जैसे जटिल हालात में कृषि संकट से बचने के लिए सरकार ने भारत से सरकार-से सरकार (जी-टू-जी) व्यवस्था के तहत सहयोग मांगा है। कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय के सहसचिव एवं कृषि विकास महाशाखा प्रमुख डॉ. रामकृष्ण श्रेष्ठ के अनुसार, वर्तमान में नेपाल में कुल 1 लाख 70 हजार टन रासायनिक उर्वरक उपलब्ध है, जो असार तक की मांग पूरी करेगा। डॉ. श्रेष्ठ ने कहा, ‘गोदाम में मौजूद स्टॉक और रास्ते पर आवागमन में मौजूद सामग्री को मिलाकर कुल 1 लाख 70 हजार टन है। यह असार तक पर्याप्त रहेगा, लेकिन मुख्य समस्या साउन के बाद की है। होरमुझ जलमार्ग खुलने में देरी होने पर साउन से उर्वरक की कमी की चिंता बनी हुई है।’