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कीर्तिपुर क्रिकेट रंगशाला: सम्झौता अवधि बढ़ाने का फैसला

त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने नेपाल क्रिकेट संघ के लीज में संचालित कीर्तिपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट रंगशाला की सम्झौता अवधि बढ़ाने का निर्णय सरकार ने सोमवार मंत्रिपरिषद् बैठक के बाद लिया है। इस निर्णय की उद्घोषणा सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने की है। हाल ही में फ्लड लाइट समेत रंगशाला के निर्माण पूरा होने के बाद त्रिवि की जानकारी के अनुसार रंगशाला के भविष्य को लेकर अनेक संशय और द्विविधाएं उत्पन्न हुई थीं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अंतर्गत स्थित रंगशाला का क्षेत्रफल ७६ रोपनी है। विश्वविद्यालय ने अतिक्रमित भूमि वापस पाने के लिए एक भूमि जांच समिति गठित की थी और उसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर सूचक जारी करते हुए अतिक्रमित जमीन वापसी के लिए आह्वान किया गया था। इसी क्रम में विभिन्न १८ संघ-संस्थाओं को अल्टीमेटम दिया गया था, जिसमें नेपाल क्रिकेट एसोसिएशन (क्यान) भी शामिल था।

नेपाल क्रिकेट संघ के प्रवक्ता छुम्वी लामाले ने कहा कि नेपाली क्रिकेट की एकमात्र रंगशाला का सम्झौता जल्दी नवीनीकरण होगा। उन्होंने कहा, “यह मामला केवल रंगशाला तक सीमित नहीं है, इसमें राष्ट्र और खिलाड़ी जुड़े हुए हैं। सरकार का भी निवेश है। यह पूरी तरह से देश के खेल क्षेत्र में उपयोग होने वाली संपत्ति है।” नेपाल क्रिकेट संघ और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के बीच २५ वर्ष के लिए क्रिकेट मैदान का पट्टा लिया गया था जो वैशाख के अंत में समाप्त हो रहा है। सम्झौता नवीनीकरण की प्रक्रिया पिछले वर्ष से शुरू की गई थी तथा युवा एवं खेल मंत्रालय राष्ट्रीय खेलकुद परिषद् (राखेप) के माध्यम से त्रिवि के अधिकारियों के साथ वार्ता कर रहा था।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने सम्झौता नवीनीकरण में कुछ विषयों पर अनिच्छा जताई है। विशेष रूप से कीर्तिपुर में लंबे समय तक क्रिकेट प्रतियोगिताओं के कारण त्रिभुवन विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। खेल के दौरान विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी और प्राध्यापक आवागमन में कठिनाई का सामना कर असंतुष्टि व्यक्त कर चुके हैं। त्रिवि के विश्वविद्यालय विद्यार्थी कल्याण तथा खेलकूद निर्देशनालय के निदेशक डा. दीपेन्द्र पराजुली ने बताया कि विश्वविद्यालय ने सभी संघ-संगठन को ३५ दिनों में भूमि खाली करने का नोटिस जारी किया है जिसमें कीर्तिपुर रंगशाला भी शामिल है।

कीर्तिपुर रंगशाला के संदर्भ में उन्होंने कहा, “इसका समाधान करने के लिए नीति बनाना आवश्यक है और नीति बनाना संभव है। रंगशाला से भी बड़े यहां अन्य समस्याएं मौजूद हैं। भविष्य में यदि कोई संरचना हटानी पड़े तो यह नोटिस उसे मार्गदर्शन देगा।” सामाजिक मीडिया में रंगशाला को ध्वस्त करने जैसी अफवाहों का उन्होंने साफ तौर पर खंडन किया और कहा कि ये केवल अफवाहें हैं। रंगशाला त्रिभुवन विश्वविद्यालय की संपत्ति है और उसे ध्वस्त नहीं किया जाएगा।

इस बीच नेपाल सरकार ने कीर्तिपुर क्रिकेट मैदान में करोड़ों की निवेश से रंगशाला की संरचना का विस्तार करने में सफलता हासिल की है और आगामी वर्ष के बजट में इसे प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने हाल ही लगभग एक अरब रुपये खर्च कर १० हजार सीट क्षमता वाले प्यारापिट और फ्लड लाइट स्थापित कर कीर्तिपुर रंगशाला को स्तरोन्नत किया है। शहरी विकास मंत्रालय ने ४३ करोड़ ७७ लाख रुपये में १० हजार सीट का प्यारापिट बनाया और ४२ करोड़ १९ लाख रुपये में फ्लड लाइट जड़ाई की। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के कार्यकाल में आगामी वर्ष के लिए कीर्तिपुर रंगशाला परियोजना को स्वीकृति दी गई और इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता प्राप्त योजना घोषित किया गया। इसके लिए गुरुयोजना के अनुसार शेष कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी गई है। क्यान रंगशाला को और बढ़ावा देते हुए आगामी वर्ष वीआईपी रूम, खिलाड़ियों के शौचालय, चेंजिंग रूम और मीडिया बॉक्स निर्माण की योजना बना रहा है।