
लेख जानकारी
२०७८ साल में मध्य प्रदेश में दूसरी प्रदेशसभा के गठन के बाद अब तक चार मुख्यमंत्रियों का परिवर्तन हो चुका है। राजनीतिक अस्थिरता ने मध्य प्रदेश के विकास कार्यों और ‘प्रदेश गौरव’ के अंतर्गत शुरू किए गए महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अधर में या बंद अवस्था में पहुंचा दिया है। प्रदेश स्थापना के बाद पहले कार्यकाल में मुख्यमंत्री लालबाबु राउत ने पूरे पांच वर्षों तक सरकार को सफलता पूर्वक चलाया। राउत ने महिलाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए। प्रदेश गौरव योजनाओं के रूप में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान, विद्यालय जाने वाली बालिकाओं को साइकिल वितरण, बेटी जन्म पर मुफ्त बीमा, छुआ-छूत विरोधी कानून जैसी योजनाएं शुरू की गईं। पूर्व मुख्यमंत्री राउत ने कहा, “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना शुरू में बेटियों की शिक्षा के लिए ही लाई गई थी। बीमा कार्यक्रम में जन्मी बेटियों को तीन लाख रुपये का बीमा दिया जाता था। यह भ्रूण हत्या कम करने तथा बेटी जन्म पर दुखी न होने बल्कि खुशी मनाने के लिए डिजाइन किया गया था।”
“मेरी शुरू से मान्यता थी कि महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए। ये योजनाएं समाज को सकारात्मक दिशा में ले जाने वाली थीं,” उन्होंने कहा। लेकिन, २०७९ साल में खरीदी गई साइकिलों में भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलने पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम रोक दिया गया। वे साइकिलें अभी भी जनकपुर के तंबाकू कारखाने के भंडारण गृह में पड़ी हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के तहत होने वाली बेटी शिक्षा बीमा योजना भी प्रभावहीन साबित हुई है। राउत के अनुसार २०७५/७६ में ५,६६६ बालिकाओं का बीमा किया गया था, लेकिन अब तक लगभग १६ ही बच्चियों को बीमा सेवाएं निरंतर प्रदान की जा रही हैं। इसके बाद लगभग ९,००० आवेदन पूरी तरह से लागू नहीं हो सके हैं।
जनमत पार्टी के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह स्वीकार करते हैं कि पूर्व की योजनाएं जारी नहीं रख पाई गईं। “मेरे द्वारा शुरू की गई तीन-चार बड़ी योजनाएं भी संचालित नहीं हो सकीं,” सिंह ने कहा। उन्होंने कर्मचारी प्रबंधन को दोषी बताया। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ लोकप्रिय होने के बावजूद निरंतरता न मिलने कारणों पर पूछने पर सिंह ने कहा, “भ्रष्टाचार के आरोप लगे, कर्मचारियों की उपस्थिति में समस्या रही, कार्यविधि स्पष्ट नहीं थी। कर्मचारी विशेषज्ञ तो बनेंगे, लेकिन ईमानदारी से प्रयास न करना समस्याएं बढ़ाता है। इसलिए प्रदेश गौरव योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं।”
दूसरी ओर, जसपा के मुख्यमंत्री सरोज यादव के कार्यकाल में जनकपुर में रामजानकी बहुउद्देश्यीय रंगशाला निर्माण की घोषणा हुई। २०७७ में प्रदेश परिवहन कार्यक्रम के अंतर्गत पाँच आधुनिक बसें ३ करोड ९ लाख रुपये में खरीदी गई थीं। इन बसों को जनकपुर-वीरगंज और जनकपुर-राजविराज मार्गों पर चलाने की योजना थी, लेकिन बाद में ये बसें अन्य संस्थानों को हस्तांतरित कर दी गईं। केवल २४ दिन के कार्यकाल पाने वाले एमाले के मुख्यमंत्री सरोज यादव ने मधेस आंदोलन के शहीदों को ‘मधेस रत्न’ पुरस्कार देने, किसानों को राहत देने तथा बेरोजगार युवाओं को भत्ता देने जैसी योजनाएं लाईं, जो केवल घोषणाओं तक सीमित रह गईं।
मध्य प्रदेश में अब छठे मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश प्रमुख सुरेन्द्र लाभ कर्ण ने संविधान की अनुच्छेद १६८ उप-धारा (२) के तहत नेपाल कांग्रेस के कृष्ण प्रसाद यादव को नियुक्त किया है। वे मध्य प्रदेश की अनियमितताओं को समाप्त करने, सुशासन स्थापित करने और कृषि-आधारित प्रदेश होने के नाते किसान एवं कृषि क्षेत्र में विकास करने का सार्वजनिक रूप से वादा करते हैं। मध्य प्रदेश योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. सोहन प्रसाद साह कहते हैं, “पहली योजनाएं अधर में हैं। स्थिति क्या है, इसका निरिक्षण, अध्ययन और निगरानी भी नहीं की गई है।”
राजनीतिक विश्लेषक चंद्र किशोर कहते हैं, “गठबंधन सरकार के दौरान सभी पार्टियां अपने-अपने हितों में रहती हैं। सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों को निरंतरता मिलनी चाहिए। संघीयता के सातवें वर्ष में भी जो योजनाएं शुरू हुई हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाए तो कुछ सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं। इन सभी योजनाओं का सीधा प्रभाव जनता पर पड़ना चाहिए।” योजनाओं को लाने के बावजूद लागू न करने से आम जनमानस में सरकार के प्रति आशा कमजोर होती जा रही है और शिकायतें बढ़ रही हैं।





